अज़ीज़ नाज़रीन,
मोदी
इन्तेज़ामियाँ, बीजेपी, संघी दहशतगर्द, शिद्दत पसंद हिन्दू और ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर
और लँगूरनियों को जिन्नों का खतरा सदा बना रहता है. ट्रिपल तलाक़ की धुलाई के बाद अब करोना का जिन्ना
मोदी इंतेज़ामिया के लिए सख़्त अना और वक़ार का मसला बन गया है.
जिस हिसाब से मोदी इन्तेज़ामियाँ हालात से निबटने में ना काम साबित हुई और ग़फ़लत साफ़ तोर पर ज़ाहिर हुई तो अब मोदी ने वज़ीरे आज़म महल के बहार बंधे हुए पालतू ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियों को जमात और मर्कज़ निजामुद्दीन के पीछे लगा दिया. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी ललकार है इन तमाम संघी फ़ौजिओं (मोदी सैनिकों), हूकूमते हिन्द, बीजेपी और ज़ाफ़रानी लंगूर लँगूरनियाँ को की किसी भी हक़ पसंद मुसलमान का बाल तक बींका नहीं कर सकोगे.
अब बीमारी की साजिश भी मुस्लिम अवाम और जमाती करने लगे. सहाफी को इन गोबर छाप कम अक़्ल दिमाग़ी मरीज़ों पर अब तो हसी भी नहीं आती क्योंकि ये लोग ऐसे ही कामों के लिए मशहूर हो चुके हैं और अपनी हुकूमत और वतन का नाम बेरुन मुल्क खूब ऐसी दिमाग़ी दिवालिया पन की बीमारी की वजह से रोशन कर रहें हैं. अब ज़ी न्यूज़ अवामी चेंनल के इन जैसे दिमाग़ी मुफ़लिसों को कोई क्या कहेगा जो सुधीर तिहाड़ी एक खबर चलाता है की अमेरिका, जर्मनी और रूस ने भारत से गाये का पख़ाना और पेशाब माँगा है. इस दिमाग़ी क़ैदी सुधीर तिहाड़ी के खबरनामे के हिसाब से
ये
आला तालीमी आफ़ता मुमालिक अमेरिका, जेर्मनी और रूस जैसे सुपर पावर मगरिबी तहज़ीब
में भी
संघी (हिन्दू) नज़रियात की वाह
वाही
हो रही है.
इस दिमाग़ी क़ैदी के हिसाब से बेरुन मुल्कों में पख़ाने पेशाब को खाने और पीने पर ज़ोर दिया जा रहा है. आगे ये क़ैदी कहता है की आला तालीमी आफ़ता जर्राह और तजुर्बेकार साइंसदान गाये के पख़ाने और पेशाब में ज़िन्दगी तलाशने के लिए उसके ऊपर मज़ीद तहक़ीक़ात करेगें इसलिए भारत से पख़ाना और पेशाब माँगा है. अब ये सहाफी इस बात को समझने से क़ासिर है जिस भारत का अवाम एक ट्रम्प के आने पर घुटनों के बल रेंगता हुआ पहुंच जाता है, जिस भारत के अवाम के सामने अगर अमेरिकी, जर्मनी या रूस के हुक्काम अपना
......... रख दें तो ये दिमाग़ी क़ैदी (संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू,
जुम्मन)
उसको भी शौक़ से ख़ाने को तैयार हो जायेगे उन अज़ीम मुमालिकों को भारत से गाये के पख़ाने पेशाब की मांग करने के पीछे की हिकमत समझ में नहीं आई. क्या इन मुमालिकों में गाय नहीं होती है. या जो संघी साधुओं का फलसफा है अमेरिकी गाये (जेर्सी) सौतेली फिर उसको काट सकते हो खा सकते हो, भारत की गावठी गाये गौ माता. ये सुधीर वही तिहाड़ का क़ैदी है जो बोलता था की २००० के नोट में मोदी जी ऐसी चिप लगा रहें हैं की खुद नोट दिख जाएगा और काला बाज़ारी करने वालों तक पुलिस पहुंच जायेगी, और आज की हालात में अब स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया खुद बोल रही है की कब ये नोट बंद हो जाएगा हमें नहीं मालूम. आर बी आई ने नए नोट कई सालों से नहीं छापे.
अब आइये अपने असल मुद्दे पर आतें हैं. करोना का वाइरस भी मोदी हुकूमत के लिए किसी जिन्न से कम साबित नहीं होगा. जिस तरह से पहले के तमाम जिन्न मोदी इंतेज़ामिया को ख़ौफ़ ज़दा करते रहे वैसा ही ये जिन्न भी करने वाला है. इसके असरात तो इब्तेदाई मरहले में ही हुकूमत पर सख़्त नुमाया होना शुरू हो गए. जब मोदी ने हूकूम दिया था की २१ दिनों का लॉक डाउन करो तो, हम इस वाइरस पर काबू पा लेंगे और इस जिन्न से जंग जीत जायेगे. अब सवाल ये उठता है मोदी के साथ उसके खुद के कारिंदे और पैरोकार नहीं हैं. एक दिन के अवामी कर्फ्यू के रोज़ जो रात ९ बजे तक था लेकिन शाम ५ बाजे किस क़दर भीड़ इकठ्ठा हुई और सड़को पर हुजूम बरपा कर दिया.
कोई अपने आक़ा की ताईद में ताली ठोक कर सबूत दे रहा था की हम भी आपके जैसे ही हैं कोई उससे भी आगे निकल कर थाली ठोंक रहा था की हम तो आपसे भी आगे हैं. फिर इस हुजूम में ना सिर्फ ताली बाज़ थे बल्कि पुलिस के आला ओहदेदार ३ स्टार पुलिस वाले भी ताली ठोक रहे थे. अब ऐसे नामर्दों को पुलिस में किस बुनयाद पर रखा गया ये बड़ा सवाल हैं. क्या पुलिस, फौज में नौकरी देते वक़्त इंसान की जिस्मानी कैफियत को नहीं परखा जाता है. और उस ताली बाज़ पुलिस अफसर की जिस्मानी कैफियत एक मर्द जैसी नहीं थी तो उसको किसकी सिफारिश पर पुलिस में रखा गया.
उतने
पर भी जब जंग की धुल ठंडी नहीं हुई तो मोदी ने एक नाहेल, नकारा ग़ैर ज़िम्मेदार हाकिम
के जैसे फौरी तोर से लॉक डाउन का एलान कर दिया.
अब इस एलान के बाद किसी को भी अपनी जगह से नहीं हिलना था जो जहाँ है वही रहे. फिर इतना सब कुछ करने के बाद भी जब वो जिन्न हुकूमत
के क़ाबू में नहीं आया और मोदी इंतेज़ामिया की सख़्त फजीती होने लगी, और हर जानिब मोदी,
संघ और बीजेपी के गुनाहों की बात होने लगी, और मोदी ने अपने आपको चौतरफ घिरता हुआ देखा,
तो बिल आख़िर अब जमातियों पर इलज़ाम तराशी कर दी और उनको बली का बकरा बना कर हलाल कर
दिया. इस मिशन के नाकाम होने के ऊपर जब अवाम
के ऊपर इलज़ाम तराशी की गई थे तब एक ट्वीट इस सहाफी ने किया है.
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Admin
और नोट बंदी वो किस की नाहीली से फेल हुआ. हुकूमत का तो कहना था की नोट बंदी से काले धन की तस्करी और घोटाले रुक जायेगे. आतंकवाद पर लगाम लगेगी. क्या ख़ाक लगाम लगी अगर आतकवाद पर लगाम लगती तो नोट बंदी से ले कर लीचिंग पूरी तरह बंद होना थी. फिर दिल्ली संघी आतंकी प्रायोजित हमला नहीं होना चाहिए था. घोटालों की बात तो ना ही की जाए तो बेहतर होगा. दूसरी बात पुलवामा किस की गलती की वजह से हुआ. तीसरी बात आसाम में NRC में १० लाख हिन्दू थे वो प्रक्रिया किस की नाहीली की वजह से फेल हुई. तुम्हारी हुकूमत ने तो ४५ लाख लोगों को बंगलादेशी घोषित कर दिया था. फिर फाइनल लिस्ट में महज़ ५ लाख ही मुस्लिम रहे बाक़ी सब हिन्दू. तुम्हारी हुकूमत तो सोच रही थी की कम से कम ४० लाख मुस्लिम बहार हो जायेगें. अरे ना क़ाबिल तू एक जालसाज़, फरेबी और धोखेबाज़ हुकुमरान है. मान ले. २०१४ से देश तुमाहरी नाहेली और निक्कम्मे पन की भेंट चढ़ रहा है और तुम हर काम पर कभी पाकिस्तान ज़िम्मेदार है कभी अवाम ज़िम्मेदार है कभी जमात ज़िम्मेदार है. अरे कभी तो हक़गोई से बात करो और अपनी गफलत और गलती को तस्लीम करो.
मोदी इंतेज़ामिया की ऐसी हिकमते अमली से किसी बोहोत बड़ी साजिश की बू आ रही है. क्योंकि जितने भी जमाती थे वो सब हुकूमत हिन्द के ऐलान के पैरोकार थे. किसी ने भी कुछ भी ग़ैर क़ानूनी काम नहीं किया बरक्स जिस अंदाज़ में आज उनको पेश किया जा रहा है वो ग़ैर क़ानूनी और दहशत आमोज़ हैं. फिर जिन निज़ामुद्दीन मर्कज़ के अवाम ने हुकूमत के ऐलान का एहतेराम किया वो सब छूपे हुए थे और जो शनि सिंगापूर मंदिर, शिरडी साईं मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, तृपति बालाजी मंदिर और दीगर मंदिरों में लॉक डाउन हो गए थे वो सब फस गए. ये छूपे हुए थे वो फस गए. और ये ही जो फलसफा है ज़ाफ़रानी दहशत का वो ज़हर है. इस ज़िम्न में एक ट्वीट किया है.
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Admin
ये सब एक साजिश के तहत किया हुआ काम है. जब संघी आतंकिओं, कट्टरपंथी हिन्दू, बीजेपी वाले और खुद मोदी के ऊपर सवालों का सिलसिला तेज़ हुआ तो लगा दिया मुसलमानों के ऊपर इलज़ाम. पहले हर मसले पर पाक को कटघरे में खड़ा कर देते थे. लेकिन पाक के साथ हम हैं अगर एक भी उलटी सीधी गलत बयानी लंगूर और लँगूरनियों ने की के उनके अगवाड़े और पिछवाड़े के तमाम बद आमालियां और ज़िना कारियाँ निकाल के पेश कर दी जाती है तो अब पाक के नाद में नहीं लगते लंगूर और लँगूरनियाँ. तो अब बचा कौन सिर्फ जमाती. जबकी मेरे पास सबूत मौजूद है २२ मार्च रात १२ बजे से लोक डाउन शुरू हुआ मतलत २३ मार्च से और मौलाना यूसुफ़ साहब ने एक लेटर २४/०३/२०२० को अंग्रेजी में टाइप और हाथ से लिखा हुआ कमिश्नर ऑफ़ पुलिस को लिखा है पुलिस की सील है तारीख है. जिसमे उन्होंने साफ़ अलफ़ाज़ में लिखा है हमारे यहाँ २५०० लोग आये थे १५०० जा चुके हैं १००० मौजूद है जो लॉक डाउन की वजह से अटक गए हैं इनको निकालने के लिए वाहन नंबर भी दिए हैं इन वाहन के पास दीजिये. लेकिन पुलिस खामोश रही. फिर दूसरी बात आज ३१ मार्च को जाग उठे हैवान / शैतान के जैसे पुलिस को कैसे याद आया की निज़ामुद्दीन में जमात के लोग अटके हैं.
जब तमाम लोगों ने मोदी और संघ के कुकर्मों के ऊपर लानत भेजना शुरू की और संघ, कट्टरपंथी हिन्दू समाज की मट्टी पलीद होना शुरू हुई तो लगे जमातों के ऊपर लान तान करने. पटना में एक मलेशिया के मौलाना को इन संघी और खाकी आतंकिओं ने पीट पीट के शहीद कर दिया. मलेशिया ने तो अंतरष्ट्रीय मंच पर मसला उठाया है जिसको अपनी फजीती होते देख कर सिर्फ लंगूर और लँगूरनियों के ज़रिये जमातों को बदनाम करने की साजिश है. दूसरी बात ऐसी कोई भी खबर अंतराष्ट्रीय मीडिया या अखबार में नहीं है सिर्फ हिंदी अखबारों और न्यूज़ चैनलों पर ही ऐसी झूटी और फरेबी खबरे चलाई जा रही है. ताके सिर्फ और सिर्फ भारत की जनता मोदी प्रेम जाल में फसी रहे और उसकी बदनामी के बजाये जमातों की बदनामी हो. अब इसके बाद अंग्रेजी अखबारों में मोदी के दबाव में ऐसी खबरे आ जाए तो कुछ नहीं कह सकते. और आएगी. क्योंकि मीडिया तो सिर्फ रखेल हो गया है संघ और आतंकवादिओं का.
ठीक है जिस अंदाज़ में संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू और आवारा
बदचलन हर्राफ़ दुर्गा वाहिनी की औरतें बोल रही हैं की ये तो करोना जिहाद है, जब खुदकश
बॉम्बर अवाम में घूस के अपने आपको हलाक कर लेता है तो ये भी उसी हिकमत का एक हिस्सा
है. ऐसे लोग दिमाग़ी मुफ़लिस हैं जो बीमारी को
भी हिन्दू मुस्लिम में तक़सीम कर रहे हैं.
ठीक है फिर कैंसर के बारे में भी बोल दो वो कौन सा जिहाद है. इस सहाफी ने बद्दुआ दी थी तमाम संघी, बीजेपी वालों को और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम को जो नबी की शान में बे हद अदना दर्जे की बदकलामी करते थे की उन सब को कैंसर होगा और मारे जायेगे. कुछ एक के बारे में बद्दुआ दी है की कीड़े पड़ेगें.
हिन्दुस्तान में कैंसर के बढ़ते हुए मरीज़ों की तादात के ऊपर ३ मज़मून लिख चूका हूँ दो हिंदी में और एक अंग्रेजी में. हिंदी वाले में हिन्दू दहशत का अड्डा गुजरात में कैंसर के मरीज़ों की बाढ़ आई है उसके ऊपर लिखा है. बोहोत से कमैंट्स दे चूका हूँ. फिर क्या वजह है जितने भी कैंसर के मरीज़ हैं वो सभी बीजीपी से ताल्लुक़ रखतें हैं कुछ तो मारे गए और कुछ मरना बाक़ी हैं. वहीँ दूसरी जानिब जो सेक्युलर दिमाग के थे वोह ठीक हो गए.
इस करोना को ये संघी और लंगूर करोना जिहाद बोल रहे हैं. ठीक है अब कोई बीमारी से नहीं मारे जागोगे बरक्स ऐसी चीज़ से मरोगे की जिसका कफ़्फ़ारा तुम किसी मुसलमान के ऊपर डाल ही नहीं सकते. एक एक संघी, शिद्दत पसंद, बीजेपी वाला और जुम्मन मारा जाएगा. जिनकी तादात हज़ारों में नहीं लाखो में भी नहीं बल्कि करोड़ों में होगी और ज़रूर मारा जाएगा. और पस तुम ये जान लो की तुम्हारे ऊपर ये ख़ुदा का अज़ाब है क़ेहर है तुम उसको किसी के ऊपर लाद नहीं सकोगे.
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