Wednesday, 29 April 2020

दुबाई के बाद ICC ने दिखाए तल्ख़ तेवर

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने हिंदी ताजिर दीपक अग्रवाल को (बेन) ममनूअ कर दिया, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में २०१८ में हुई टी १० लीग में एक फ्रेंचाइजी का मालिक था.  इस हिंदुस्तानी को उसके ख़िलाफ़ चल रही बदउनवानी, बदबख्ती की जांच में ज़बरदस्त धमकी और हूकूमति इदारों को दहशत का ख़ौफ़ दिखाने और हिंदी हुकूमत का रौब व दबाव डालने की बात मंज़ूर करने के बाद अग्रवाल के ख़िलाफ़ यह फैसला लिया गया.

उस पैसे का घपला करने वाले दरिंदे को बदउनवानी रोधी संहिता के खिलाफवर्जी करने की बात को मानने के बाद जांच में ताऊन करने की पेशकश की, जिससे उस दरिंदे और पैसे के गुलाम पर दो साल का बेन और छह महीने मुअत्तिली की सजा है.

अग्रवाल कुछ वक़्त के लिए टी १० टीम सिंधीज का जालसाज़ी और फरेब के ज़रिये मालिक बन बैठा था.  उसे जालसाज़ी, फ्राड और शर्तों की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने के तहत २०१८ के दौरान जुर्म का हिस्सेदार होने के नाते चार्ज किया गया.  पैसे की जालसाज़ी (भ्रष्टाचार) की रोक थाम करने वाली यूनिट की मुक्कम्मल रिपोर्ट के हिसाब से अग्रवाल को नावाक़िफ़ ‘मिस्टर एक्स’ के साथ मिलकर सबूत मिटाने के लिए मुजरिम क़रार दिया गया जिसके बाद उस दरिंदा सिफ़त हिंदुस्तानी शैतान पर बेन भी लगाया गया है.

आईसीसी ने अपने हुकुम नामे (फरमान) में कहा के , ‘दरिंदे, दहशतगर्दों के ज़ारिया ये माश अग्रवाल ने ‘मिस्टर एक्स’ को एक-दूसरे के बीच हई बातचीत के सारे मेसेज ‘डिलीट’ करने को कहा और एसीयू की जांच में शामिल होने से पहले उसने उसका नंबर भी ‘डिलीट’ कर दिया.’ अग्रवाल को ज़ाब्ताये अख़लाक़ के 2.4.7 आर्टिकल (अनुच्छेद) के हिसाब से मुजरिम किया गया है जो चल रही जांच में किसी भी दस्तावेज को तबाह करने, दीगर मालूमात और तहक़ीक़ात को पोशीदा (छुपाने) रखने या इनसे छेड़छाड़ करने से मुत्तालिक है. 

आईसीसी के महाप्रबंधक (इंटीग्रीटी) एलेक्स मार्शल ने कहा, ‘सिर्फ एक नहीं, ऐसी कई मिसालें हैं जहां दीपक की जानिब से जांच में ताख़ीर करने और जांच को मुत्तासिर करने और सबूतों को मिटाने के सुराग़ मिलते हैं. उस माशी दहशतगर्द ने हालांकि आईसीसी के भ्रष्टाचार रोधी क़ानूनों के खिलाफवर्जी करने की बात को कबूल किया और एसीयू को दीगर हिस्सेदारों के बारे में चल रही जांच में जरूरी मदद मुहैया कराने के बात कही हैं. इस मदद का उसकी सजा में दिखेगा या नहीं यह तो वक़्त ही बताएगा.  फिलहाल दरिंदा और हिन्दू माशी दहशतगर्द जेल की हवा खा रहा है.

सहाफी जुबेर का नुक़्तए नज़र

जहाँ तक हिन्दुस्तानियों का सवाल है वो नंबर १ के जुर्म पेशा, दहशत को फरोग देने वाले, ज़िना, क़त्ल, डाका, चोरी, फ्राड, जालसाज़ी, फ़िर्क़ापरास्त, और तमाम क़िस्म के जुर्म में मुलव्विस होतें हैं.  जो मुल्क इन लोगों के ऊपर भरोसा कर रहा है मतलब अपने ही मुल्क की माशी हालात को मज़ीद कमज़ोर कर रहा है.  जिस मुल्क में अमन चेन, सुकून और माशी फरोग है वहां सिर्फ एक हिंदुस्तानी (शिद्दतपसन्द) ज़ेहनियत को भेज दो.  मज़ीद कुछ करने की ज़रुरत ही नहीं चंद सालों में वोह हरा भरा दरख़्त सूख के मर जाएगा.  ये लोग अपने खुद के वतन भारत को तबाह और बर्बाद कर चुके खोकला कर के बेरुन मुल्क भाग गए.   तो इन लोगों से ये तवक़्क़ो कैसे की जा सकती है की ये लोग पराये मुल्क वोह भी माशी हालात से बे हद बेहतर उसको तबाह नहीं करेंगे.  वहां पर फ्राड, और भ्रष्टाचार नहीं फेलायेंगे.  

हर हिन्दुस्तानी आज कल हिन्दू दहशतगर्दों का मुहाफ़िज़ हो चूका है और बेरुन मुल्क से बड़ी तादात में पैसे का कारोबार कर के ये स्लिपर सेल हिन्दुस्तान में हिन्दू दहशतगर्दों को इमदाद फ़राहम करतें हैं. 

अब वक़्त आ चूका है की ना सिर्फ अरब मुमालिंकों से बल्कि तमाम दुनिया से हिन्दू अवाम को निकाल देना चाहिए.  हिंदुस्तान से तमाम दुनिया को अपने सभी तिजारती मोहायेदे मुनतक़ा कर देना चाहिए.  ख़ास अमेरिका और मग़रिबी मुमालिकों को हर हिंदुस्तानी को अपने मुल्कों से निकाल देना चाहिए.  कियोंके इस मुल्कों से कमाई हुई बड़ी रक़म हिन्दुस्तान भेजी जाती है जो हिन्दू दहशतगर्दों को फरोग देने में काम आ रही है.  

अगर आलमी बरादरी ऐसा नहीं करतें हैं तो ये समझने में देर नहीं लगेगी की खुद आलमी बरादरी हिन्दुस्तान में दहशतगर्दी को फ़रोग़ दे रही है.  और इलज़ाम मुस्लिम अवाम पर लाद रही है.

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