नई दिल्ली अप्रैल ११, २०२०
अज़ीज़ नाज़रीन
इंसान चाहे कितना भी क़वी क़ुव्वत
वाला ताक़तवर क्यों ना हो जाए, और वोह अपने ग़ुरूर और तककब्बुर की वजह से हद दर्जे के
ज़ुल्म, दहशत, नाइंसाफी, इज्तेमाई ख़ून, क़त्लों ग़ारत करता रहे और यह समझे की वोह तो दुनियाँ
का अज़ीम तरीन शख़्स है उसके पास ताक़त है क़ुव्वत है हर साजो सामान है उसका क्या कोई बाल
बीका कर सकेगा. और ये ही ग़फ़लत उस ज़ालिम को फ़ासी के फंदे तक ले जाती
है. क्योंकि ज़ालिम भलें ही अपने गुनाहों का हिसाब ना रखे लेकिन ऊपर वाला जिसने सारी
कायनात बनाई और दोनों जहाँ का मालिकों मुख्तार है वो तो ज़र्रा ज़र्रा नेकी और बदी का
हिसाब रखता है.
वही
हाल भारत के प्रधान मोदी का हो गया है. जिस
करोना को भारत के शिद्दत पसंद हिन्दू, ज़ाफ़रानी मीडिया जामत के लंगूर और लँगूरनियाँ,
ज़ाफ़रानी बीजेपी जमात के कारकून तब्लीग़ी जमात के ऊपर झूट और फरेब के साथ लाद रहें हैं
असल में वोह ग़फ़लत है उनके खुद के वज़ीरे आज़म की जो करोना का जिन्न अब हर शिद्दत पसंदों
को ख़ौफ़ ज़दा कर रहा है.
यह
खबरनामा लिखे जाने तक मुल्के हिन्द में कोरोना वायरस से मुत्तासरीनों की अदद शुमारी
८००० से ज़ाइद हो चुकी है, वहीं इस वबा में
मरने वालों की अदद भी 200 से ज़ाइद हो चुकी है।
लेकिन
सबसे हैरानी की बात तो ये है की जिस करोना की वबा के लिए तब्लीग़ी जमात को मुरदे इलज़ाम
ठराया जा रहा है अदद शुमारी तो कुछ और ही बयान कर रही है जो हुकूमत के लिए दुशवारी
और परेशान कुन सबब है. सबसे ज़्यादा परेशान
कर रहें हैं पिछले दो दिनों में हुए करोना मरीज़ों की तादात में मशुमार इज़ाफ़े की अदद
शुमारी। ९ अप्रैल को ७८७ मामले सामने आए और
१० अप्रैल को ८६३ मामले सामने आए हैं। इस बात
का इल्म हर किसी को होना चाहिए की जिस हिसाब से ५ अप्रैल को मोदी ने अपने अक़ीदत मंदों
को "अँधेरी रात में दिया था हाथ में"
उसके बाद इन अदद शुमारी से एक ख़ौफ़ का माहौल बन रहा है कहीं भारत तीसरे मरहले
की जानिब गामज़न तो नहीं करने वाला। वहीं १४ अप्रैल को लॉकडाउन ख़लास होना था, लेकिन
पिछले दो दिनों के मरीज़ों की बे शुमार इज़ाफ़े ने उस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है।
तारीख
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मुत्तासारिन
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१ मार्च तक
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3
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2 मार्च
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6
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5 मार्च
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29
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6 मार्च
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30
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7 मार्च
|
31
|
8 मार्च
|
34
|
9 मार्च
|
39
|
10 मार्च
|
45
|
12 मार्च
|
60
|
13 मार्च
|
76
|
14 मार्च
|
81
|
15 मार्च
|
98
|
16 मार्च
|
107
|
17 मार्च
|
114
|
18 मार्च
|
151
|
19 मार्च
|
176
|
20 मार्च
|
236
|
21 मार्च
|
315
|
22 मार्च
|
396
|
23 मार्च
|
480
|
24 मार्च
|
519
|
25 मार्च
|
606
|
26 मार्च
|
694
|
27 मार्च
|
918
|
28 मार्च
|
918
|
29 मार्च
|
1024
|
30 मार्च
|
1215
|
31 मार्च
|
1397
|
तारीख
|
मुत्तासारिन
|
1 अप्रैल
|
1834
|
2 अप्रैल
|
2069
|
3 अप्रैल
|
2547
|
4 अप्रैल
|
3072
|
5 अप्रैल
|
3577
|
6 अप्रैल
|
4281
|
7 अप्रैल
|
4789
|
8 अप्रैल
|
5274
|
9 अप्रैल
|
5865
|
10 अप्रैल
|
6761
|
11 अप्रैल
|
7447*
|
दूसरी
एक और वजह मोदी इन्तेज़ामियाँ को ख़ौफ़ ज़दा कर
सकती है वोह ये है जहाँ एक जानिब वायरस से मुत्तासरीन लोगों के इलाज के लिए जद्दोजहद
जारी है, वहीं जुनूबी कोरिया से खबर आई है की बरोज़ जुमे को कोरोना से ठीक हो चुके ९१
मरीजों में फिर से वायरस का इन्फेक्शन पाया गया है। इस बात को ले कर दुनिया भर के तबीबों
की फ़िक्र मज़ीद बढ़ा दी है।
आज की ताज़ा खबर.
करोना का वायरस ठीक हुए मरीज़ों
पर फिर से दो गुना ताक़त से हमला कर रहा है.
तहक़ीक़ाती अमले और डॉक्टर्स ये देख कर भौच्चके रह गए, जब उन्होंने कुछ ठीक हो
चुके अफ़रादों में वापिस से करोना के ख़ुसूसियात देखने को मिल रही हैं.
कुल मिला कर ये नतीजा अख़्ज़
किया जा सकता है की महज़ लोक डाउन ही इस वबा से निबटने का हल नहीं है. अगर लोक डाउन
से ही इस बीमारी को काबू में कर लिया होता तो २३ मार्च को जो मरीज़ों की तादात थी वो
२१ दिनों के लोक डाउन के बाद मज़ीद बढ़ी है. सबसे ज़्यदा मरीज़ ९ अप्रैल के बाद ७७८ और
१० अप्रैल को १२०० हो गए. दूसरी बात अगर तब्लीग़ी
ही इस मर्ज़ को फैलाने के लिए ज़िम्मेदार हैं तो ५ अप्रैल के बाद जिस अंदाज़ में तमाम
भारत में हुजूम इकठ्ठा हुआ था और आतिशबाज़ी की गई थी वो कैसे ज़िम्मदेआर नहीं हैं. इस मर्ज़ को फ़रोग़ देने में राजा सिंह की मशाल साजिश
भी काम कर गई. उस मशाल साजिश में राजा सिंह और बीजेपी के कई मुत्तासरीन शामिल हुए थे.
राजा सिंह के ऊपर आफ आई आर करो. फिर जिस हिसाब से ये वाइरस ठीक हुए मरीज़ों पर दू गुनी
ताक़त से हमला कर रहा है तो उसके लिए क्या क़दम हुकूमत ने उठाये हैं.
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