Thursday, 31 October 2019

माशी हालात से मज़ीद बे हद कमज़ोर हुआ भारत


मरकज़ी हुकूमत को माशी मोर्चे पर सितंबर में भी ज़र्ब  लगा है. आठ बुनियादी शोबों की पैदावार की शरा में ५.२ फीसदी का ज़वाल देखने को मिला है.  बुनियादी शोबों के आठ उद्योगों में से ७ की पैदावार में ज़वाल आया है. सबसे ज्यादा कोल माइनिंग में गिरावट दर्ज की गई है. 

बरोज़ जुमेरात को शाया अदद शुमार के मुताबिक सितंबर, २०१८ में बुनियादी उद्योगों की पैदावार ४.३ फीसद बढ़ा था. इस साल सितंबर २०१९ में यह अशरिया १२०.६ पर पहुंच गया है, जो कि सितंबर २०१८ के मुक़ाबले में ५.२ फीसदी गिरावट दर्ज की गई है.
पैदावार घटने से उत्पादन घटने से ग्रोथ पर असर

अदद शुमार के हिसाब से ज़ेरे जायज़ा महीने में कोयला, कच्चा तेल, कुदरती गैस, रिफाइनरी की मसनूआत, सीमेंट, स्टील और बिजली क्षेत्र की पैदावार घट गयी.  जबकि इस दौरान कच्ची धात के क्षेत्र की पैदावार ५.४ फीसदी बढ़ा. मौजूदा माशी साल में अप्रैल से सितंबर के वक़्फ़े में बुनियादी उद्योगों की बढ़ोतरी दर घटकर १.३ फीसदी रह गई. गुजिश्ता माशी साल की उसी मुद्दत में यह ५.५ फीसदी रही थी.

इससे क़ब्ल अगस्त महीने में भी ८ बुनयादी शोबों की ग्रोथ में 0.५ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. दरअसल, तमाम कोशिशों के बावजूद उद्योगों की बढ़ोतरी दर में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है.

आठ खसम ख़ास उद्योग में कोयला, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी आते हैं. इनकी भारत के कुल इंडस्ट्रियल आउटपुट में करीब ४० फीसद हिस्सेदारी होती है.

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