आज तारिख
१० अक्टूबर
२०१९ को
एक हादसा
भिवंडी शहर
में दर
पेश आया. जहाँ
डॉक्टर नेहा
२४ साला
अपनी ज़िन्दगी
से हाथ
धो बैठी. नेहा
जिनकी बरोज़
इतवार को
शादी होने
वाली थी
घर में
मेहमानों का
हुजूम लगा
हुआ था. नेहा
अपने भाई
के साथ
स्कूटी पे
कुछ ज़रूरी
साज सामान
लेने को
निकली थीं. उनको
क्या पता
था की
वो उनका
आखिरी सफर
होगा. हालांकि उनका
भाई बोहोत
ही इत्मीनान के साथ स्कूटी
चला रहा
था. उसकी
दो वजह
थी एक
टाइम की
कोई क़ैद
नहीं थी
दूसरी सड़क
पर बे
पनाह गड्डे. एक
बड़े से
खड्डे पे
नेहा के
भाई की
स्कूटी का
बेलेन्स बिगड़ा
और डॉक्टर
नेहा गिर
पड़ी और
पीछे से
आते हुए
ट्रक के
पहिये के
नीचे समां
गई. एक तरफ
नेहा की
शादी होने
वाली थी
वही घर
में मातम
पसर गया. जो
रिश्तेदार खुशी
में शरीक
होने आये
थे अब
ग़म के
हामी और
गवाह रहेगें. जो
दुल्हन लाल
जोड़े में
जाने वाली
थी वो
अब सफ़ेद
कफ़न में
जायेगी. लेकिन ऐसा
कहतें हैं
ना बीजपी
की ज़ाफ़रानी
इन्तेज़ामियाँ हुकमत
में अवाम
की हलाक़त
दहशतगर्दों के
हमले से
कम लेकिन
रोड हादसों
से ज़्यादा
होती है. और
ये सिर्फ
ज़ुबानी जमा
खर्च नहीं
है बल्कि
सुप्रीम अदलिया
ने इस
तरह की
हलाकत पे
सख्त तशवीश
ज़ाहिर की
है और
मर्कज़ को
ज़बरदस्त फटकार
लगाई है
के आपकी
दौरे हुकूमत
में अवाम
की हलाकत
दहशतगर्द हमलों
से ज़्यादा
सड़क हादसों
में हो
रही है.
ज़्यादातर हादसे सड़क पर
गड्डे होने
के सबब
होतें हैं
और २०
से 3० फीसद हादसों
में जहांबाक
होने वाले
अफ़राद की
कोई गलती
नहीं होती
है. पिछले २०१४
से पनवेल
पनवेल मेट्रोपोलिटियन बल्दिया, महाराष्ट्र और
मर्कज़ में
ज़ाफ़रानी हुकूमत
है. बम्बई मेट्रोपोलिटियन बल्दिया पे तो
कभी दीगर
सयासी जामात
का क़ब्ज़ा
रहा ही
नहीं. लेकिन सड़कों
का आलम वो हो
गया है
की पहले
और दुसरे
गेयर से
गाडी चल
ही नहीं
सकती.
२०१८ खार घर में एक कामकाजी खातून नीलिमा शर्मा अपनी ज़िन्दगी से हाथ धो बैठी थी. उस खातून की ५ साल की एक मासूम बच्ची थी जिसको ऑफिस से लौट के पालना घर से लेना था लेकिन बीच रास्ते में ही माँ हादसे का शिकार हो गई और अपनी जान गवा बैठी. वीडियो देखिये.
रकूने
बल्दिया, रकूने
असेंबली और
रकूने पार्लिअमान अब किसी हीले
बाज़ी का
सहारा भी
नहीं ले
सकते की
मर्कज़ हमको
फण्ड तक़सीम
नहीं कर
रहा, असेंबली या
बल्दिया हमको
फण्ड तक़सीम
नहीं कर
रही क्योंकि
हर जानिब
ज़ाफ़रानी हुकूमत
है फिर
क्या वजह
है की
सड़क पर
बड़े बड़े
गड्डे हैं. ये
हालात तक़रीबन
नई बंबई
और बंबई
शहर की
हर रोड
का है. सड़क
पर चलना
दुश्वार है. यहाँ
तक की
एक्सप्रेस हाईवे
पे टोल
देने के
बाद भी
सड़क का
वो आलम
है की
बयान के
बहार है.
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