ये ज़मीर फरोश एजाज़ खान मुसलमानों का मुहाफ़िज़ बन के उनको तहफ़्फ़ुज़ देने आया था. नाज़रीन देखिये कैसे ये आदमी अपने ज़मीर और मुस्लिम अवाम के इक़्तेदार का सौदा मुसलमानों की क़ातिल पार्टी एन.सी.पी. के रकूने असेम्ब्ली जीतेन्द्र अवाड़ से कर रहा है. इसकी मुस्लिम अवाम के लिए बोहोत ज़्यादा दिखावा करने की बात से ही मुझे इसके किरदार और तर्ज़े अमल पे शक होने लगा था, फिर भी मेने ख़ामोशी की हिकमत इख़्तियार की, हर बार ये सोचता रहा की में गलत हो सकता हूँ, और जब तक मुझको इसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिल जाता मेरे को किसी भी मुस्लिम के तर्ज़े अमल में शक करने का कोई हक़ नहीं होता है, और ऐसा करने से उम्मा के अंदर इन्तेशार फैलेगा और एक ग़लत पैग़ाम जाएगा. लेकिन अब ये तीसरा सबूत मिल चूका है की ये बिकाऊ शख़्स असल में बंबई के रेड लाइट एरिया में फिरने वाले दलालों की तरह है.
इसकी गिरफ्तारी भी मुंबई पुलिस की ते शुदा हिकमत थी और हुकूमत का रचा हुआ खेल था. इसकी गिरफ्तारी के बाद ज़र खरीद गुलामों ने बगावत की सूर बुलंद करना शुरू कर दिए थे. मुझको भी दबाओ डाला गया की इसकी हिमायत में मज़मून शाया किये जाएँ. मेने इसका केस दुखे हुए दिल से पब्लिक डोमेन में ले कर आया, हालांकि मुझको इसको मक़बूल नहीं करना था, लेकिन इसका एक मुसलमान होने की निस्बत से और इसकी मुसलमानों के लिए तड़प को देखते हुए मेने अपने एक मज़मून में इसके लिए भी आवाज़ उठाई थी. इस शख़्स को एक महीना पहले ज़मानत के ऊपर जेल से झूटने पर सबसे पहले इसने हिटलर मोदी और दहशतगर्द अमित के मुवाफ़ेक़त में बयान दिए और इसने कांग्रेस एन.सी.पी. को मुस्लिम पस्ती के लिए ज़िम्मेदार बताया. और अब ये शख़्स खुद एन.सी.पी. से पैसे की बात करता है जो पार्टी मुसलमानों की बड़े पैमाने पे खून रेज़ी के लिए ज़िम्मेदार है.
नाज़रीन याद रखिये मुस्लिम, दलित, क्रिस्टी, सिख और हर वो इंसान जो दस्तूर के तहफ़्फ़ुज़ की जंग लड़ रहा है जिसका अज़्म हिन्दुस्तान के अदल और इन्साफ पे है उसको सिर्फ और सिर्फ असदुद्दीन की जमात एम.आई.एम. को वोट करना चाहिए. नागपुर की मुस्लिम विकास की बात करने वाली कोई तंज़ीम हो या बॉम्बे की अवाम के विकास की बात करने वाली कोई भी तंज़ीम हो ये सब वोट कटुआ हैं और ये तंज़ीमे सिर्फ मुस्लिम और सेक्युलर वोट काटेगें जिसका सीधा सीधा फैयदा शिद्दत पसंद तंज़ीमों को होगा.
इस सहाफी का अगला निशाना मुस्लिम लिबास और मुस्लिम शक्ल सूरत इख़्तियार किये हुए उन काली भेड़ों को बे नक़ाब करना है जिसका एक नुमाइंदा शिद्दत पसंद, दहशतगर्द मुस्लिम नस्ल कुशी खून ओ ग़ारत करने वाली दहशतगर्द तंज़ीम आर.अस.अस. से जा मिला.
दूसरा सहाफियों से खिताब करते हुए २०१४ में बोलता है की हम असदुद्दीन और उनकी तंज़ीम को हैदराबाद से आगे नहीं बढ़ने देंगे. हम उनको हैदराबाद तक ही महदूत कर देंगे, फिर भी अगर उन्होंने ज़िद की तो उनको मेहमूद से टकराना होगा. शर्म. दूसरी बात अभी हाल ही में एक अवामी इज्तेमा को खिताब करते हुए बोलता है वो तो निज़ामे मुस्तफा क़ायम करना चाहते थे हमने क़ायम नहीं होने दिया, हमने तो निज़ामे मुस्तुफा और क़ुरान के एहकाम को ठुकरा दिया और हिन्दू कानून की पैरवी की और हिन्दुस्तान को इख़्तियार किया. शर्म आती है ऐसी मुनाफ़िक़ाना सोच पे.
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