Tuesday, 30 April 2019

राये शुमारी पे घटता एतेमाद.

जमुहरियत मुल्क के अवाम को ताक़त और कुव्वत फ़राहम करती है, सख्त तरीन मुख़ालेफ़त जमुहरियत की बेहतरीन किस्म होती है.  इत्तेहाद की शक्ल वाली हुकूमत सेहतमंद जमुहरियत की बेहतरीन मिसाल है.  क्योंकि वो हुकूमत मवाफ़िक़ बिल बनाने नहीं देती जो जमात के तस्सवुर को फ़रोग़ देतें हैं और वोट बैंक की सयासत के लिए साज़गार साबित हो सकते हैं. इत्तेहाद की शक्ल वाली हुकूमत का रुझान गुजरात २००२ के मुस्लिम अवाम पे हिन्दू दहशतगर्द हमलों के बाद से पूरी तरह से तब्दील हो गया है.   गुजरात हिन्द का पहला ऐसा सूबा बन गया जिसने ज़ाफ़रानी ज़हर की बीज बोये और दिया मुकम्मल अक्सरियत वाली हुकूमत का फलसफा.  ज़ाफ़रानी दहशतगर्द हुकूमत ने  एवान और दीगर हलकों में मुस्लिम और क्रिस्टी अवाम के साथ सख़्त तरीन अज़ीयत कुन हिकमते अमली इख़्तियार करना शुरू कर दी.  

बिलआख़िर,  गुजरात के बाद मुकम्मल अक्सरियत वाली हुकूमत का ज़ाफ़रानी मुश्तमिल अश्या का ज़हर सूबे रजिस्थान, हरयाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के रस्ते हिन्द तक पहुंच गया.  लेकिन इन सभ सूबों में जिसमे ख़ास गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जहाँ ये ज़ाफ़रानी वायरस को खूब फ़रोग़ मिली, इन सूबों में कमो बेश १५ सालों से ज़ाइद ये ज़ाफ़रानी वायरस खूब फला फूला, भारत में हालात वैसे साज़गार हरगिज़ ना हैं.  ५ सालों की ज़ाफ़रानी हुकूमत के काम काज ने अवाम को तल्ख़ तास्सुरात और तजुर्बे दिए हैं.  जिसकी वजह से उनका एतेमाद मोदी या हिटलर किस्म की जमुहरियत से खो गया है.  जिसका बयान पहले ही ये सहाफी अपनी कई मज़मून और तब्सिरों में कर चूका है.
ग़ैर मुत्मइन अवाम की अक्सरियत मौजूदा मोदी या हिटलर किस्म की जमुहरियत के खिलाफ बढ़ती जा रही है, जिनका राय शुमारी के निज़ाम और तरीक़ेक़ार हिकमते अमली से यक़ीन उठता जा रहा है.   यहाँ तक की ऐसे अवाम ने राय शुमारी में हिस्सा भी नहीं लिया और अपने आपको घर की चार दीवारी में क़ैद रखने में ही भलाई समझीबरोज़ पीर दर्जन के क़रीब मुमालिकों के दरमियान एक सोहलनामा किया गया और तफ्तीश में पाया की भारतीय अवाम मौजूदा मोदी किस्म की जमुहरियत से मुत्मइन नहीं है. जिनकी तादात  २०१७ से २२ अशरिया से ११% बढ़ कर २०१८ में ३३% तक जा पहुंची है.   ये जानकारी पेव रिसर्च सेंटर ने अपने मुताले में पाई है, जिसमे कम अज़ कम २७ मुमालिकों का सर्वे किया गया थामज़े की बात ये रही जहाँ भारत में अवाम का एतेमाद जमुहरियत से ख़त्म हो रहा है, वहीँ जमुहरियत पे यक़ीन रखने वालों की तादात ५४% है और यूनिटेड स्टेट में ४०% बढ़ी है और यूनाइटेड किंगडम में ४२% बढ़ी है
मोदी क़िस्म की जमुहरियत ने मुल्क की क़ियादत जैसे ही अपने हाथों में ली ज़ाफ़रानी ज़हर अवाम के दिलों दिमाग़ में पेवस्त किया जाने लगा. पडोसी मुल्क जम्मू कश्मीर जो की भारतीय इन्तेज़ामियाँ के ज़ेरे क़ब्ज़े में है १९४७ के आज़ादी के मरहले के बाद ये देश सख़्त तरीन अज़ीयत से गुज़रा हैये पहली बार हुआ होगा जब अवाम का एतेमाद भारत की जमुहरियत से फौत हो गया होगा और उसने मोदी किस्म की जम्हूरियत को ठुकरा दिया जिसका सबसे बड़ा सबूत है वोट फीसद जो %, %, ११%.
यहाँ तक की जम्मू कश्मीर के वज़ीरे आज़म ने अवाम में हुकूमते हिन्द की जमुहरियत पे से यक़ीन ख़त्म हो कर पाकिस्तान पे एतेमाद को लेकर सख़्त फिक्रमंदी और इज़हारे तशवीश किया है.  जिसकी वजह सिर्फ मोदी या हिटलर क़िस्म की जमुहरियत है.
जमुहरियत पे घटते हुए एतेमाद की एक वजह है  दहशतगर्दों की बे इन्तहा फ़ोक़ियत और उनकी हमदर्दीजिसकी वजह से एक शहीद हेमंत करकरे को गद्दार तस्लीम किया जाता है.  फौज के जवान यादव को कपटी धूर्त सस्लीम किया जाता है, भारतीय फ़ौज को बागी तस्लीम किया जाता हैमहात्मा गाँधी को वतन के टुकड़े करने वाला गद्दार और बे वफ़ा तस्लीम किया जाता हैअवाम को ग़ुलाम तस्लीम किया जाता हैबस एक मोदी फौज, मोदी जमुहरियत, मोदी हुकूमत ही वतन परस्त है और वो ही सिर्फ वतन की फलाह और बहबूती के काम को अंजाम दे रही है बाकी तो सब बेकार है.
फिर किसी ने अगर सवाल जवाब का सिलसिला शुरू किया तो वो हो जाता है वतन का सबसे बड़ा दुश्मन और इन दहशतगर्दों का पहले नंबर का दुश्मनये जमुहरियत की कौन सी किस्म है, अवाम पूछना चाहता है.    इस तरह के हमले फौज, पुलिस और अदलिया पे बीजेपी के रकून और अला ओहदेदारों की जानिब से आम बात है.   ये है उत्तर प्रदेश में बीजेपी के रकूने  पार्लियमानीअब ये कानून साज़ जब पुलिस की अज़मत नहीं पहचानते और एक पुलिस अफसर को वर्दी के अंदर बे जरब हमलावर हो रहे हैं तो वो शहीद की अज़मत को क्या ख़ाक पहचानेगे.
ये मोदी किस्म की जमुहरियत की अज़ीम कामयाबी है जिसमे अवाम का भरोसा इंतेखाबात और वोटिंग के तरीके कार हिकमते अमली से उठ गया और अपने नुमाइंदे के इंतेखाब के लिए बहार तक नहीं निकलेअवाम का इस तरह का चलन सेहतमंद जमुहरियत के लिए ज़हर है और वतन इन्तेशार की जानिब गामज़न है.

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Proud to boycott election.

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