Tuesday, 23 April 2019

आलमी ज़ाफ़रानी दहशतगर्द

अज़ीज़ नाज़रीन,

पडोसी मुल्क श्रीलंका में ज़बरदस्त दहशतगर्द हमला हुआ जिसके चलते कुछ ३०० से ज़ाइद अफ़राद जांबाहक हो गए.  हालांकि इस हमले पे ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को तफ्तीश निकालने में ताख़ीर हुई क्योंकि टीम हिन्द में इंतेखाबात के मरहले और चलते हालाते हाजरा में मज़ीद जानकारी लेने में मश्ग़ूल थी. 

बरहाल मौजोदा ज़राये से जो जानकारी मसूल हुई है उससे ये वाज़े नज़र आ रहा है इस हमले में भारत की लिब्रशन तमिल टाइगर इलम (अल.टी.टी.ई.) दहशतगर्द तंज़ीम के मुलव्विस होने के शदीद इमकान हैं.   तवारीख शाहिद है की जब से मोदी इंतेज़ामिया ने हुकूमते हिन्द की तख़्त पोशी संभाली है भारत के ऊपर आफ़ात बलियात के बादल मंडराते रहते हैं.  जहाँ तक मोदी का सवाल है वो ना तो एक अच्छे हुकुमरान साबित हुए और ना ही किस्मतवाले बरक्स वो गुजरात के लिए बदबख़्त, बदकिस्मत वज़ीरे अला और भारत के लिए वज़ीरे आज़म साबित हुए.  जब २००१ में मोदी को गुजरात का वज़ीरे अला मुंतखिब किया गया था फ़ौरन मोदी की पहली २६ जनवरी को गुजरात ज़बरदस्त  ज़लज़ले की नज़र हो गया जिसमे कमो बैश ५०,००० अफ़राद मारे गए जिसमे मासूम तालिबे इल्मों से लेकर तो संघी दहशतगर्दों तक की शमूलियत है.   फिर २००२ का वो हादसा जिसने गुजरात के अंदर हिन्दू दहशतगर्दी का बीज बोया और वो भगवा वायरस जो आज पूरे भारत में फ़ैल चूका है, जिसकी वजह से पूरा बेन अक़वामी बरादरी तशवीश और सख्त फिक्रमंदी में है.

फिर ये बात भी तवारीख के पन्नो में दर्ज हो चुकी है की मोदी जिस किसी भी मुल्क में पहली बार गया अपने साथ तबाही और बर्बादी के अक्स ले कर गया.  अमेरिका की पहले दौरे के बाद वहां जंगलात में ज़बरदस्त आग लग गई फिर आई तूफ़ान जिसकी ज़द में आधा अमेरिका डूब गया.  लोगो ने चर्च और शेल्टर होम में कई दिन गुज़ारे.  उसी हिसाब से नेपाल के अपने पहले दौरे के बाद आया ज़लज़ला.  कश्मीर में अपने पहले दौरे के बाद आई बाढ़. 

इस कड़ी में जुड़ जाता है केरला का भी नाम पिछले साल जून २०१८ में अमित शाह ने केरला का माहौल ख़राब करने की नियत से रोड शो किया था और अवाम के दिलों दिमाग में हिंदुत्व का आलूद भर के २०१९ के इंतेखाबात में कुछ सीटें निकालने के मक़सद से भड़काने की कोशिश की थी. नतीजा फ़ौरन आया जुलाई अगस्त २०१८ में ज़बर्दस्त तूफ़ान और बारिश के चलते कुछ २००० से ज़ाइद अफ़राद मारे गए और करोड़ों रूपये का नुकसान हुआ वो अलग. 

फिर मोदी के हुकूमते हिन्द के वज़ीरे आज़म की कुर्सी पे फ़ाइज़ होने के बाद भारत के जो हालात  हैं वो किसी से पोशीदा नहीं हैं.  जिस तरह से कुतरती आफ़ात और सड़क हादसात से भारत को दो चार होना पड़ा है वो सब को मालूम है. यहाँ तक की सुप्रीम अदलिया ने सड़क हादसों में मरने वालों पे तशवीश ज़ाहिर की है.   और मरकज़ी हुकूमत को सख्त लानत.

अभी हाल ही में पुलवामा हादसे के बाद मार्च २०१९ में बीजेपी ने तमिल नाडु में सियासी इत्तेहाद किया और कुछ ५ सीटों में उसको लड़ने का शर्फ हासिल हुआ.  मार्च में इत्तेहाद किया और अप्रैल में तमिल टाइगर्स अटैक.  दूसरी बात ये बात किसी से भी पोशीदा नहीं है की श्रीलंका सख्त खाना जंगी के तवील मरहले से गुज़र चूका है और जाफना में सख्त तरीन खाना जंगी की अज़ीयत श्रीलंका अवाम पहले ही बर्दाश्त कर चूका है.  जाफना की जंग को भारत का पूरा ताऊन था और भारत तमिल अवाम के लिए अलेहदा मुल्क़ की सिफारिश करता था.  उस हिसाब से हाल ही का बीजेपी का तमिलनाडु की एक सयासी जामत से इत्तिहाद इस बात की पोर ज़ोर वकालत करता है की ये हमला भारत की दहशतगर्द तंज़ीम का किया हुआ है.  इस हमले में वक़्त और दिन का भी भरपूर ख्याल रखा गया है. 

ये हमला उस वक़त किया गया जब भारत में इंतेखाबात अपने ऊरूज पे था, और थोड़े ही वक़्फ़े पहले न्यू ज़ीलैण्ड में मुस्लिम अवाम के ऊपर दहशतगर्द हमला हो चूका था.  तो इस हमले को इस इंदाज़ पे पेश किया गया की सबकी निगाहें मुस्लिम अवाम के ऊपर जा कर टिक जाएँ और सभी न्यू ज़ीलैण्ड मुस्लिम अवाम के ऊपर किये हुए हमले का बदला तस्सव्वुर करें.  जबकि ऐसा नहीं है.  ईस्टर के रोज़ हमला करने के पीछे भी मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा हलाकत कर के तमिल टिगर्स अपनी मौजूदगी का एहसास करवाना चाहते थे.


नोट:  पुलवामा हादसे के बाद ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को बम्बई की कुछ मस्तुरात के हादसे को मज़ीद पेचीदा बना के पेश करने के सबूत मिले थे.  एडिटर इन चीफ सहाफी जुबेर को बम्बई शहर की २ आला तालीमी अफ्ता मस्तुरात के चेहरे और नाम तक बता दिए गए थे.  लेकिन उन्होंने मसले की संजीदगी को भांपते हुए मस्लेह्तन अपने मज़मून पुलवामा पे पहली नज़र. में अदद शुमारी नहीं की और कुछ मस्तुरात लिखा है.




International Saffron Terrorists

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