नाज़रीन पकिस्तान के वज़ीरे आज़म इमरान खान ने आखिर ओवर में ज़बरदस्त दानिशमंदी का मुज़ाहेरा करते हुए आखिर लम्हों में आसमानी छक्का मार के भारत और पाकिस्तान के दरमियान जंग के इमकानात को तक़रीबन ख़त्म कर दिया. पाकिस्तानी वज़ीरे आज़म ने अमन की राह दिखाई और खित्ते को बड़े पैमाने पे तबाही से बचा लिया. इस हिकमते अमली से उनका सियासी और इंसानियत पे यकीन रखने का तस्सव्वुर काफी बढ़ गया उनकी भारत पे ये दूसरी सिफाराती जीत है.
उमूमन
भारतीय अवाम जंग, तबाही, ख़ूंरेज़ी, आगज़नी जैसे फलसफे और इक़दाम से बोहोत मुत्तासिर हैं, ख़ास कर
जब उनका हाकिम खुद एक तशद्दुत पसंद ज़ेहनियत रखता है. लेकिन ये सहाफी सभी भारतीय अवाम, उनके मवाफ़िक़ मीडिया
के लंगूरों से एक बात ज़रूर पूछना चाहेगा उनको इस जंग करने की उछल कूद से किया हासिल
हुआ. बरक्स उसके उन्होंने अपने वतन के दो ऑफ-१६
फ़िज़ाई तय्यारों और एक पायलोट को गवा दिए और दूसरा पाकिस्तान की कैद में है. यहाँ ये बात फिर साबित हो गई के उनके आक़ा मोदी एक नाकायाब सियासतदां हैं और उनका
५६ इंची सीना सिर्फ क़ौमी नाटक गिरोह (पार्लियामेंट) के लिए महदूत है. ख़ास जब पकिस्तान ने उतनी ही शिद्दत और कुव्वत से
रात की तारीकी में डाकुओं की तरह किये हुए भारतीय हमले का जवाब एक असली फौजी अंदाज़
में दिया. भारतीय अवाम, फौजी सरबराहों और
लंगूरों को गुमान हो चला था की भारत रकबे के हिसाब से एक क़वी मुल्क है और वो पकिस्तान
जैसे अदना मुल्क को कही भी दबोच डालेगा. लेकिन
उनकी ये ग़लतफहमी जल्द ही सुधार में तब्दील हो गई जब उनको पता चला की हाथी जैसा डील
डौल किसी काम का नहीं होता अगर एक छोटी सी चींटी उसके नाक में दाखिल हो जाए.
जिस तरह ये सहाफी पाकिस्तान को अदलिया, सियासत, अमन, इंतेज़ामिया के हर शोबे में भारत से अफ़ज़ल तस्सव्वुर करता है. जंग और सिफारकारों के मैदान में भी ये बात साबित हो गई के पकिस्तान की फ़ौजी कूव्वत और सियासी हिकमते अमली भारत से ज़्यादा बेहतर है. जिसने ना सिर्फ भारत के फ़िज़ाई हमले का माकूल जवाब दिया बल्कि अपना पीछा करते हुए भारतीय तय्यारों को गुमराह कर के अपनी फ़िज़ाओं में कैद कर के एक को हलाक़ कर दिया और दुसरे को बंदी बना लिया.
बिल आखिर जब भारतीय अवाम और हुक्काम हमले पे ख़ुशी और जंग में भारत की मुमकिना जीत की तवक़्क़ो कर रहे थे, तब पकिस्तान के कप्तान आये और आसमानी छक्का लगा के गंदगी (बोल) को पाकिस्तानी हुदूत और फ़िज़ा से बॉउंड्री पार भारत में भेज कर इंसानियत और जुनूबी एशिया के बार्रे सगीर को जंग की अज़ियत से मेहफ़ूज़ कर लिया.
ये दूसरा मौक़ा है जब वज़ीरे आज़म इमरान खान ने अपने हुकूमते हिन्द के मनसब को सियासत की बिसात पे बोना बना दिया, और आलमी बरादरी में सिफारती जीत दर्ज की. आलमी बरादरी पहले ही करतारपुर कॉरिडोर की इफ्तेताह की पहल पर इमरान खान की पीठ थपथपा चुकी है, और अब जब खित्ते का अमन खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था और भारत और पकिस्तान के बीच सो फी सद जंग जैसे हालात बन गए थे. जब तमाम मुमालिक दोनों मुल्कों के दरमियान जंग की आमद तबाही, ख़ूंरेज़ी से खासे परेशान थे, तब इमरान खान की जंग को टालने की हिकमते अमली और दानिशमंदी से उनका सियासी तस्सव्वुर पहले की मानिंद और बढ़ गया, और उन्होंने अपने मनसब को पूरी तरह से पोशीदा कर दिया. इस कारगरदेगी के लिए अब आलमी बरादरी को उन्हें अमन के पैरोकार के खिताब से नवाज़ने चाहिए.
भारतीय अवाम का तस्सव्वुर मोदी के लिए भले है सख्त तरीन, मकबूल, प्यारे वज़ीरे अज़ाम के तोर पे होगा लेकिन बेन अक़वामी अमन का तमगा नेल्सन मॉडेला को दिया गया था ना की ज़ालिम फौजी हुक्मरान हिटलर को. इसी तरह से जब आलमी बरादरी खित्ते के अमन को लेकर सख्त तशवीश में थी तब इमरान खान ने अमन और भाईचारे का पैगाम दिया. और इसी अज़ीम काम की वजह से पकिस्तान को हुकूमते अमेरिका ने अफगानिस्तान में अमन कायम करने की हिकमते अमली में एक सालिस की हैसियत से मदु किया है.
भारतीय वज़ीरे आज़म की इस हार और इमरान खान के इस बुलंद विकार के बाद में समझता हूँ भारतीय जंग हामी उनके फौजी सरबराह, लंगूर और सियासतदानों को किसी किस्म का शक और शुबा नहीं रहना चाहिए की पकिस्तान हर शोबे में भारत से बेहतर है. भारत ने जिस स्ट्राइक के लिए १३ दिन का मश्क किया उसी को पकिस्तान ने सिर्फ एक दिन में अंजाम दिया.
बढे बूढ़े उल्लू की निस्बत से एक कहावत कहतें हैं. जो
कहता
फिरता है.
"पीदम राजा बूद"
मतलब मेरा बाप राजा था.
अरे होगा तेरा बाप राजा तू क्या है तू तो उल्लू है
जो रात की तारीकी में अपने शिकार की तलाश में रहता है और उसके ऊपर हमला करता है. लेकिन दिन के उजाले में वीरान बयाबान टूटे फूटे खण्डरों की शान बना रहता है.
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