नाज़रीन सियासत को एक गलीज़ रास्ते पे ले जाने का काम अकीदतमंदों, अंधे अकीदतमंदों, शिद्दत पसंद हिन्दू और दहशतगर्दों ने किया है. इस सहाफी को ये बात कहने में ज़रा भी गुरेज़ और हिचक नहीं की वाजपाई की बीजेपी सरकार हर वक़्त की कांग्रेस से १०० गुना बेहतर थी, चाहे वो अकलियतों से ताल्लुक़ रखने वाला मुद्दा हो, वतन परस्ती, बेनअक़वामी ताल्लुक़ात, कश्मीर मुद्दा या और कोई मुद्दा हो. लेकिन आज की मोदी सरकार पिछली हर सरकार से १०० गुना बदतर है.
सर्जिकल स्ट्राइक पे जब मुख़ालिफ़ों ने सवालियां निशान लगाना शुरू किया तो मोदी जी कहतें है ऐसे मसलो को सियासी नज़र देना ठीक नहीं है. लेकिन उस मसले को सियासी अमली जामा तो आपके खुद के बड़े ओहदेदार योगी और अनिल विज़ जैसे सियासदानों ने पहनाया तो मुख़ालिफ़ों को तो बैठे बिठाये मुद्दा हाथ लग गया. मोदी जी की गलतबयानी पे ये सहाफी पहले ही उनको ट्वीट कर चूका है.
@NavbharatTimes @narendramodi Mr.
PM absolutely right, but after the attack over PAK within two days see the
political statements of top brass of BJP Yogi and Viz. Who is doing politics
your and only your politicians.
फिर जिस अंदाज़ में सर्जिकल स्ट्राइक पे लंगूरों
के सहारे ३०० और ४०० अफ़राद की हलाकत की अदद शुमारी की जा रही थी उसको भी कल बीजेपी
के वज़ीर जनाब अहलूवालिया ने मुकम्मल बंद कर दिया, जब उन्होंने मीडिया से ख़िताब करते
हुए कहा की सर्जिकल स्ट्राइक में किसी की हलाकत नहीं हुई है और हमारा मक़सद किसी भी
इंसानी जान को नुक्सान पहुँचाना नहीं था बल्कि सरहद पार एक पैगाम देना था की हम सख़्त
एक़दाम उठा सकते हैं.
ये बात उमूमन देखने में आई है की एक मुद्दा ख़तम
होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है. पहले पुलवामा
हुआ उसपे मोदी सरकार सख़्त नाहीली और गफलत का शिकार होने जैसे इलज़ाम में घिरी तो सर्जिकल
स्ट्राइक कर दिया जब उसपे जांबाहँक होने वालो की अदद शुमारी पे घिरी तो अज़हर मसूद के
फ़ौत होने की खबर आम कर दी गई.
ये मोदी सरकार के साथ महज़ इत्तिफ़ाक़ है या दानिस्ता
ऐसे हालात मीडिया के लंगूरों के सहारे पैदा किये जाते हैं जिससे अवाम सरकार से कुछ
भी सवाल जवाब तलब ना करे और इस गहमा गहमी में हम अपना डाका डालने का काम पूरा कर
जाएँ. जिस तरह से डाकुओं का गिरोह डाका डालता
है तो एक नहीं कई डाकू होतें है और सब को अपना अपना काम मुताईना होता है. एक सिक्योरिटी इदारों को बातों में उलझा के रखेगा,
दूसरा अवाम को बलगलायेगा, तीसरा चोरी करेगा चौथा उसके ऊपर अपने खबरनामे के ज़रिए कफ़न
डालने की कोशिश करेगा.
क्योंकि पुलवामा से ले कर आज तक कई बड़े बड़े काम
हो गए और अवाम को शायद खबर ही नहीं .
१. मोदी हुकूमत
से अब कोई भी उन मुद्दों में सवाल तलब नहीं कर रहा है जिसकी वजह से उसकी साख ख़राब हो
रही थी.
२. जहाँ तक इस सहाफी की जानकारी है उससे पता चलता है, जंग के
नाम पे मोदी हुकूमत ने आर. बी.आई से कई करोड़ रूपये निकाल लिए और अब वो इंतेखाबात में
इस्तेमाल होंगे. क्योंकि वज़ीरे आज़म को पूरा
इख्तियार है जब मुल्क में जंग जैसे हालात हों या मुल्क के ऊपर कोई बोहोत बड़ी मुसीबत
आ जाए या फिर सख़्त हगामी हालात में वज़ीरे अज़ाम बगैर पार्लियामेंट का इजलास बुलाये या
किसी को भी भरोसे में लिए बगैर आर.बी.आई. से मदद मांग सकतें हैं.
३. इस गहमा गहमी में बुलंद शहर दहशतगर्दाना हमलो का
हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीम बजरंग दाल का सरगना के ऊपर मामूली कहा सुनी और मार पीट की दफाएँ
लगाईं हैं. यहाँ तक की इंस्पेक्टर सुबोध कुमार
के क़त्ल की आफ.आई.आर. में भी उस बजरंगी दहशतगर्द का नाम नहीं है.
अब मोदी इंतेज़ामिया, बीजेपी के रकून और दिगर अला ओहदेदार मुख़ालिफ़ीन पे नुक़्ता चीनी कर रहे हैं की वो मसले पे सियासत कर रहा है. सियासत तो आप ने शुरू की है मुख़ालेफ़ीन तो सिर्फ जवाब तलब कर रहे हैं जो उनका हक़ है.
اس صحافی کی
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English addition of this Journalist
हिंदी रसम अल खत उर्दू अलफ़ाज़
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