Sunday, 17 March 2019

जनाज़ों पे जश्न


अज़ीज़ नाज़रीन,
१५.३.२०१९ बरोज़ जुमे को १२ बजे के दरमियान क्राइस्ट चर्च न्यूज़ीलैण्ड की दो मस्जिदों में उस अमन पंसद मुल्क की तारीख़ का सबसे तबाहकुन दहशतगर्द हमला हो गया.  जिसमे कमो बेश ४९ मुसलमान नमाज़ी शहीद हो गए.  इस दहशतगर्द हमले में ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की तेहक़ीक़ाती टीम को दौराने तफ्तीश हुकूमते हिन्द और हिन्दू दहशतगर्दों के बराहे रास्त या बिला वास्ता हाथ होने के मज़ीद इमकान नज़र आतें हैं.

क्योंकि जहाँ इस दहशतगर्द हमले से आलमी बरादरी तशवीश में और मुस्लिम मुमालिक ग़म में हैं वहीँ हमले के फ़ौरन बाद भारत में मुक़ीम हिन्दू शिद्दत पंसदों और संघी दहशतगर्दों के जो तब्सिराती रुझानात मन्ज़रे आम पे आये उससे इस बात का इमकान मुस्तहकम होता जा रहा है की कहीं ना कहीं इस हमले में भारत में तरबियती हिन्दू दहशतगर्दों का हाथ है.

 दहशतगर्द हमले का हक़ीक़ी वीडियो

जिस अंदाज़ में हमले के बाद तमाम हिन्दू अवाम ने जश्न भरे मैसेज मीडिया में वायरल किये, उससे ज़ाहिर होता है इस हमले में हिन्दू दहशतगर्दों का हाथ है:-

.      मुबारक
.      बस ४० हमें तो ४०० की उम्मीद थी
.      ख़त्म कर दो धरती से मुसलमानों और इस्लाम को.
.      इस तरह से हर रोज़ मस्जिदों में हमले होना चाहिए.
.     अब मुसलमानों को समझ में जाना चाहिए कोई और भी तुम्हारे खिलाफ हथियार उठा  सकता है.
.     हमें हमलावर पे नाज़ है.

दूसरी बात बेन अक़वामी और क़ौमी मीडिया में जैसे ही हमले की बात जंगल में आग के जैसे फैली कुछ बजे के दरमियान बाक़ायदा हर थोड़े वक़्फ़े के बाद आतिशबाज़ी की जाने लगी. 

कुछ बजे के दरमियान पाकिस्तान समेत तमाम रियासतों के सरबराहों के इस हमले पे ताज़ियाती पैग़ामात की आंधी गई.  लेकिन हुकूमते हिन्द के वज़ीरे अज़ाम का कोई भी पैग़ाम नहीं आया, जबकि वो ट्वीटर और सोशल मीडिया से खासे मुत्तासिर और जुड़े हुए होतें हैं.  और जब उनका तशवीशी पैग़ाम आया तब तक शक हिन्दू शिद्दत पसंदो पे गहरा हो चूका था.  इस सहाफी ने १५.३.२०१९ को शब् से लेकर बजे के दरमियान ट्वीट किये एक नव भारत टाइम्स एक आज तक और एक हिंदुस्तान टाइम्स इंग्लिश जिसमे उसने हमले का शक हिन्दू दहशतगर्दों पे किया है उसके फ़ौरन बाद भारतीय वज़ीरे अज़ामा मोदी ने कुछ शाम .३० मिनिट पे अपना पहला ताज़ियाती ट्वीट किया और हमले पे तशवीश ज़ाहिर की थी. 

लेकिन इस ट्वीट में भी वज़ीरे आज़म मोदी ने सिर्फ तशवीश ज़ाहिर की थी.  मोदी हुकूमत ने  ना ही इस बात का यक़ीन न्यू ज़ीलैंड हुकूमत को दिलाया था की भारत में दहशतगर्दों पे किसी भी तरह के एक्शन पे और उसके खात्मे के लिए वो अलामी बरादरी, हुकूमते न्यू ज़ीलैंड के साथ है और ना ही इस बात की यक़ीन ध्यानी की थी दहशतगर्दों और इस हमले से ताल्लुक रखने वाली कोई भी मालूमात हुकूमते न्यू ज़ीलैंड  को मोहय्या की जायेगी. और ना ही इस बात का अज़्म था की भारत दौराने तफ्तीश किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है और वो तफ्तीश में हिमायत और शिरकत करेगा.  लेकिन जब बात का बतंगड़ बन गया तो वज़ीरे खारजा की जानिब से ऐसा एक ट्वीट किया गया.

ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को दौराने तफ्तीश इस बात की भी जानकारी मिली है की दहशतगर्द ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैंड में मुक़ीम हिन्दू अवाम से काफी नज़दीक था और इजराइल, मोदी को अपना रोल मोडल मानता था.  दहशतगर्द को अख़लाक़ी और इक़्तेसादी इमदाद हिन्दू अवाम ने की है.  इस हमले की मश्क कमो बेश . साल से जारी है और इस हमले को बाक़ायदा पहले से मंसूबा बंद तरीक़े से अंजाम दिया गया है.

भारत के ना सिर्फ हिन्दू शिद्दत पसंद ज़ेहनियत और दहशतगर्द बल्कि आम हिन्दू अवाम के दिलों दिमाग में मुस्लिम, इस्लाम के लिए किस क़दर आलूद और ज़हर भरा है वो इस बात से साबित हो जाता है, जहाँ इस हमले पे न्यू ज़ीलैण्ड समेत तमाम आलमी मुमालिक मुस्लिम अवाम के साथ शाना बा शाना खड़े हैं और उनकी हौसला अफ़ज़ाई कर रहे हैं,  मदद के लिए आगे हैं वही भारत के हिन्दू शिद्दत पसंद इसको मज़हब के चश्मे से देख रहे हैं और तनक़ीद कर रहे हैं की संभल जाओ मुसलमानों नहीं तो तुम्हारे लिए आगे की राह कठिन है.  जैसा बोओगे वैसा काटोगे.  वग़ैरा वग़ैरा. 
                                         इस तरह से हिन्दू अवाम के दिलों दिमाग में आलूद भरा जाता है

पाकिस्तान के लिए उनके दिलों दिमाग में भरा हुआ मवाद और आलूद समझ में आ सकता है लेकिन मुस्लिम अवाम और इस्लाम से इस हद दर्जे की नफरत ही हिन्दू दहशतगर्दी की एक जड़ है.  और उसको फ़रोग़ देती है ऐसी तंज़ीमे जो हुकूमते हिन्द के आला इदारों में काम करती हैं, ये वही लोग है जो इस्लाम और मुसलमानो को बराहे रास गाली गलोच करते हैं और मोदी हुकूमत खामोश है.  कभी संबित जैसा आवारा लुच्चा नेशनल टीवी पे मुस्लिम अवाम को गाली देता है कभी दहशतगर्दों की मरकज़ी वज़ीर की जानिब से गुलपोशी की जाती है.  कभी राम ज़ादे...... जैसे बयान मन्ज़रे आम होतें हैं लेकिन मोदी हुकूमत ख़ामोशी इख्तयार करने में ही हिकमत समझती है.  वही दूसरी तरफ पकिस्तान की ना सिर्फ मौजूदा हुकुमत बल्कि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आये है की अक़लियतों ख़ास हिन्दू अवाम की दिल अज़ारी करने वाले को ख़मयाज़ा भुगतना पड़ा है.   
बरहाल पुलिस अपना काम कर रही है और जल्द ही आलमी बरादरी को इस हमले में मुलव्विस उस मुल्क का नाम ज़ाहिर हो जाएगा फिर उसको ज़िम्मेदार मान के उसके ऊपर एक्शन लिया जाएगा.


اس صحافی کی اردو جمع




English addition of this Journalist




हिंदी रसम अल खत उर्दू अलफ़ाज़

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