Wednesday, 20 March 2019

में सहाफी; नहीं एक चौकीदार

अज़ीज़ नाज़रीन मौजूदा हुकूमते हिन्द के बादशाह सलामत के ऊपर ये सहाफी कई तन्ज़िया मज़मून लिख चूका है.  जिसमे ख़ास एक था राजा……. भाग - १ और एक था राजा……. भाग - २ शामिल हैं. 

इसको वक़्त का तकाज़ा कहेगे या मोदी जी और बीजेपी की मजबूरी के वज़ीरे आज़म जैसे अज़ीम शान ओहदे को चौकीदार से शबी दी जा रही है. इतना ज़लील आज़ादी के बाद भारत कभी भी नहीं हुआवज़ीरे आज़म चौकीदार, अदलिया असमत फरोश, सहाफत ज़ेहन फरोश, इंतेज़ामिया नाकारा निक्कम्मी और अवाम ग़ुलामअपनी ग़ुलामी का सबूत ना सिर्फ शरदकालूँ और नाबीना  शरदकालूँ देतें हैं बल्कि बा शऊर और होश मंद भी अपनी गुलामी का बा खूबी सबूत देतें हैंइस मौज़ू पे ये सहाफी क़ौमी इजलास जश्ने आज़ादी और योमे जमुहरिया की निस्बत से कई मज़मून कलमबन्द कर चूका हैजिसमे ख़ास है यौमे जमुहरिया और अवाम (हम).

इन्तेख़ाबात से कुछ अर्से क़ब्ल मोदी जी ने अपने नाम को तब्दील कर के प्रधान मंत्री की जगह चौकीदार नरेंद्र मोदी कर दियाफिर क्या था अकीदतमंदो और नाबीना अकीदतमंदो को ऐसा करना लाज़मी हो गयाजब मुल्क का वज़ीरे अज़ाम सबसे आला ओहदेदार एक चौकीदार बन रहा है तो तबीब (जर्राहा-डॉक्टर), इंजीनियर, बीटेक, ऍम टेक जैसे अला पेशेवर डिग्री किये हुए हज़रात भी अपने नाम के आगेमें चौकीदार डॉ.......” “में चौकीदार सिविल इंजीनियर........” वग़ैरा वग़ैरा लगा के फख्र महसूस करने लगे.    अब इस भेड़ चाल और अंध भक्ति को क्या कहेगें की उनको अपने ओहदे अपनी डिग्री की परवाह तो नहीं बल्कि वो मोदी भक्ति में इतने तल्लीन हो गए की उनको वतन की इज़्ज़त और अपनी डिग्री के रूतबे अपने ओहदे का भी एहतेराम ना रहा.   ऐसा कर के ना सिर्फ मोदी जी बल्कि तालीमी आफ़ता आला ओहदेदार वो अवाम जो "में भी चौकीदार" मोहिम का हिस्सा बन रहे हैं बेन अक़वामी मुमालिकों को इस बात का सबूत फ़राहम कर रहे हैं, की भारत में कितनी भी आला तालीम हासिल कर लो, कितने ही आला ओहदे पे फ़ाइज़ हो जाओ लेकिन ज़ेहनियत अदना ही रहेगी.  

इस रूहे ज़मीन के तमाम मुमालिकों में वतन अज़ीज़ एक ऐसा वाहिद मुल्क होगा जहाँ बेवकूफों  की कमी नहीं हैएक ढूंढ़ने चलो और हज़ारों की तादात में मिल जातें हैं.  ऐसा नहीं है की ये बेवकूफ अनपढ़ और जाहिल होते हैं बल्कि इनमे अवाम का वो हिस्सा भी शामिल है जो आला तालीमी आफ़ता, सियासत दान और मज़हबी रहनुमाओं की जमात से ताल्लुक रखता हैअब इन लोगो में या तो शऊर की कमी होती है या इनको डराया धमकाया जाता है या कभी इनको वतन की मोहब्बत के नाम पे इनका जज़्बाती इसतेसाल किया जाता है.

फरवरी महीने में पुलवामा हादसे के बाद अपनी तमाम कूव्वत और ताक़त बराये ताक़ रख कर लगे सब एक भेड़ चाल चलने की पाकिस्तान पे हमला कर दो.  जिसमे शामिल हैं आला सियासदान, मज़हबी रहनुमा और बिला शुबा गुलाम ज़ेहनियत भारतीय अवामपुलवामा हमला था या हादसा अभी ये साबित भी नहीं हुआ, फिर किस ने किया क्यों किया ये साबित भी नहीं हुआ था और तहक़ीक़ाति इदारे किसी नतीजे पे पहुंच पाते की लगे सभी जंग के मुवाफ़ेक़त में नारे लगाने.       ऐसी ही ज़ेहनियत का फायदा मोदी जैसे चालाक सियासतदां उठाते है और अवाम के गले में मुल्क की मोहब्बत के नाम पे गुलामी का पट्टा बाँदें रखते हैं.

ठीक है अगर हमारी फौज पे किसी बाहरी ताक़त ने हमला किया है तो उसको इस गलती का जवाब बिला शुबा दिया जाना चाहिए लेकिन अगर वही हमला मुल्क में बैठे अला ओहदेदारों ने किया है तो उनकी क्या सजा होना चाहिएपुलवामा हमले के बाद तमाम मुख़ालेफ़ीन एक सुर में हुकूमते हिन्द के साथ शाना बा शाना खड़े थे जिसमे वो मुस्लिम सियासतदां भी थे जो कभी हुकूमत से अपने सख्त तरीन तन्क़ीदी सवालात के लिए मशहूर थे लेकिन इस हमले पे शुबा हुकूमत पे करने के बजाये वो भी इस भेड़ चाल का हिस्सा बन गए और मोदी की बिछाई हुई सियासी बिसात पे शह खा गए

बी.बी.सी. हिंदी खबरनामे ने एक राये शुमारी की थी जिसमे अवाम से पुछा गया था मोदी का अपने नाम के आगे चौकीदार लगाना सही है क्याउसके ऊपर इस सहाफी ने पहले ही अपनी नाराज़गी ट्वीट कर के ज़ाहिर कर दी है.

Zuber Ahmed Khan Retweeted BBC News Hindi
निरही बिवकूफ़ी है अपनी इज़्ज़त अपने हाथ से गिराने की कवायत. उसमे अंध भक्त इंजीनियर, ऍम टेक्. बी टेक् अपने नाम के आगे चौकीदार लगा रहे हैं. और ये ही ही क़ुरआन का फरमान है अल्लाह जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत. अब जिसकी किस्मत में ज़िल्लत लिख दी उसको इज़्ज़त नहीं मिले

 

                                              
BBC News HindiVerified account @BBCHindi
#KahaSuni | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपने नाम के साथ चौकीदार जोड़ा है...इसे आप कैसे देखते हैं?

मोदी जी का ऐसा करना एक दम अहमक़ाना क़दम है राये शुमारी को मुत्तासिर करने के लिए सियासत दान अपने अपने तरीके कार हिकमते अमली इख्तियार करते हैं लेकिन ऐसा पहली बार देखा गया है एक वज़ीरे अज़ामा अवाम की हमदर्दी हासिल करने के लिए इतनी पस्त ज़ेहनियत इख्तियार कर गिर कर अपने आपको अवाम के रू बरू पेश कर रहा हैये ही अगर पिछले पांच सालों में कुछ काम:-
१.           वतन की निस्बस्त से
२.          अवाम की फलाह और बहबूती की निस्बत से
३.           अक़लियतों की निस्बस्त से  
४.          ख़्वातीनों की निस्बस्त से  
५.          बेरोज़गार नौजवओं की निस्बत से  
६.          किसानों की निस्बत से  
७.          कीमतों में बे पनाह इज़ाफ़ा (मेहगाई ) कम करने की निस्बस्त से
८.          अमनो अमान कायम रखने की निस्बस्त से  
९.          बेन अक़वामी हालात साज़गार करने की निस्बत से
कुछ अच्छे इक़दाम उठाये होते तो जनवरी २०१९ से लेकर तो इन्तेख़ाबात आने तक अपने किये हुए कामों की फेहरिस्त गिनाते गिनाते भी वक़्त कम पड़ जाता लेकिन अच्छे कामों की फेहरिस्त ख़त्म ना होती फिर इस तरह से अवाम की हमदर्दी हासिल करने के लिए अपने आपको ज़लील और ख्वार भी नहीं करना पड़ता बल्कि हक़ से और आगे बढ़ के अवाम खुद ही इंतेखाबात में आपके हक़ में राये शुमारी करती.

जो मुख़ालेफ़ीन पुलवामा में हक़ीक़त सामने आये और उससे रू बरू हुए बिना एक नाबीना की तरह से हुकूमत के हक़ में यकजेहदी दिखा रहे थे “हम हुकूमते के किसी भी फैसले में साथ हैं”.  और जो चौकीदार मोहिम में दिखा रहे हैं “में भी चौकीदार”  अब इन जैसे लोगों को अक़लमंदो की जामत तस्सव्वुर किया जाए या बेवकूफों की क्योंकि इन्होने कुछ ना देखा और कुछ ना पाया बस मोदी की बनाई हुई राह पे मोदी के हम क़दम हो गए.
  
اس صحافی کی اردو جمع




English addition of this Journalist




हिंदी रसम अल खत उर्दू अलफ़ाज़

https://zuberahmed.blogspot.com/

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