Friday, 8 March 2019

ये रहा पुलवामा हमले का सबूत

पुलवामा का मुद्दा भारतीय अवाम के लिए सख्त तरीन दर्जे हरारत रखता है.  पुलवामा को बीजेपी ने मोदी इंतेज़ामिया के इंतेखाबात के लिए अमल अंगेज़ के लिहाज़ से इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, के इस रद्दो अमल से इंतेखाबात को सख़्त तरीन मुत्तास्सर किया जा सकेगा.  ये तो आने वला वक़्त ही बताएगा की पुलवामा के अमल अंगेज़ ने किस तरह से इन्तेख़ाबात को किस के हक़ में तब्दील किया, क्या इस रद्दो अमल ने राये शुमारी को बीजेपी के हक़ में बढ़ाया या घटाया, जो भारीतय फ़ौज की लाशों पे खेल खेल रही है.   वज़ीरे अज़ाम मोदी वो शख्सियत हैं जो सियासी अखाड़े में इज्तेमाई क़त्ले आम, इज्तेमाई अस्मतदरी, आगज़नी, लूट के लिए खूब मशहूर हैं.   


कोई भी नहीं भूल सकता की किस तरह गोधरा ट्रैन आगज़नी के हादसे को दहशतगर्दाना हमले का नाम दे कर और पूरी इंसानियत के क़त्ले आम के बाद मोदी और उनके मुवाफ़ेक़ीनों का कद बढ़ गया था.  और किस तरह से एक आगज़नी के हादसे को दहशतगर्दी का नाम दे कर पूरे गुजरात में आग लगा दी थी.  लेकिन इस बार इस सियासी जामत ने ना सिर्फ अपने पहले के तमाम रिकॉर्ड तोड़ डाले बल्कि भारत और बेन अक़वामी सतह पर वो पहली ऐसी जमात बन गई है जिसने फौज के जवानों की लाशों पे सियासी नफा पाने की हिकमत की है.  इस सहाफी को एक वीडियो ऑडियो टेप के साथ गैर रिहाइश भारतीय से मसूल हुआ है.  ऐसा माना जा रहा है और वीडियो के मुंतज़िम ने दावा किया है की हमला बीजेपी ने उसके बड़े ओहदेदार अमित शाह और राजनाथ सिंह के साथ मिल कर करवाया है. वीडियो दिखिए.

जो भी मालूमात तहक़ीक़ात और दौराने तफ्तीश ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट के मेमब्रान ने इकठ्ठा की है और जमा कर्दा रिपोर्ट से एक बात आईने की तरह शफ़्फ़ाफ़ है जिसमे कोई शक व शुबा की गुंजाइश नहीं है की मरकज़ ने फ़ौजी बेड़े के साथ बोहोत ही गैर ज़िम्मेदाराना  रवैय्ये से काम किया.   सख्त तरीन ग़फलत,  इंटेलिजेंस की नाकामी और आयनी फ़राइज़ को खारिज करने का जुर्म साबित होता है,  जिसके बारे में पुलवामा हादसे के बाद बोहोत से मज़मून के ज़रिये नज़रीनों को याद ध्यानी की जा चुकी है.

मोदी हुकूमत ने जो कुछ उनको पसंद था कर दिया,  अब उनको इसका जवाब भातरीय अवाम देगा.  गुज्जु अवाम ने २००२  के ५६ कारसेवकों के मारे जाने और मुसलमानों की लाशों और जलते हुए गुजरात के बाद मोदी को तमाम अर्से काम करने को दिए.  अब ये देखना दिलचस्प होगा की भारतीय अवाम ४५ जवानों के मौत के बाद मोदी को किस तरह से जवाब देता है.


जिस अंदाज़ में बीजेपी और संघ की मुत्तालेका जमातों ने गोधरा २००२ हादसे में कार सेवकों के मारे जाने के बाद अफरा तरफी का माहौल पैदा किया था,  और मीडिया के ज़रिये पुलवामा में आर्मी जवानों की हलाकत के बाद किया है उससे किसी भी बाविक़ार, मोहज़्ज़िब शहरी के ज़ेहन में शक पैदा होना लाज़मी है क्या हमको जीने की पूरी आज़ादी है.   कार सेवकों की राख के साथ जली हुई लाशों के फोटो पूरे गुजरात में ले कर घूमने के पीछे की नियत और मक़सद किया था, और पुलवामा हादसे के महज़ २ घंटे के अंदर इस तरह के आलूद, ज़हरिले पैग़ाम बदला, हमला, जंग, हम नतीजे की तवक़्क़ो कर रहें हैं यकीन दिहानी की नहीं मीडिया के लंगूरों  के ज़रिये फैला के अफरा तरफी के माहौल के पीछे क्या मक़सद था. 

किसी भी अमल को करने के पीछे एक पोशीदा या खुला मक़सद होता है, और इस तरह के पैगामों के बाद ये बात वाज़े नज़र आ रही है, मोदी और बीजेपी की नियत अपनी गफलत का ठीकरा किसी और के सर पर फोड़ के तंज़ीम और उसके सरबराह के तसव्वुर को मज़ीद बढ़ाना था.   अब देखना ये दिलचस्प होगा की भारतीय अवाम क्या सही में इस हादसे पे हमले का अमली जामा पहनाने के बाद बीजेपी या मोदी को सर आँखों पे बिठा के उनके कद को और बढ़ाते हैं या ऐसे लोगों को बहार फेक देतें हैं जो सियासत और एवान के गलयारों को आलूद से गन्दा करते हैं.


See in English

 

Here is the proof of Pulwama.




اس صحافی کی اردو جمع



English addition of this Journalist




हिंदी रसम अल खत उर्दू अलफ़ाज़


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