Saturday, 2 March 2019

भारतीय लँगूरनियों की अपने अड्डों पे आला दर्जे की ज़हन फरोशी

बिल आखिर फ्लाइट पायलट मेजर अभिनन्दन की घर वापसी हो ही गई.  लेकिन इस पूरे मुद्दे को जिस अंदाज़ में हिन्दू शिद्दत पसंदो, बीजपी के रकून,  हिन्दू दहशतगर्दों के जोश में लँगूरनिओं ने अपने बरहना अंदाज़ से मज़ीद शहवत अन्दोज़ और गर्म कर बीजेपी के लिए भुनाने की पुर ज़ोर कोशिश की थी उनके हाथ रूसवाई के ठीकरे के सिवा कुछ नहीं लगा.   ख़ास कर के जब पकिस्तान आर्मी के साथ मेजर अभिनन्दन से मुजाकेरात की वीडियो मन्ज़रे आम पे आई इन लँगूरनिओं की रूसवाई दो बाला हो गई.   जिसमे खुद एक मेजर कह रहा है की में अपने वतन लौटने के बाद भी अपने बयान से हरगिज़ नहीं पलटूँगा और जो सच है जो देखा जो पाया जो बोला उसपे मुस्तहकम रहूंगा और उस ही की वकालत करूँगा.


लँगूरनिओं ने बेहयाई की तमाम हदों को पार करते हुए जिस बरहना अंदाज़ में अपने हाकिमों और आकाओं को लुफ्त अन्दोज़ किया उससे ये बात पूरी तरह से साबित हो गई के अवाम के दिलो दिमाग में गंदगी और अय्याशी का नुत्फा ये लँगूरनिया डालतीं हैं.  बरहना होने की एक हद होती है लेकिन भारत में अपने अड्डों (मीडिया) पे ३ लँगूरनियाँ तो हर दुसरे मुद्दे पे और हर उस इंसान के सामने बरहना हो जातीं हैं, जिससे उनको अपने आका और बीजेपी को कुछ फायदे का इमकान होता है.  उनको लाज शर्म भी नहीं आती जब हर दुसरे रोज़ उनकी इज़्ज़त की सरे बाजार नीलामी होती है तब उनके पास अपना क्या बचता है.

कुल मिला के ये सहाफी पूरी ज़िम्मेदारी से कहता है और महसूस करता है आज के नए भारत में मीडिया एक आला दर्जे का ज़ेहन फरोशी का अड्डा हो गया है जहां लंगूर एक दलाल और लँगूरनियाँ ज़ेहन फरोश की हैसियत से काम करती हैं.  इन अड्डों पे लंगूर और लँगूरनियाँ आला दर्जे का काम ज़हन फरोशी के फ़र्ज़ को अंजाम देतें हैं जबकि इसका अदना दर्जा है जिस्मफरोशी.  दोनों ही दर्जों में अपने गाहक को पूरी कुव्वत और शिद्दत से मुतमईन करना होता है जिसके बदले में उनको उज्र मिलता है.  इन अड्डों में आर्मी की खिदमात से किनाराकश बूढ़े आला ओहदेदार मज़ीद शिद्दत और शहवत भरी बातों से अवाम के ज़ेहनों को गर्म और जिस्म की दर्जे हरारत को बढ़ाने के फ़राइज़ को अंजाम देतें हैं.    


एक सवाल ये सहाफी लंगूर, लँगूरनियों, शिद्दतपसन्द हिन्दू अवाम, दहशतगर्दों और मवादी बीजेपी के सियासतदाओं से ज़रूर पूछेगा क्या जो हालात अभिनन्दन के साथ पाकिस्तान में दर पेश आये वैसे ही हालात हुकूमते हिन्द की हूदूत में अगर कोई पाकिस्तानी पायलट गिरता तो आते.  नहीं हरगिज़ नहीं उसका अंजाम मौत और सिर्फ मौत होता.  जब ४० - ५० दहशतगर्दों आदमखोर लीचर्स की टीम एक भारतीय निहत्ते, लाचार, अकेले, मासूम मुसलमान को झूठे इलज़ाम में लीच कर देती है तो क्या वो एक पाकिस्तानी वो भी फाइटर को जंग जैसे हालात में ज़िंदा छोड़ते.  अब बताये कौन है असली दहशतगर्द और कहाँ दी जाती है दहशतगर्दी की तालीम और कहाँ किया जाता है उसका मश्क.  सवाल बड़ा है जवाब का मुन्तज़िर.

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...