लँगूरनिओं
को भले ही तीखा लग रहा है, जिस्म की जलन साफ़ दिखाई दे रही है लेकिन मजबूरी इतनी के
बदन की आग और ज़ुबान की जलन को शब्दों की मार्यादा और घर की इज़्ज़त ने रोक के रख दी. खैर.
करतारपुर
कॉरिडोर से तीन बातें साफ़ तौर से निकल के सामने आई. एक इमरान खान पाक प्रधान मंत्री का कद इस कॉरिडोर
से और बढ़ गया और वो इस मसले पे नंबर ले गए दूसरा सिद्धू पा जी उनका कद पहले से और बढ़
गया और उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री, विदेश मंत्री और सूबे के मुख्य मंत्री को भी
छोटा और बोना बना दिया तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात भारत के मीडिया की लँगूरनिओं की
जलन और हसद.
ये
तो कांग्रेस जैसी ना समझ पार्टी थी जो चुनावी मौसम में भी इस तरह की पहल और शांति वार्ता
को भी भूना नहीं पाई. अगर परिस्तिथि बिलकुल
विपरीत होती कांग्रेस केंद्र में शासित होती और बीजेपी विपक्ष में और उसके किसी नुमाइंदे
ने इस तरह से ७० साल से लंबित किसी मसले पे पहल कर के शांति की राह को आगे बढ़ाया होता
तो संघी और भक्त चीख चीख के हल्ला मचा मचा के बवाल कर देते. इस समूची शोर शराबे में मीडिया की लँगूरनिया और
लंगूर भी बारबार बीजेपी का साथ देते.
मीडिया
की लँगूरनियों के जलन के दो मुख्य कारण इस पत्रकार को समझ में आते है
१. जिस सिद्धू के ऊपर इमरान की शपत विधि से लौटने के
बाद लंगूर और लँगूरनियों ने हल्ला बोल किया था उसके विपरीत परिणाम निकले सिद्धू का
कद घटने के बजाये और बढ़ गया, और उनकी वह वाही से लँगूरनिया दुखी है.
२. करतारपुर कॉरिडोर खुलने का श्रेय बीजेपी और मोदी
सरकार को मिलने के बजाये पाक और सिद्धू को मिला.
लँगूरनिया
और लंगूर कितना ही उधम मचा ले जलते हुए अंगारों पे लौट ले लेकिन सिद्धू का बाल भी बांका
नहीं कर सकते उसके साथ हम है. और सिद्धू हमारे
कहने के ऊपर एक सेक्युलर पार्टी से जुड़े थे.
जब देश में मुस्लिम नौजावानों गौ आतंकिओं द्वारा खून बहाया जा रहा था और मुस्लिम
नौजवानो को पडतडित किया जा रहा था तो सिद्धू ने कहा था देश में २०१४ के बाद असहिष्णुता
बेहद बढ़ गई है उनको इस पत्रकार ने ट्वीट किया था, सिद्धू पा जी आप गलत पार्टी में एक
अच्छे इंसान है अगर आप ऐसा सोचते है तो छोड़ दीजिये बीजेपी और ज्वाइन कीजिये कोई सेक्युलर
पार्टी. हालांकि इस पत्रकार ने किसी भी पार्टी
का नाम नहीं दिया था. और आज वही सिद्धू जिसकी
बीजपी में कोई इज़्ज़त नहीं थी किस मुकाम पे पहुंच गया.
ऐसा
ही ट्वीट और सुझाव शत्रुघन सिन्हा को भी ये पत्रकार कर चूका है और ऐसा ही अनुरोध अब
ये पत्रकार हरसिमरीत जी से भी करेगा. आप एक
अच्छी सोच वाली पार्टी को चुन लीजिये.
बस
अब तो लँगूरनियों के लिए एक देवदासी के सामान मीडिया रुपी मंदिर के महंतों का आदेश
मानने के बजाए कुछ भी नहीं बचा है. अभी तक
बीजेपी और संघ के ओहदेदारों को ये देवदासी लँगूरनिया खुश करती थी और अब कांग्रेस की
बारी है......
रहा
सवाल सिद्धू का तो अब मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ तो क्या भक्त, अंध भक्त, संघी
आतंकी और खुद बीजेपी वाले उनका बाल भी बांका नहीं कर सकते उनको बुलंदिओं तक पहुंचने
से कोई रोक नहीं सकता.
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