बीजेपी का
विकास सिर्फ एक छलावा और दिखावा है. कम काम और बखान ज़्यादा. इस गोरख धंदे में लंगूर पत्रकार बीजेपी का पूरी
तरह साथ दे रहे है और एक वफादार पालतू की तरह बीजेपी की रखवाली कर रहे है; लंगूर
सदा ही बीजेपी और संघ के दलाल के रूप में
काम करते हैं और लँगूरनिया बिकी हुई महिलाओं की तरह बर्ताव करती हैं और बीजेपी,
संघ के सामने अपना तन मन धन सब कुछ नौछावर करने को तत्पर रहती हैं. क्योंकि उनको मीडिया रुपी मंदिर के महंत के आदेश
ही ऐसे होते है; ये हमारे ख़ास मेहमान है तुमको इनको खुश करना है. अब लाचार ये लँगूरनिया मीडिया रुपी मंदिर में देवदासिओं की हैसियत से काम करती है. सिर्फ गुलाम सोच अपनी खुद की खबर चला नहीं सकती, बोल नहीं सकती, सच्ची बात कह नहीं सकती.
जिन प्रदेशों में
बीजेपी १५ से २० साल से राज कर रही है उन प्रदेशों में विकास के नाम पे और हिन्दू सहानुभूति
ले कर जनता को खूब ठगा गया है. ये पत्रकार
सदा ही चुनवी सभाओं में घूम के ख़बरों और माहौल का ज़ायज़ा लेता है. विकास कार्यों का आकलन कर के तथा सच्ची खबर दिखा
कर उस प्रदेश की सरकार को हाशिये पे लेता है; सरकार की नाकामी को बे नक़ाब करता है,
चाहे वो किसी भी पार्टी से हो. लंगूर चुनावी
मौसम में सदा ही बीजेपी के लिए एक पतली गली तलाश कर के लाते है यानी ऐसी खबरे
जिससे बीजेपी की साख को बट्टा नहीं लगे और जनता भ्रमित होती रहे. २०१५ में मोदी के प्रधान बनने के बाद गुजरात के
विकास को पहले ही ये पत्रकार अपने लेख गुजरात का काला सच में नग्न कर चूका है.
मध्य प्रदेश में
भी बीजेपी की सरकार १५ साल से ज़्यादा समय से है लेकिन जो हालात २०१२ सड़कों की निस्बत
से थे तकरीबन वही हालात नवंबर २०१८ में भी है.
२०१२ में सड़कों की दुर्दशा के ऊपर अपने लेख Is it Muslim Jami Masjid or Hindus’s Bhoj Shila???... द्वारा शिवराज सरकार को सूचित भी कर चूका था.
अक्टूबर २०१३ में चुनाव के समय
ये पत्रकार मध्य प्रदेश के कई बड़े शहरों के दौरे पे था. अपना चुनावी दौरा ख़त्म कर के इस पत्रकार ने हलाते
हाजरा पे एक लेख लिखा था Piggeries at the sacred place of Muslims.
अब
इंदौर के मुस्लिम बहुल खजराने से गंदगी ख़त्म हुई या नहीं ये तो नहीं मालूम लेकिन
सड़कों की बदहाली का हाल वही है जिसका ज़िक्र सतना चित्रकूट मार्ग पे लगे जाम पे एक
सज्जन ने किया है. २०१७ में शिवराज सिंह
ने अमेरिका का दौरा किया था उसके तुरंत बाद सड़को की बदहाली का एक वीडियो प्राप्त
हुआ था. जिसका ज़िक्र लेखक ने अपने नवंबर
२०१८ को लिखे लेख भाजपा के लिए बुरे दिन आने, और जनता के लिए जाने की ... में किया है. जनता
से बात करते समय इंटरव्यू में इंदौर तथा सतना दोनों ही जगह की जनता का ये ही कहना
था पिछले १०-१५ सालों से यथावत स्थिति है.
विकास कुछ नहीं हुआ, सतना में हिन्दू श्रद्धालुओं को तकलीफ का सामना करना
पड़ता है और और खजराने में गंदगी की वजह से मुस्लिम. सतना में पिछले १० सालों से रोड बन रही है
लेकिन अभी तक नहीं बनी, वहीँ इंदौर के खजराने में पिछले १०-१२ सालों से गंदगी है लेकिन
सफाई नहीं हुई.
दिसंबर २०१८ में इस साल चुनाव में
भी लेखक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक निजी कार्यक्रम में गया था. लेखक भोपाल
में ४ दिन १५ से १८ तक रहा और उसने हालात का जायज़ा भी लिया. विकास की अगर बात करे तो भोपाल महानगर होते हुए
भी उतना विकासशील नज़र नहीं आया जितना होना चाहिए. साफ़ सफाई का आभाव देखने को मिला, सड़कों पे गायों
का जमावड़ा जिसकी वजह से यातायात समस्या उत्पन्न होती रहती है.
जनता
के सामने सही और सटीक खबरे किसी भी पार्टी का पक्ष न लेकर निष्पक्ष तरह से रिपोर्ट
और खबरों का संचालन सिर्फ और सिर्फ वही पत्रकार करते है जो मोदी सरकार और बीजेपी
के घर की रखवाली नहीं करते जो मोदी और बीजेपी की रखवाली करते है वो सिर्फ दूसरों
के ऊपर भोंकते है.
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