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अज़ीज़ नाज़रीन
इस्लामिक मुमालिकों की तंज़ीम Organisation of Islamic Coopration (OIC) हिन्द में मुसलमानों की हालत पर सख़्त इज़हारे तशवीश किया है। ताहम हरिद्वार मुस्लिम नस्ल कुशी का क़रारदार नाफ़िज़ करने और दुख्तराने मिल्लत को ऑनलाइन ज़लील करने उनकी अस्मत पर निशाना अंगेज़ी करने पर बोलते हुए OIC के जेनेरल सेक्रेटरी जनाब इब्राहीम ताहिर ने इस मुद्दे पर अक़वामे मुताहिदा को दख़ल देने की दरख़्वास्त की है।
OIC ने
अपने एहलकारी (Official) ट्वीटर हैंडल से इसकी इत्तेला देते हुए ट्वीट किया है। ट्वीट में कहा गया है की हिन्द के उत्तराखंड हरिद्वार
में हिन्दुतुव के मुहाफ़िज़ों के मुसलमानों का अल ऐलानियाँ क़त्ले आम करने का अज़्म के
साथ सोशल मीडिया साइट पर दुख्तराने मिल्लत की ऑन लाइन अस्मत रेज़ी और उनको ज़लील करने
के साथ हिन्द के सूबे कर्नाटक में मुस्लिम तुलबाओं के हिजाब पर पाबन्दी लगाने जैसे
मुद्दों पर सख़्त तशवीश ज़ाहिर की है।
ट्वीट में मज़ीद आगे लिखा गया है की OIC जनरल सेक्रेट्रिएट इस मौज़ूं पर ज़रूरी इक़दाम लेने के लिए आलमी बरदारी ख़ास अक़वामे मुत्तहिदा की इंसानी हुक़ूक़ के तहफूज़ की तंज़ीम से आह्वान करता है की ऐसे हस्सास मुद्दों पर ज़रूरी क़दम उठायें। OIC एक बार फिर हूकूमते हिन्द से मुतालबा करता है की वोह अपने अवाम के जीने के हक़ का तहफ्फुज़ करते हुए मुस्लिम अवाम के हुक़ूक़ की हिफाज़त करे और उनके खिलाफ तशद्दुत, ज़हर (नफरत) और जुर्म को भड़काने वाले मुजरिमों को सज़ा दिलवाये।
OIC की इतनी सख़्त मज़म्मत और फटकार के बाद अब देखना यह होगा
की ज़ाफ़रानी शिद्दत अपने वही बेडंगे और हिटलर रवैये को जारी रखता है और मज़ीद सख़्त तबाही
हिन्द के अवाम की तक़दीर में लिखता है या थोड़ा नरम रुख अपनाता है। अगर ोिक की बात ना मानी तो अक़वामे मुताहिदा में
भारत के खिलाफ क़रारदार नाफ़िज़ होगा। हो सकता
है जिस पाकिस्तान को दहशतगर्द मुल्क होने का एलान संघी और ज़ाफ़रानी ज़हर करने की कोशिश
कर रहे थे भारत ही हो जाए। अगर ऐसा होता है
तो होंगे भारत से तमाम आलमी बरादरी के सिफारती तालुकात मुनतक़ा, तमाम तिजरारती ताल्लुक़ात
मुनतक़ा और बोहोत सी पाबंदियां लगा दी जाएगी।
ना भारत कोई असलाह ख़रीद सकता है और ना ही उसके अवाम किसी भी मुल्क में पनाह
ले सकतें हैं।
जो ख़्वाब संघी सीरिया का देखते थे वोह भारत में पूरा होते हुए देख रहा है यह सहाफ़ी। क्योंकि किसी भी क़िस्म की शिद्दत और हिटलर शाही एक अदना से मुल्क के लिए दुरुस्त नहीं है। ना ही भारत की फौज में उस दर्जे की सलाहियत है की अलामी बरादरी से जंग लड़ सके और ना ही उसके पास आला दर्जे के असलाह है की दिफ़ा कर सके। अगर अक़वामे मुत्तहिदा की जानिब से जंग का एलान हुआ तो भारत का होगा धूवाँ। हर जानिब ख़ूंरेज़ी होगी, इससे बेहतर है की हिटलर अपनी मनफ़ी सोच को तब्दील करे और शिद्दत पसंद हिन्दू, संघी दहशत और बीजेपी वाले ज़हरीले सियासतदानों के ऊपर खुद कारवाही करे और मुनासिब फ़ासी की सजा दे। जो जुर्म में शामिल थे उनको फ़ासी देने से करोड़ों बेगुनाह बच जायेगें। नहीं तो तक़दीर में तबाही तो कोई भी अपने हाथों से नहीं लिखता उसके बदआमाल ही उसको तबाह करते हैं।
Zuber
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