Friday, 11 February 2022

दुख्तराने मिल्लत की सियाह आंधी, अलीगढ़ से मालेगाव हो गया काला।

यह कैसी आंधी आई अपने साथ तबाही लाई 

बोल के उतारो हिजाब हुकूमत बोहोत पछताई। 


अज़ीज़ नाज़रीन,

हिजाब तनज़िया जो कर्नाटक के बी आर उडीपी से शुरू हुआ था तक़रीबन तमाम मुल्के हिन्द को अपनी आग़ोश में ले चूका है।  सूबे शुमाल के अलीगढ़ से ले कर तक़रीबन २५०० किलोमीटर दूर मेलेगाओं तक दुख्तराने मिल्लत की सियाह आंधी दिख रही थी।  यह सब हिजाब के मवाफ़ेक़त में बहार निकली थी।   नाज़रीन दुख्तराने मिल्लत की इतनी बड़ी तादात देख कर सहाफी को ट्रिपल तलाक़ में घरों से बहार निकले दुख्तराने मिल्लत का हुजूम याद आ गया।  जिसको कवर करने के लिए सहाफ़ी हर बड़े शहर में मौजूद था और उसके ऊपर कई मज़मून लिखे हैं।  

तमाम खातून बुर्क़े में थी, बरोज़ जुमे को अलीगढ़ में मुस्लिम खातूनों ने हिजाब के मुवाफ़ेक़त में एक तवील एहतेजाज का एहतेमाम किया और कहा की बुर्का या हिजाब हमारा हक़ है, दुनियां की कोई सी भी ताक़त इसको हमसे जुदा नहीं कर सकती।  

बरोज़ जुमेरात को मालेगाव में भी ऐसा ही हुजूम देखने को मिला था।  जिसके ऊपर शाम बज कर ३० मिनिट पर एक नज़म का उन्वान शाया किया था। जिसको मुकम्मल आज कर के अपने उर्दू शायरी ब्लॉग पर शाया किया है। 

सहाफ़ी को वही दिन याद गए जब ट्रिपल तलाक़ और "का" के खिलाफ एहतेजाज हुआ करते थे वही बेनर और पोस्टर लिए हुए दुःखतरने मिल्लत और हुजूम लेकिन अब पोस्टरों और बन्नारों के मज़मून बदला गए थे।     

हुकूमतें ख़ौफ़ज़दा हो गई फातिमा की बेटिओं से फिर क्या हालत होगी गर क़ियादत अली के बेटों के अपने हाथ में ले ली।   पुलिस ने जमीअतुल उलेमा के कारकूनों के ख़िलाफ़ दफा १४४ की खिलाफवर्जी का केस दर्ज किया है।  वहीँ मजलिस--इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के रकूने असेंबली को भी नोटिस जारी किया है. असेम्ली रकून पर एहतेजाज के हिस्सेदार बनने और इजलास को ख़िताब करने का इलज़ाम हैं।  

हिजाब को ले कर तमाम मुल्के हिन्द में एहतेजाज और रैलियां मुनक़्क़िद की जा रही हैं।  जम्म्मू कश्मीर में भी दुख्तराने मिल्लत ने एक बड़ी रैली मुनक़्क़िद की थी, कर्नाटक का हिजाब तनज़िया जैसे ही शुरू हुआ और अवाम को धीरे धीरे पता चलने लगा तमाम दीगर स्कूल और कॉलेजेस में तुलबात हिजाब और बुर्क़ा पहन कर आने लगी।  कॉलेज इन्तेज़ामियाँ को यह सब देख कर बोहोत हैरानगी हुई।  


जुबेर

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