Tuesday, 22 February 2022

हिजाब का तूफ़ान

अज़ीज़ नाज़रीन,

ज़ाफ़रानी दहशत ग़ैर ज़रूरी मुद्दों को तूल दे कर ख़ुद अपनी फ़ज़ीहत करवा रहे हैं और मुल्के हिन्द की आलमी सतह पर रूस्वाई।  ट्रिपल तलाक़, "का", एन.आर.सी. को जिस हिसाब से बेतहाशा इश्तेहार किया गया उससे तमाम आलम में रूस्वाई हूकूमते ज़ाफ़रान की ख़ूब हुई।  अब मुद्दा हिजाब का था।  जिसमे ज़ाफ़रानी हाकिम बैक फुट पर खेलने को मजबूर हो गए।  दरअसल यह ज़ाफ़रानी हर मुद्दे पर सियासी नफ़ा लेने की हिकमत करतें हैं लेकिन हर बार उनकी बाज़ी उलटी पड़ जाती है।ट्रिपल तलाक़, "का", एन.आर.सी. क़ानून तो बना दिया लेकिन नाफ़िज़ नहीं कर पाए ज़ाफ़रानी फिर लंगूर-लँगूरनियों के जारिए इतना उछल कूद करने की क्या ज़रुरत थी।  ज़ाफ़रानियों को इस सहाफी के उस अलफ़ाज़ का ख़ूब तीखा लगा था यह सुप्रीम कोर्ट कौन होता है हमारे मज़हब में मदाखलत करने वाला।  अब वैसा ही हिजाब तनज़िया पर ज़ाफ़रानियों को ज़िल्लत और रूस्वाई देखने को मिल रही है। 

कर्नाटक से हिजाब का ग़ैर ज़रूरी तनज़िया का आगाज़ किया जो अब तमाम हिन्द को अपनी आग़ोश में ले चूका है।  अब हो यह रहा है जो  दुख्तराने मिल्लत हिजाब नहीं पहनती थी या पहले कभी भी हिजाब नहीं पहना, वोह भी उसको तवज्जो देने लगी हैं।  जिसकी वजह से हिजाब या स्कार्फ की मांग काफी बढ़ गई है।  हिजाब अब महज़ दुख्तराने मिल्लत तक महदूत नहीं रह गया बरक्स जो ख़ातून (हिन्दू, क्रिस्टी, सिख, दलित) बरहना (नंगी) तस्वीरें देने वालिओं से हिजाब को बेहतर समझ रही हैं वोह भी हिजाब पहन कर घरों से निकल रही हैं।   बॉलिवुड की एक ओबाश नंगी आवारा ख़ातून है जिसको मीडिया में पराये मर्दों के सामने अपनी नंगी छाती, जाँघे और जिस्म की नुमाइश करने का बड़ा ही शौक़ है।  ऐसी ओबाश आवारा लड़कियां ही जिस्म फरोशी के धंदे में शामिल रहती हैं।  जिनके नज़दीक हर रोज़ नया मर्द बदलना एक फैशन समझा जाता है।  फिर ऐसी ओबाश लड़कियां अपने वाल्दैन को भी कुछ नहीं समझती और उनको भी जूते की नोक पर रखती हैं।   

हिजाब की बढ़ती हुई मांग को ले कर बाज़ारों में बुर्क़े या हिजाब की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है।  क्योंकि अब हिजाब महज़ दुख्तराने मिल्लत तक महदूत नहीं रह गया अब वोह ऐसा मुद्दा बन गया है की जिस्म की नुमाइश करने से अच्छा अपने जिस्म और छुपाने के आज़ा को पोशीदा किया जाए।नाज़रीन जैसा की इससे क़ब्ल इस सहाफी ने कहा था की आप ज़बर्दस्ती एक खातून से उसका हिजाब क्यों उतार रहे हो।  वोह बात तमाम खातूनों को अच्छी लगी जिसको पहनना है उसको पहनने दो जिनके नहीं पहनना है उसको आप ज़बरदस्ती नहीं पहनाओ।  लेकिन जो हिजाब पहने है उसको रोड पर उतारना कहाँ तक जाइज़ है। 

बम्बई के मुस्लिम हल्क़ों मोहम्मद अली रोड, मदन पूरा, गोवंडी, मुम्ब्रा में बुर्क़े और हिजाब की ज़बरदस्त बिक्री हुई।  अब दिगर दुकानदार दादर वग़ैरा भी बुर्क़े की बिक्री के बारे में सोच रहें हैं।  रमज़ान और ईद से क़ब्ल बोहोत से अहले हूनूद (मारवाड़ी, गुजराती) ताजिरों ने नए बुर्क़े बनाने के बारे में एक हिकमत तैयार कर ली है। 

मोहम्मद अली रोड पर बुर्क़े के ताजिरों का कहना है की कर्नाटक में हिजाब तनाज़िया के बाद बुर्क़े की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है।  जिसमे सिन रसीदा ख़ातून के बजाये अब स्कूल, कॉलेज के तुलबात के अंदर इसका ज़बरदस्त असर देखा गया है।  ख़ास मुस्कान एपिसोड के बाद तो कॉलेज की तुलबात में एक होड़ से लग गई है।  ताजिरों का कहना है की वोह मुस्कान बुर्क़ा, मुस्कान हिजाब के नाम से ब्रांड का आगाज़ करेगें और उससे होने वाली आमदनी का कुछ हिस्सा पड़ने लिखने की खवाइशमंद ग़रीब तुलबात को वक़्फ़ कर देंगे। 

Zuber 

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