अज़ीज़ नाज़रीन,
जैसा की आप तमाम हज़रात को मालूम है की ख़ाकी दहशतगर्द (पुलिस) उमूमन संघी दहशत के पैरोकार होतें हैं। ख़ास अगर सूबे हिमाचल, हरयाणा, शुमाली सूबा, राजिस्थान, दिल्ली, आसाम, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटका की बात करें तो तमाम ख़ाकी दहशतगर्द हाफ टिकट नेकर धारियों के पैरोकार होतें हैं।
इस ज़िम्न में दुख्तराने मिल्लत के हिजाब पर नाज़ेबा पोस्ट शाया करने पर राजिस्थान पुलिस के दो ठोले मुअत्तल कर दिए गए हैं। मुअत्तल होने वाले ठोले अदना दर्जे पर काम करने वाले नहीं थे, बरक्स पुलिस में आला ओहदे पर फ़ाइज़ थे। एक का नाम है सतवीर सिंह जो ASI की पोस्ट पर काम करता था और दूसरा कॉन्स्टेबल सुरेश दोनों ही ज़ेहनी दहशतगर्द जयपुर में तैनात थे।
इन दोनों खाकी दहशतगर्दों ने हिजाब से मुत्तलीक़ बेहद नाज़ेबा पोस्ट सोशल मीडिया पर शाया की थी। पुलिस का कहना है ऐसे हस्सास मामलों में सिफर रवादारी (0 tolerance) इख़्तेयार की जाएगी और मुलज़मीन के ऊपर फ़ौरन कारवाही की जाएगी।
नाज़रीन यह एक मामला नहीं है बल्कि ऐसे तो कई मामले हैं जहाँ इन खाकी ज़ालिमों ने मुस्लिम, क्रिस्टी और दलित अवाम को ना सिर्फ ह्रास किया बल्कि मौत के घाट भी उतार दिया। नाज़रीन जब आला ओहदेदारों के दिलों दिमाग़ में इस तरह की गंदगी और ज़हर भरा हुआ है वोह भी ख़ास मस्तूरातों के मामले में तो कैसे मस्तूरातों के ख़िलाफ़ जुर्म कम होंगे। वही हो रहा है पुलिस का लचर रवैया ख़ुद गुंडों, बेक बेंचर्स, गुटका बाज़, गली और नुक्कड़ की शान, पान की दुकान, यूनिवर्सिटी में सिर्फ पहचान ऐसे शोहदे जब जुर्म करेगें तो पुलिस के आला ओहदेदार ऐसों को मेहफ़ूज़ करने की कोशिश करेगें। फिर जो सख़्त मिजाज़ा क़ानून की इज़्ज़त करने वाला अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करने वाला होगा उसको आला ओहदेदार का फोन आ जाएगा या फिर किसी सियासतदां का की हमारे बच्चे हैं इनके ख़िलाफ़ कुछ हिकमत मत करो।
फिर जब जुर्म में खुद पुलिस ही मुलव्विस हो तो एक तो करेला ऊपर नीम चढ़ा, ८ साल की मासूम कटरा मजमूई अस्मत दरी जिसमे पुलिस वाले फौज के अराकीन तक शामिल थे। फिर लखीपुर की वोह बच्ची जिसकी जसत को रात की तारीकी में पुलिस ने अंगार लगा दी और सबूत मिटा दिए। क्योंकि उसकी मजमूई अस्मतदारी करने वाले कोई और नहीं बल्कि वही सिंह ठाकुर समाज के लौंडे थे।
नाज़रीन यह जो ज़हर लंगूर-लँगूरनियों ने अपने ज़ाफ़रानी आक़ाओं के कहने पर सियासत, पुलिस, इन्तेज़ामियाँ और फौज के ज़ेहनों में भरा है उससे किसी का ज़्यादा नुक़सान हो या ना हो लेकिन इनके ख़ुद के मुल्क भारत को बोहोत ही नुक़सान हो रहा है। अभी तो मोदी जी ऐसे हस्सास मामलों में ख़ामोश हैं, सब चंगा सी, लेकिन जब २०-२१ साल बाद सब कुछ बर्बाद हो जाएगा तब यह लोग कहेंगे हाय हाय ला ला हदरी।
जो ज़ाफ़रानी दुर्गा वाहिनी की ख़ातूनें चाहे वोह मुनाफ़िक़ा हों या लँगूरनियाँ हिजाब पर मखौल उड़ा रहीं हैं मुस्लिम बच्चिओं का जो क़त्ले किरदार कर रहीं हैं में उनसे कहना चाहता हूँ की तुम पूरे कपडे पहने हुए बच्चिओं पर तनक़ीद कर रही हो अगर इतनी बड़ी दुर्गा जीवी हो तो तुम पूरे कपडे उतार कर सिर्फ ख़ाकी चड्डी और ब्रा में अपने दफ्तर या ज़ारियाये अवामी आमदो रफ़्त में जा कर दिखाओ। फिर जो ज़ाफ़रानी मुँह की लँगूरनियाँ हैं उसने गुज़ारिश करूंगा की अपने टी वी स्टुडिओं में सिर्फ ख़ाकी चड्डी और ब्रा में ख़बरनामे को शाया करें। फिर कभी कभी टाँगे केमेरे के सामने चौड़ी भी करें। फिर देखो इनका क्या हाल होगा। जब अपने जिस्म को पोशिंदा करने वालों के ऊपर तनक़ीद हो रही है तो बरहना घूमने फिरने वालों के ऊपर क्यों नहीं होगी। और हाँ यह गुज़ारिश बॉलीवुड की तवाइफ़ों से नहीं जिनका काम ही हर रोज़ नए नए आशिक़ों के साथ मौज करना है और उनके रुपए पैसे पर नंगी वीडियो तसवीर शाया करना है।
अगर उसपर भी दिल ना भरे तो खुले आम ज़िना कारी करते हुए वीडियो ख़बरनामे पर चला दो। जैसा की उस तिहाड़ जेल के क़ैदी के साथ मौज करते हुए अपनी छाती को दिखाते हुए टॉनिक वाली बाई ने सोशल मीडिया पर फोटो शाया किये थे। एक ऐसे बूढ़े शख़्स से टॉनिक का राज़ जान लिया जो अपनी लुगाई को नहीं संभाल पाया फिर उस टॉनिक का तजुर्बा उस टॉनिक वाली बाई ने एक सज़ाई आफ़ता मुजरिम तिहाड़ी के साथ किया। लेकिन कुछ नहीं मिला कियोंके वोह तिहाड़ी संघी निकला, नपुंसक, ज़नख़ा। अपनी लुगाई को वोह ख़ुद मुसलमान, पाकिस्तान, इस्लाम कश्मीर के पास भेजता है और वोह उसकी नस्ले पैदा कर रहें हैं. बीचारी टॉनिक वाली बाई प्यासी ही रह गयी.
Zuber
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