Saturday, 7 March 2020

आलमी ख़वातीन (शाहीन) दिन मुबारक,

ख़वातीन दिन के मौक़े पर हर ख़ातून को तहे दिल से मुबारक बाद पेश करता हूँ.  औरत अगर सच्चे और हक़ काम को करने का अज़्म कर ले तो तमाम कायनात उसके जज़्बे और हक़ के लिए उसकी मदद करने को तैयार हो जाती है.  फिर उसको कूव्वत और ताक़त कहाँ से फ़राहम होती है ये कोई गुमान भी नहीं कर सकता.  बड़े बड़े अक़्ल वालों की अक़्ल गुम और ख़पत हो जाती है लेकिन एक अदना सी समझी जाने वाली औरत सख़्त तरीन, अक्सरियत वाली हुकूमत का तख़्ता पलट करने की क़ुव्वत और हिम्मत रखती है.

ख़ातून दिन के इस अज़ीम मौक़े पर एहतेजाज शाहीन को अगर फरामोश किया तो ये ख़ातूनों के जज़्बे, हिम्मत और कूव्वत के साथ ना इंसाफ़ी होगी.  भारत में मौजूद एहतेजाज शाहीन की हर ख़ातून आज अज़मत, इज़्ज़त का मुक़ाम रखती है.  इन ख़ातूनों को दिल की गहराइयों से सलाम.  आप हुए कामयाब.  आपकी वजह से हम हुए कामयाब.  आपने पाया अपना हक़, हमने पाया अपना मक़सद.  

ख़वातीन दिन के इस अज़ीम मौक़े पर शेर से अपने अलफ़ाज़ का इक़्तेताम करूंगा.  जो एहतेजाज शाहीन की मस्तूरातों से ख़िताब है.


हर ख़ातून है, अज़मत वाली,
हर ख़ातून है, हिम्मत वाली,
हर ख़ातून है अज़ीम, चाहे वो
स्वाति हो, कौर, स्वरा या हो नसरीन
शाहीन है हक़, इन्साफ और ज़िंदा
रहने की जंग,
है जिसपे रेहमत, रब्बे करीम.

सहाफी जुबेर

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