Monday, 23 March 2020

एक और मियाद ख़त्म.

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अज़ीज़ नाज़रीन

आम तोर पर ये सहाफी संघी दहशतगर्दों, बीजेपी और शिद्दत पसंद हिन्दू ज़हरीली ज़ेहनियत के हाशिये पर रहता है.  क्योंकि इस सहाफी की हक़ बयानी और इन्साफ की बात, बिल्कुल  दुरुस्त फलसफे से इन तमाम दहशतगर्दों, वहशियों और शिद्दत पसंद दरिंदों की दुखती हुई रग को मज़ीद इज़ा और शदीद जब्र पहुँचती है.  

०८ मार्च को एक ख़बरनामे में संघियों को धो डालने के बाद इन शिद्दत पसंदों और हिन्दू दहशतगर्दों ने सबक़ सिखाने की धमकी दी थी.  उनकी उस ललकार को मंज़ूर किया और उनको १५ दिनों की मोहलत दी जो आज बरोज़ २३ मार्च को ख़त्म हो गई.

Zuber Ahmed Khan


कुच्छ संघी ज़ेहेर ज़ुबेर को देखने की बात बोलते हैं. तो 2010 से अभी तक क्या कर रहे थे. फिर आतंकी अमित को अगस्त 2019 मे 15 दिनों की चौनोति दी थी आज 8 महीनों के बाद भी टाय टाय फुस्स. जीतेन देखने निकले थे सब मौत की आगोश मे चले गये. फिर भी मंज़ूर है देख लो तुम भी ओर निकलो गलीज़ नियत ले कर हमे ईज़ा पहुचाने की नियत से, चौनोति मंज़ूर. आपको सूविधा सिर्फ 15 दिनों के लिये दी जाती है. ओर आपका समय शूरू होता है अब. 15 दिनों बाद नया हमला.
नाज़रीन ये बात हर दम साबित हुई है, जिस जिस मसले पर संघी दहशतगर्द, बीजेपी और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम मुसलमानों को ज़ुबानी, जिस्मानी, तालीमी, मज़हबी या माशी अज़ीयत देते थे, और उनकी दिल आज़ारी करते थे, वो सभी चीज़ें शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के सामने आयी.  हर उस मामले पर इस सहाफी ने अपने बे बाक राये रखी है जिसपर की संघी दहशतगर्द, बीजेपी और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम मुसलमानों को अज़ीयत दे कर उनकी दिल आज़ारी करते थे फिर बाद में हू बहू वही सारी चीज़ें शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के सामने आई.  ख़्वाह वोह संघियों की जानिब से मुस्लिम मज़हबी एतिक़ाद पर हमला रेज़ होना या बाबर, औरंगज़ेब या मुगलों के नाम पर फरेब और झूट फैलाना सभी बातों पर संघी, बीजेपी वालों और कट्टरपंथी हिन्दू अवाम को थूक के चाटना पड़ा है या रूसवाई और ज़लालत का सामना करना पड़ा है.  इससे पेश्तर एक कमलेश नामी दहशतगर्द ने इस सहाफी को सबक़ सिखाने के लिए ललकारा था जिसको इस सहाफी ने उस दहशतगर्द को किये हुए ट्वीट के साथ अपने एक मज़मून आलमी बरादरी मदद करो, मुसलमानों की नस्ल कुशी की जा रही है.  पेश किया है.

नाज़रीन ये सहाफी तहरीर या खिताबत की दुनियां में २०१० में आया था.  तब से ले कर बे शुमार मौक़ों पर इस सहाफी को शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के ना ज़ेबा कलेमात, धमकिया और जिस्मानी, नफ़्सानी हमलों का सामना भी करना पड़ा है.  ये बात अलहदा है की अभी तक बावजूद अगस्त २०१९ को अमित शाह के वज़ीरे दाखला और मोदी के वज़ीरे अज़ाम होने के और इस सहाफी की ललकार  की मियाद पूरी होने पर जिसका ज़िक्र इस सहाफी ने अपने मज़मून  हुकूमते हिन्द को पैग़ाम में किया है उस क़िस्म की इज़ा और जर्ब ये संघी, बीजेपी और शिद्दत पसंद नहीं पहुंचा पाए.  ये दहशतगर्द अपनी उस हिकमत में अभी तक कामयाब नहीं हो पाए जैसी के उन्होंने ज्योतिर्मा डे और गौरी लंकेश के लिए मंसूबा बंदी कर के उनको मौत की आगोश में भेज दिया.

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