Thursday, 12 March 2020

हिजरत की तय्यारी रखें

ब्रादराने मिल्लते इस्लामियां,  


आप तमाम से गुज़ारिश है की अपने आपको हिजरत करने के लिए तय्यार रखें। किसी भी वक़्त अचानक  हिजरत करने या अपने अहले ख़ाना के साथ रात की तारीकी में घर छोड़ने से बेहतर है की हिन्दुस्तान में शुमाल, जुनूब, मशरिक़ या मग़रिब किसी ख़ास जगह पर मुस्लिम सियासतदाओं और उलेमाओं से राब्ता क़ायम कर के तमाम मुस्लिम अवाम को पहले से ही बड़ी तादात में एक जगह मुश्तर्का मोहिम के तहत आ जाना चाहिए.

जिस हिसाब से हूकूमते हिन्द ने मुस्लिम अवाम को तबाह, बर्बादऔर हलाक करने के पूरे इंतज़ाम कर लिए हैं उससे पेश्तर तमाम मुस्लिम अवाम को अक्सरियत वाली जगह पर चले जाना चाहिए.   बैंक वग़ैरा में पैसा भी उतना ही रखें की अगर डूब जाए तो ज़्यादा नुक़सान ना हो.  पाकिस्तान से जुड़ी हुई सरहद या नज़दीकी वाले सूबों में मुस्लिम अक्सरियत बना लीजिये.  जिससे तक़सीम के वक़्त फौरी आपको हिंदुस्तान छोड़ के जाने से क़ब्ल ही आप मुस्लिम अक्सरियत में रहें और आपको मज़ीद कहीं जाने की ज़रुरत ही पेश ना आये. और तक़सीम भी उसी हिस्से की हो जो मुस्लिम अक्सरियत वाला है. 

जिस हिसाब से हाल ही के दिनों में हिन्दू दहशतगर्दों ने हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम मुस्लिम अवाम पर ज़ुल्म और जब्र किया है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है की मोदी इन्तेज़ामियाँ मुस्लिम अवाम पर मज़ीद तशद्दुत करने की मंसूबा बंदी कर रही है.   पाकिस्तान की सरहद से जुड़े हुए इलाक़ों में मुस्लिम अक्सरियत वाली बस्ती बनाने के पीछे हिकमत ये है की  हंगामी हालात में फौरी पाक मदद फ़राहम हो सकती है.  जिसकी तवक़्क़ो भी हूकूमते हिन्द से करना फ़िज़ूल है.  
दिल्ली में जिस तरह से तीन रोज़ तक मुस्लिम नस्ल कूशी की गई मुस्लिम इबादतगाहों, मज़ारात, मदरसों, मुस्लिम तिजारत, मुस्लिम बस्तिओं को आतिशे नार किया गया और मुस्लिम अवाम की बड़े पैमाने पर हलाकत हुई. बोहोत से मुस्लिम अफ़राद को क़तल कर के नाले में दफ़न कर दिया.  लेकिन हूकूमते हिन्द के वज़ीरे दाख़ला और वज़ीरे अज़ाम को ये खबर तक नहीं हुई के मुस्लिम अवाम पर उनकी खुद की पुलिस हमलरेज़ हो रही है.   और हिन्दू दहशतगर्दों को हमला करने और बड़े पैमाने पर क़त्ले आम करने की तरग़ीब कर रही है.   ऐसी सूरत में जब ज़ाफ़रानी दहशत तमाम दिल्ली से मुस्लिम अवाम को उखाड़ फेखने के लिए और कमो बेश  तीन से चार महीनों तक दहशत मचाने के पूरे इक़दाम कर के आये थे तब पाकिस्तानी वज़ीरे आज़म ने इस सहाफी के अस.ओ.एस. पर फौरी अमल किया और एक मसीहा के जैसे मुस्लिम हलाकत को रोकने में कामयाब हुए.  

बोहोत मुमकिन है मोदी इंतेज़ामिया मुस्तक़बिल में उससे भी ज़्यादा खतरनाक हालात पेश कर सकती है.  क्योंकि मोदी मुसलमानों को पूरी तरह से ख़त्म करने का मंसूबा अपने हिन्दू दहशतगर्दों और ताजिरों के दरमियान साफ़ ज़ाहिर कर रहा हैं. जो ज़हर उसके दिलो दिमाग़ में भरा है उसकी नुमाइश वो अपने दहशतगर्दाना इजलास में खुल के कर रहा है.   और उसने ये बोल कर साफ़ कर दिया है की ये तो सिर्फ आग़ाज़ है तो अंजाम किया होगा तो इससे ज़ाहिर होता है ये दरिंदा आगे क्या करने वाला है. 
ऐसी सूरत में हूकूमते हिन्द बजाये आपका अस.ओ.अस. समात करने और उसपे आपको फौरी मदद फ़राहम करने के आपका मखौल उड़ाए तो कोई बईद नहीं.  लेकिन पाकिस्तान वज़ीरे अज़ाम इमरान ख़ान ना सिर्फ हिन्द के मुस्लिमानों के बारे में फिक्रमंद रहतें हैं बल्कि हूकूमते हिन्द की ज़ेरे दहशत कश्मीर के अवाम, अफ़ग़ानिस्तान यहाँ तक की नेपाल और तमाम पड़ोस में रहने वाले मुमालिकों के लिए उनकी हिकमते अमली क़ाबिले तारीफ़ है और पकिस्तान की हुदूत के नज़दीक रहने में मदद के वक़्त वो आपकी किफ़ालत एक हमसाये के जैसे कर सकतें हैं. 

ये सहाफी तो खुल के पाकिस्तान से मदद चाहेगा और मोहब्बत भी उसको हिंदुस्तान से नहीं बरक्स पाकिस्तान से ही है.  उसकी वजह है मोहब्बत एक तरफा नहीं होती है दोनों जानिब से जब इज़हार होता है उसी को असली मोहब्बत कहा जाता है.  बरक्स हिन्दुस्तान से मोहब्बत तो एक तरफ़ा है, सिर्फ हमारी जानिब से ही है, उनकी जानिब से तो कोई भी ऐसी सूरत नज़र नहीं आती के हमको यक़ीन हो जाए की हमसे उनको भी (हिन्दुस्तान) को भी मोहब्बत है. 
अगर इस सहाफी को कोई गद्दार तस्सव्वुर करता है तो शौक़ से करे हाँ में गद्दार हूँ लेकिन मेरी गद्दारी भी ईमानदारी वाली है. जो दिल में है वही ज़ुबान पर है.  ना के मुँह में राम और बगल में छूरी।   इस मुद्दे पर एक ट्वीट किया है.    

Zuber Ahmed Khan

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हा हा हा बडिया अभी तो टुकड़े टुकड़े काट काट कर आस पड़ोसी ही आपस मे बांट लेंगे. पाकिस्तान के हक मे भी आयेगा एक बड़ा सा हिस्सा. झटसंघिओं हम वो देख रहे हैं जो तुम ओर तुम्हारे आक़ा मोदी नही देख सकते. भगवा कसाई तो अपने आपको संत बोलता है फिर उस कसाई को भी चौनोती है छूरी, चाकू, तलवार छौड कर ज़रा अपने नूज़ूमइयाओं से पूछे की पाकिस्तान भारत का क्या क्या हासिल करेगा. हम पाकिस्तान के साथ हैं. गद्दारी भी हम ईमानदारी से करते हैं. झटसंघिओं की तरह नही मूह पर राम बगल मे छूरी. नाम देशभक्ति का ओर काम रावण (मोदी) भक्ती का.
अगर कोई जुम्मन मियां वतन परस्ती का दम  भरते हुए बोलेगा की जहाँ रहो उस जगह से मोहब्बत करो.  में उसको कहना चाहूंगा तो अभी तक क्या नफरत कर रहे थे मुसलमान।  १९४७ में जिनको अलहदा मुल्क चाहिए था वो सब चले गए और जो मोहब्बत वाले थे वो यही रहे.  लेकिन ये क्या जिन्होंने इस मुल्क हिंदुस्तान से मोहब्बत की उसके वजूद को क़याम रखने के लिए बड़ी बड़ी क़ुर्बानियां दी उनकी नस्लों को गद्दार बोला  गया.  दूसरी बात एक तरफ़ा मोहब्बत कभी भी फूल नहीं खिलाती है सदा तबाही और बर्बादी लाती है.  ख़्वाह वो किसी ख़ातून से की जाए या ज़मीन से; एक तरफ़ा मोहब्बत सदा ग़म और ज़ख्म ही देती है.  लेकिन जब दोनों जानिब से मोहब्बत का इक़रार होता है तब फूल खिलतें हैं और खुशियां बिखरती है.  रहा सवाल मुसलमानों का उनको तो इस मुल्क से ही बे दखल किया जा रहा है.  तो ऐसी सूरत में उनकी एक तरफा मोहब्बत का फ़लसफ़ भी फौत हो गया है क्योंकि दूसरी जानिब मुस्लिम नस्लों के लिए बेहद नफरत, आलूद और ज़हर ही बचा है. 
अभी तक एक तरफ मोहब्बत करते थे तो मार ख़ाते  थे हूजूमी दहशत के ज़ेरे साये हलाक होते थे.  खाकी दहशतगर्दों के हाथों शहीद होते थे. लेकिन अब मोहब्बत नहीं करेंगे बरक्स दिलों दिमाग में नफरत रखेंगे और तक़सीम की ना सिर्फ बात करेगें बल्कि ले कर रहेंगे तभी हालात सही और दुरूस्त होंगे. 

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