Wednesday, 4 March 2020

फसाद का एहम गुनहगार इस बार भी गुजरात ही रहा.

अज़ीज़ नाज़रीन,

क्या आप लोग जानतें हैं की दिल्ली फसाद की इब्तेदा या आग़ाज़ इस बार भी २००२ की तर्ज़ पर गुजरात से ही हुई थीजब अमेरिकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प गुजरात पहुंचे तो बरोज़ इतवार हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीम हिन्दू जागरण मच के दहशतगर्दों ने निहायत ही ज़हरीले और मुत्तसिब पैग़ामात के ज़रिये मुस्लिम अवाम के खिलाफ ज़हर अंगेशी की थीइस पैगाम को मज़ीद आगे की जानिब भेजने में बीजेपी के साबिक़ रकूने असेंबली पेश पेश रहे और उन्होंने भी ऐसे पैग़ामात को भेजने में फ़रोग़ दियापेशे खिदमत है बी.बी.सी. के हिंदी शुमार के सहाफी की एक रिपोर्ट.  

जैसा की आप तमाम हज़रात बा खूबी वाक़िफ़ होंगे की गुजरात हिन्दू दहशत की पनाह गाहा हो गया है और यहाँ पर हर १०-१२ किलोमीटर की दूरी पर एक दहशतगर्द अड्डा हैइन दहशतगर्दों को बड़े बड़े ताजिर मुकेशअम्बानी, नीता अम्बानी, अडानी, जैसे लोग खूब फ़रोग़ देतें हैं और कसीर इमदाद करतें हैं.
गुजरात से भेजा हुआ पैगाम आनंद जिले को अपनी आगोश में ले कर दिल्ली पंहुचाजहाँ पर बड़ी तादात में मुस्लिम हलाकत हुईसरकारी अदद शुमारी के हिसाब से अभी तक कुछ ५० अफ़राद के क़रीब जाहांबाक हुए है जबकि ग़ैर सरकारी अदद शुमारी के हिसाब से अभी तक कुछ १५० अफ़राद हलाक हो चुके हैं.
मज़े की बात ये रही की ज़हरीले पैग़ामत भेजे हिन्दू जाग्रति मंच के दहशतगर्दों ने जिसको फ़रोग़ दिया बीजेपी के सियासतदानों ने और उनको मज़ीद आगे की जानिब भेजा जिसकी ज़द में हर वो हिन्दू गया जो की मुत्तसिब ज़ेहनियत रखता है और मुसलमानों से अज़हद कीना और बुग्ज़ रखता हैंफिर इस दहशतगर्द हमले में हलाक हुए मुस्लिम उसपे ज़ुल्म इतना की जो भी गिरफ्तारियां हुई वो मुस्लिम अवाम की ही हुई हैंअभी तक एक भी हिन्दू दहशतगर्द इन हमलो में गिरफ्तार नहीं हुआ हैऔर ना ही उसके ऊपर किसी किस्म की ज़प्ती या नुकसान की वसूली का कोई नोटिस दिल्ली हुकूमत ने जारी किया है.  दिल्ली फसाद को हुए तक़रीबन १० दिन हो चुके हैं फिर भी पोशीदा हिकमत के साथ दफ़न की हुई लाशों के निकलने का सिलसिला बा दस्तूर जारी है.  ये वीडियो इस सहाफी को हलाक शुदा अफ़राद की पोशीदा हिकमत के साथ दफ़न की हुई लाशों को बहार निकालते हुए भेजी गई है.  वीडियो भेजने वाले का दावा है की उनको ज़िंदा दफ़न कर दिया गया था.  और उसने ख़ुफ़िया तरीक़े से वीडियो ली है. 
वीडियो सबूत हैं की दिल्ली पुलिस हमलावरों के साथ शाना बा शाना नज़र रही हैबजाये पत्थर फेकने वाले हिन्दू अवाम के ऊपर लाठी चार्ज करने की पुलिस तो उनकी हौसला अफ़ज़ाई करते हुए दिख रही हैये कैसा क़ानूनी निज़ाम हैं, जहाँ पुलिस, फौज खुद हमलावरों और दहशतगर्दों के साथ खड़ी हुई दिख रही है और उनका अख़लाक़ी मय्यार को बुलंद करने में इज़ाफ़त कर रही है.  

करना वायरस का जो हव्वा दिखाया जा रहा है वो भी फसाद की तपिश और अवामी और आलमी बरादरी को गाफिल करने की एक हिकमत है.  ठीक है करना वायरस होगा जान लेवा लेकिन भारत में उसका इतना असर नहीं है जितना की पेश किया जा रहा है.  उसके पीछे नियत और ज़ेहनियत यही ही की फिल वक़त दंगों की तपिश और मुस्लिम लाशों पर कोई मौत के सौदागर से सवाल जवाब तलब ना करे.   

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