Tuesday, 17 March 2020

मक्का बंद मदीना बंद.

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज का मज़मून सबक़ आमोज़ और मौजूदा हलाते हाजरा पर मुश्तमिल है. जैसा की आप तमाम हज़रात अब तक करोना वायरस और उसकी तबाही और बर्बादी से बा ख़ूबी वाक़िफ़ हो चुके होंगे.  इस वायरस की ज़द में जब तमाम आलम आ चूका है तो उसकी ज़द से काबा तुल्लाह और शेहरे मेहबूब मदीना कैसे अछूते रह जाते.  

मुसलमानों के दो अज़ीम शहर और पाकीज़ा जगह मक्का और मदीना पर भी पाबन्दी लगा दी गईअब यहाँ से मशीयते इलाही और हिकमत का इल्म होता हैकुछ लोग इसको अज़ाबे इलाही बता रहे हैं तो कुछ मुसलमानों की बदआमाली जिसके सबब उनको हुदूदे मक्का और मदीना से बहार रखा गयाये अज़ाब नहीं है हरगिज़ नहीं है और मुसलमानों के ऊपर तो ये हरगिज़ अज़ाब नहीं हैबल्कि ये हिकमते इलाही और मशीयते इलाही है जो की हर खासो आम को अपने हुदूत से दूर रखा.  

जिसकी तशरीह और हिकमत का बयान सही वक़्त पर किया जाएगापहले जंग की धुल साफ़ हो जाए और जो तबाही आने वाली है पूरी तरह जाए फिर जब सब कुछ ठंडा हो जाएगा तब मक्का और मदीना से हर खासों आम को क्यों दूर रखा गया गया वो बताया जाएगाकुछ हिन्दू दहशतगर्द और संघी मुवाफ़िक़ मज़ाक़ बना रहें हैं की जब अल्लाह सब कुछ जानता है हर चीज़ पर क़ादिर है तो मक्का क्यों खाली हुआजो लोग आज मज़ाक़ लगा रहें हैं मेरे को उनकी ज़हानत पर हसी रही है बाद में जब तमाम पोशीदा हिकमत आम होगी तो सारी दुनियां इन संघी, कट्टरपंथी और हिन्दू दहशतगर्दों का मज़ाक़ बनाएगीइनको अभी भी अल्लाह की हिकमत पर शुबा हो रहा हैलेकिन हम वो देख सकतें हैं जो ये संघी नहींइनकी अक़्ल सिर्फ एक जानवर के पेशाब और पैख़ाने तक महदूत हैऔर ये लोग तो नाबीना अकीदतमंद हैं जो एक ऐसे बेवक़ूफ़, जाहिल के पैरोकार है जो कहता है आज बादल है जाव तुम पाक पर हमला कर दो उनकी आर्मी तुमको नहीं देख पाएगीऔर हुआ क्या अपना एक फ़िज़ाई तय्यारा तबाह करवा लिया, एक पायलट को मौत की आगोश में भेज दिया और दुसरे को गिरफ्तार करवा दियाऔर ऐसे लोग अल्लाह की हिकमत और मशीयत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.  

ये जो मक्का और मदीना पर क़ैद लगाईं गई है वो सऊदी हुक्काम ने अपनी मर्ज़ी से नहीं लगाईं है बल्कि हुकूम इलाही के सबब लगाईं गई हैअब मक्का और मदीना में सिर्फ और सिर्फ चंद अफ़राद ही मौजूद हैं जिनकी तादात बमुशिकल १५ या २० होगीयहाँ तक की जो अफ़राद दीगर मुमालिकों के और हिन्दुस्तानी मुस्लिम सऊदी में रहतें हैं वो भी मस्जिदे हराम में दाख़िल नहीं हो सकते

ये तमाम हालात उस तबाही और बर्बादी से पहले की ख़ामोशी है जो ज़ालिमों के ऊपर आने वाली है.  और तबाही तो आएगी और सख़्त तबाही आएगी. वाज़े रहे मरने वालों की तादात हज़ारों में नहीं लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में होगी

ये जो बंदिश है वो किसी वाइरस की वजह से नहीं है और ना ही किसी ख़ौफ़ की वजह से है बल्कि हुकुम इलाही की वजह से है. अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है जब एक सच्चा मुसलमान हक़ वाला मुसलमान ज़हर के प्याले को पी जाता है और उसको ज़र्रा बराबर इज़ा नहीं होती क्योंकि उसका क़ामिल यक़ीन है की कोई भी शे या चीज़ अल्लाह की मर्ज़ी के बगैर इज़ा नहीं पंहुचा सकती तो ये करोना फरोना वाइरस किस खेत की मूली हैंकही से कही तक किसी भी मोमिन को ये वाइरस इज़ा नहीं पंहुचा सकता.

जो संघी आज अल्लाह की हिकमत का मज़ाक़ बना रहें हैं और एक वाइरस के ख़ौफ़ से मक्का बंद हुआ ऐसे मेसेज सोशल मिडिया पर पोस्ट कर रहें हैं उनको भी जवाब दिया जाएगाजिस तरह से हर संघी दहशतगर्दों को, शिद्दत पसंद काफ़िर, बीजेपी वालों को दिया जाता है वैसे ही इनकी इस हिमाक़त का जवाब भी माक़ूल वक़्त पर दिया जाएगा

जिस तरह से नीता अम्बानी ने दिसम्बर २०१९ में ना ज़ेबा ट्वीट्स किये थे उसका जवाब उसको जनवरी २०२० से मिलना शुरू हो गया था जब उसका देवर दिवालिया हुआ फिर फरवरी २०२० में जब इस सहाफी ने एक मज़मून अंग्रेजी में लिख कर शाया किया था उसके ठीक १०-१२ रोज़ के बाद खुद नीता को ये एहसास हो गया होगा की अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है और वो हर काम कर सकता है सून सकता हैवैसे तो हर संघी को माक़ूल जवाब देता रहता हूँ और हर वक़्त ये संघी ज़लील और रूसवा होतें हैं फिर भी मज़ीद पिटाई ख़ाने बहस में चले आते हैंऔर झूट फरेब की बुनयाद पर मुबाहिसा करतें हैंइनको मक्का में क्यों कोई नहीं है सिर्फ १५-२० अफ़राद ही क्यों है इस हिमाक़त का माक़ूल जवाब दिया जाएगा.  

जो आशिक़ हैं वो तो मक्का भी जा रहें हैं और शेहरे मेहबूब मदीना भी जा रहें हैं. इस ज़िम्न में इस सहाफी ने इश्क़े हक़ीक़ी पर बोहोत सी उर्दू नज़्म अपने उर्दू ब्लॉग में  http://zuberpakshayri.blogspot.com/ लिखीं हैंकई नज़्मों में साफ़ अलफ़ाज़ में क़ैद लगाने के ऊपर लिखा गया हैफिर जो आशिक़ हैं उन पर कैसी कैद ये कहा गया हैऔर वही हो रहा है जो सच्चे आशिक़ हैं जिनकी अदद शुमारी महज़ १५ या २० होगी या बोहोत ही हुई तो ५० के क़रीब होगी वो तो जा रहें हैं.

नाज़रीन बताने का मक़सद ये ही है जो सच्चे मुसलमान हैं और अल्लाह के ऊपर कामिल यक़ीन है उनको किसी भी हालात से रंजीदा होने की क़त्तई ज़रुरत नहीं हैतबाही तो आएगी और सख़्त तबाही आएगी लेकिन उनके लिए जो जालसाज़ होंगे, ज़ालिम होंगे, फरेबी, झूठे, ना इन्साफ, दोग़ले, दहशतगर्द, क़ातिल, ज़ानी, गुनाहगार, पत्थर परस्थ वो सब तबाह और बर्बाद होंगे

इस ज़िम्न में ये सहाफी अपने ०७ अगस्त २०१९ को लिखे मज़मून मेरा ख़्वाजा महान. में बोल चूका हैखबरदार कोई भी मुस्लिम आलिम, रूहानी ताक़त और वली हमारे फैसले को बदलने की कोशिश ना करे नहीं तो वो अज़ाबे इलाही का मुर्तकिब होगा.  ये जो मक्का बेन हैं वो भी उसी तबाही का एक मंज़र हैलेकिन इस बेन की हिकमत बाद में बयान की जायेगीसंघियों ये बेन किसी ख़ौफ़ की वजह से नहीं है बल्कि बा हुक्मे इलाही की वजह से ही है

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