Saturday, 16 November 2019

पाक सरज़मीन पे करतारपुर ज़ायरीनों का ख़ैरमक़दम

पाकिस्तान ने करतारपुर पहुंचे ज़ायरीनों का दिल जीता.  वैसे भी पाकिस्तानी अवाम और हुकूमत का इस्तक़बाल और मेहमान नवाज़ी दुनियां में मशहूर है.  अपने मज़हबी रेहनुमा बाबा नानक एक सूफी फ़क़ीर के दर पर आये सिख ज़ायरीनों को पाकिस्तान से मिली मोहब्बत और खुलूस से दिल बाग़ बाग़ हो गया.  हुकूमते पाकिस्तान ने बेहतरीन मिसाल पेश की और इन्तेज़ामात का भर पूर ख्याल रखा गया जिससे आने वाले ज़ायरीनों को किसी किस्म की दुशवारी और तकलीफ का सामना ना करना पड़े. बाबा नानक का पैग़ाम भी मोहब्बत और वहदानियत का ही था और पाकिस्तान का भी सिर्फ मोहब्बत और वहदानियत पर ही मबनी  है.  पाकिस्तानी और पाकिस्तान हस्बे रिवायत हर मेहमान की खातिर में कोई कमी नहीं करतें हैं.

करतारपुर आने वाले तमाम ज़ायरीनों का पाकिस्तानी अवाम और अला ओहदेदारों ने गर्मजोशी के साथ इस्तक़बाल किया.  इससे क़ब्ल इस गलियारे की इफ्तेताह पर पाकिस्तानी वज़ीरे आज़म जनाब इमरान खान ने ज़ायरीनों के एक जलसे से ख़िताब किया.  इस मौके पर उन्होंने कश्मीरी अवाम की सख़्त तकलीफ, बदहाली  और परेशानी का भी ज़िक्र किया.  कश्मीर आज कल हिन्दुस्तानी हुक्काम की बर्बरियत और तशद्दुत से दो चार है.  

इस मौक़े पर हिन्द से आये पंजाब के साबिक़ वज़ीर और रकूने पार्लीमान नवजोत सिंह सिद्दू ने अपने अंदाज़ में अवाम और ज़ायरीनों को लुत्फ़ अन्दोज़ किया.  हस्बे मामूल उनकी तक़रीर शेरो शायरी से शुरू हुई जिसमे उन्होंने बाबा नानक की ज़िन्दगी के पहलू पर रौशिनी डाली.  इस मौक़े पर उन्होंने अपने क्रिकेटर ज़िन्दगी के दोस्त और आज के दौर के पाकिस्तानी वज़ीरे आज़म इमरान खान की शान में कसीदे करना नहीं भूले उन्होंने अपनी तक़रीर का इखतताम अमन, सुकून और खित्ते की फलाह के लिए दुआ से किया.   
चाहे उनके दर पे भारत से आये उनके हिन्दू दुश्मन ही क्यों ना हों लेकिन उनकी मेहमान नवाज़ी में ज़र्रा भर कमी नहीं होती है.    पाकिस्तान का पडोसी मुल्क हिंदुस्तान सिर्फ और सिर्फ कहावतों पे यक़ीन रखता है "अतिथि देवो भवा"  मतलब मेहमान भगवान होता है.  लेकिन उसका असली हक़ पाकिस्तान अदा करता है.  वैसे भी इस्लाम में मेहमान की बोहोत अज़मत और कीमत है.  जिसका ज़िक्र हदीसों में मिलता है.  इब्राहीम अलैहे असलम की सुन्नत भी है मेहमान नवाज़ी जिसको पाकिस्तानी और पाकिस्तान पूरी तरह से निभातें हैं.    हिंदुस्तान में अतिथि सत्कार सिर्फ अब ये बातें कहावत तक ही महदूत रह गई हैं. और हिन्दुस्तानियों की मेहमान नवाज़ी का अमल ख़ास अगर वो मस्तूरात है तो उसके जिस्म को नोचने और उसकी इज़्ज़त को अपने जिस्मानी गर्मी निकालने तक ही रह गया है.   ऐसे कई मामले पुलिस आफ आई आर में दर्ज हो चुके हैं जहाँ बेरुन मुल्क से आई मस्तूरातों को भारत में मजमूई अस्मत दरी या ज़िना बिल ज़ब्र का शिकार होना पड़ा.  ब्रिटैन, अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस, जेर्मनी की मस्तूरातों के ऊपर ज़िना बिल जब्र और मजमूई अस्मतदरी का शिकार हुई.  और चीन, सिक्किम, नागालैंड के अवाम के ऊपर शिद्दत का मुज़ाहेरा हुआ, और उनको शदीद ज़ख़्मी कर दिया गया.    ख़ैर अभी बात पाक की हो रही है तो पाक बात ही करेगें भारत जैसे शैतान की बात कर के मज़मून का लुत्फ़ ख़त्म नहीं करना है. 

अपने मारूफ मज़हबी रहनुमा को ख़िराजे अक़ीदत पेश कर और उनके तबर्रुकात देख कर सिख ज़ायरीनों को जो सुकून मिला है वो किसी से भी पोशीदा नहीं है.  पकिस्तान हुकूमत ने तक़रीबन आज १००० साल से ज़ाइद वो तमाम चीज़े मेहफ़ूज़ कर के रखी थी और उनको नानक दिन के ऊपर तमाम ज़ायरीनों के लिए ख़ास और आम कर के उनकी ज़्यारत करवाई.  तमाम ज़ायरीन ये सब देख कर बोहोत ही इत्मीनान और इबादत का लम्हा महसूस कर रहे थे.  करतारपुर कॉरिडोर की इफ्तेताह का तमाम क्रेडिट इमरान खान और सिद्धू पा जी को जाता है.  इस मौक़े पे पाकिस्तान का इंतज़ाम और हुकूमते पाकिस्तान की जानिब से ज़ायरीनों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई और इतना ख़ास इंतज़ाम देख कर बोहोत से ज़ायरीन ख़ास मस्तूरात आबदीदा हो गई.  वतन वापसी पे ज़्यादा तर ज़ायरीन दुखी दिखे और इस कारे खैर के लिए इमरान खान की हुकूमत को दुआ देने से नहीं चुके.  

इस पाकीज़ा मौक़े पे सिर्फ भारत से आये ज़ायरीन ही नहीं बेरुन मुल्क ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से आये ज़ायरीन भी बोहोत ही पुर जोश खुशकुन दिखे.  इस मौक़े पे एक बेरुन मुल्क ने अपना तजुर्बा कैमरे में क़ैद कर के सोशल मीडिया पे वायरल किया. पेशे ख़िदमत है एक रिपोर्ट.
दो मुल्क पाकिस्तान और हिंदुस्तान दो मज़हबी नज़ारियात इस्लाम और हिंदुत्व अब इन दोनों में फ़र्क़ देख लेते हैं.  एक तरफ पाकिस्तान भलें ही इस्लामिक रियासत बन गया है लेकिन उस पाक सरज़मीन पर हर शहरी को अपने मज़हब को इख़्तेयार करने उसकी मश्क़ करने की पूरी आज़ादी है.  और ये आज़ादी इस्लामिक फलसफे की बुनयाद पर है, क्योंकि इस्लाम किसी भी इंसान के साथ उसके मज़हब की वजह से कोई भी भेद भाव नहीं सिखाता जब तक की उस मज़हब के अवाम से मुसलमान की जंग ना हो जाए.  ऐसी हालत में भी सिर्फ उन्ही लोगों से जंग करने की इजाज़त है जो मुस्लिम और इस्लाम के दुश्मन हैं.  दिगर अवाम (हिन्दू) अगर भाईचारे और अमन का पैग़ाम देतें हैं तो जंग जैसे हालात में भी उनके साथ हुस्ने सुलूक करने का हुकुम है.  

वहीँ दूसरी जानिब हिन्दुस्तान अभी तक दुनयावी (सेक्युलर) दस्तूर की ताईद करता है लेकिन बेरुन मुल्क के ज़ायरीनों को तो छोड़ दो खुद भारत में रहने वाले अकलियतों को अपने मज़हब की मश्क़ करने, मज़हबी बात करने, अपने मज़हबी क़वानीन को मानने की इजाज़त नहीं है.  जब सेक्युलर दस्तूर के होते हुए भारत के ये हाल हैं तो जब भारत हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा तो क्या हाल होगा, जब भारत में यकसां कानून नफीस होगा तब क्या होगा, शायद तब किसी भी अक़लियत ख़ास मुसलमान को हिंदुस्तान में ज़िंदा नहीं रहने दिया जाएगा.  पुलवामा के बाद और उससे क़ब्ल भी ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के दर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले ज़ायरीनों के ऊपर रोक लगा दी गई थी. 

दूसरी बात जहाँ पाकिस्तान ने करतारपुर गुरुदावरे के लिए हज़ारों एकड़ ज़मीन सिख अवाम को दे दी वही भारत में मुसलमानों की मस्जिद की ज़मीन हिन्दू दहशतगर्द गसप कर गए.  वो भी सुप्रीम अदलिया की देख रेख और हुकूमत, इंतेज़ामिया के ज़ेरे क़यादत डाकाज़नी कर के शिद्दत और तलवार के ज़ोर पे ये ज़मीन लूट ली गई.   

ये ही वजह है में अपने आपको हिन्दुस्तानी, भारतीय या इंडियन तस्सव्वुर नहीं करता हूँ.  बल्कि मेने अपनी क़ौमी पहचान मुस्लिम रखी है और मज़हब इस्लाम.  में ज़्यादातर हुकूमत के क़ानून मानने से क़ासिर हूँ और अगर हुकूमते हिन्द अपने गैज़ेट में इस बात को दाखिल करती है की क़ौमी पहचान की जगह पर अपने मज़हबी एतेक़ाद को लिख सकते हो तो सबसे पहले में उसमे में अपने आपको दाखिल कर के अपनी क़ौमी पहचान तब्दील करूंगा और भारतीय से मुस्लिम कर लूँगा.

पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर की इफ्तेताह पर ये थी सहाफी जुबेर की खुसूसी रिपोर्ट.

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