Thursday, 21 December 2017

हिन्दू स्टेट में प्रताड़ित कर के हत्याओं की सख्या बड़ी


हिन्दू स्टेट के आतंकिओ दोवारा प्रताड़ित कर के हत्या करने की घटनाओ में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है. आश्चर्य की बात है इन सभी हत्याओं में ९०% मुस्लिम समाज के लोगो की सख्या है.

ये खुलासा हिन्दू सभा (संसद) से ली गई जानकारी के आधार पे हुई है. एक सवाल के उत्तर पे हिन्दू स्टेट के लेफ्टनंट कमांडेंट ने जो आकड़े दिए वो चौकाने वाले है.  इन आकड़ो के हिसाब से साल २०१४, २०१५, २०१६ हिन्दू स्टेट के एक हिस्से उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा आतंकी हमले हुए और वो पहले नंबर पे रहा.  उत्तर प्रदेश में वर्ष २०१४ में हिन्दू आतंकी हमलो की १३३ घटनाएं हुई. इसमें २६ लोगो को बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया. कभी जिन्दा जला के, कभी हाथ पाँव काट के, कभी गर्दन धड़ से अलग कर के.   जबकि साल २०१५ में इस तरह के आतंकी हमलो में इज़ाफ़ा हुआ जिसकी संख्या १५५ हो गई हालांकि इस बार प्रताड़ित कर के हत्याओं में मामूली गिरावट आई जो २२ रही.    सबसे ज़्यादा भयावह रहा साल २०१६ जिसमे १६२ हिन्दू आतंकी हमलो की घटनाएं हुई, जिसमें २९ व्यक्तिओ को मौत के घाट उतारा गया.

इससे ज़्यादा भयावह ज़ुल्म और प्रताड़ित कर के हत्याओं का अकड़ा समूचे हिन्दू स्टेट का है.  इसके अनुसार हिन्दू स्टेट में साल २०१४  में आतंकी घटनाओं की कुल संख्या ६६४ रही, जिसमें कुल ९५ लोगो को मौत के घाट उतारा गया. जबकि साल २०१५ में आतंकी हमलो में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ और ये अकड़ा सात सो के पार पंहुचा और कुल ७५१ आतंकी हमले किये गए जिसमें ९७ लोगो को मौत के घाट उतारा गया.  इसी हिसाब से साल २०१६ में कुल ७०३ हमले हुए जिसमें ९६ लोगो को अपनी बलि हिन्दू आतंकिओ को देनी पड़ी.

इस तरह के आतंकी हमले और बढ़ जाते है जब आतंकी झूटी बातो पे फरेब फैलाते है और हिन्दू धर्म खतरे में है कह के मुस्लिम समाज के खिलाफ ज़हर उगलते है जिससे एक सामान्य हिन्दू का भी मन विचिलित होता है और इसी बात का फ़ायदा आतंकी उठा के मुस्लिम समाज को उस जुर्म की बर्बर, दिल दहला देने वाली सजा देते है जो उन्होंने किया ही नहीं. और हर बार की तरह हिन्दू स्टेट के आतंकी अपने किये हुए गुनाह पे रूसवा और ज़लील होते है जिसका ये पत्रकार अपने कई लेखो में बखान कर चूका है.  हाल ही में फेसबुक पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक आदमी २ लड़कों के साथ एक लंगूर को तड़पा-तड़पा कर मार रहा है. ये घटना १६ दिसंबर २०१७ की थी.  वीडियो में जो शख्स उस लंगूर पत्रकार को पीट रहा है वो टोपी में देखा जा सकता है.  
 
फिर क्या था खुद को हिन्दू समझने वाले एक झुण्ड ने इस पूरे प्रकरण को साम्प्रदाइक रंग और भुनाने की कवायत शुरू कर दी. ये वही झुण्ड था, जो हाल ही में फेसबुक पर खूब चल रहे एक वीडियो में इंडिया गेट के सामने खड़ा मुसलमानों को घटिया तरीके से संबोधित कर रहा था. हिंदुत्व का अघोषित ‘संरक्षक और ताज नगर की विवादित इमारत से भगाया गया भगवा गमछाधारी लफंगा दीपक शर्मा तुरंत हरकत में आया. उसने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी. इस पोस्ट में दीपक शर्मा कहता है “इसे कहते हैं इस्लाम की नफ़रत. जब हिन्दुओं की आस्था वाले जीव से इतनी नफरत है तो हिन्दुओं से कितनी नफ़रत होगी.”  अभी पुलिस की तफ्तीश पूरी भी नहीं हुई और न ही किसी शख्स की गिरफ्तारी लेकिन इन धर्म के ठेकेदारों ने लंगूर को पीटने वाले को इस्लाम और टोपी पहनने वाले को मुस्लिम करार दे दिया. 

वो तो भला हो महाराष्ट्र पुलिस का जो बात आगे बढ़ती और इस हिन्दू आतंकी शर्मा के कुकर्म, झूट, फरेब में आम हिन्दू फसता और उसकी आड़ में आतंकी अपना हमला कर डालते तुरत पुलिस हरकत में आई और वीडियो की बेसिस पे तीन लोगो को गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महाराष्ट्र के वासिम जिले से २३ साल के पवन बांगर, १६ साल के अतुल राठोड और एक अन्य नाबालिग को वन्य प्राणी संरक्षण एक्ट के तहत अरेस्ट कर लिया गया है.
इतना ही नहीं आतंकी घटनाओ को अंजाम देने वाले को सराहा जाता है. जिस आतंकी ने दादरी में अख़लाक़ के ऊपर आतंकी हमला कर के शहीद कर दिया था उस आतंकी के मरने के बाद उसको भारत देश के तिरंगे में लपेटा गया. ये तो देश के तिरंगे का अपमान है उसको हिन्दू स्टेट के भगवा झंडे में लपेटना था.  दूसरी घटना अभी हाल ही में राजसमुंद राजिस्थान की है जहा हिन्दू आतंकी 'लोन वुल्फ' ने एक मुस्लिम मज़दूर को शहीद कर दिया. उसके इस कायरता पूर्ण कर्त को भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी और आज़ादी के सिपाही से तुलना की गई. जबकि उसके इस आतंकी कृत की तुलना गोडसे, राजगुरु या सुखदेव से करनी चाहिए थी. ये तो भगत सिंह का अपमान है उसके साथ साथ सिख भाईओ का भी अपमान है मतलब हिन्दू आतंकी सिख भाईओ के हर काम को आतंक की नज़र से देखते है.

इन सभी बढ़ती हुई आतंकी घटनाओ के लिए हिन्दू स्टेट के लेफ्टिनेंट कर्नल्स और आतंकिओ के हामी धर्म गुरू ज़िम्मेदार है जो सदैव आग में घी डालने का काम करते है.  दादरी में आतंकी हमले के पहले मंदिर के माइक से पुजारी ने झूटी और ज़हरीला बयान जारी किया था उसके बाद भीड़ आक्रोशित हो गई जिसका फ़ायदा आतंकिओ ने उठाया और अख़लाक़ को शहीद किया गया.  अभी हाल ही में जैनी मुनि तरूण सागर ने मुसलमानो के खिलाफ भड़काऊ बयान बाज़ी की उसके दो दिन बाद राजिस्थान में हिन्दू आतंकिओ ने न्याय के मंदिर को ही अपने क़ब्ज़े में ले लिया और जहा तक समाचार मिले है न्यायाधीशो को भी सुबह से शाम तक बंधक बना के रखा. लेकिन ऐसी खबरों को ब्लेक आउट कर दिया जाता है और पब्लिक डोमेन में आने ही नहीं दिया जाता. अगर आ गई तो फजीती हिन्दू स्टेट के आका की होगी.  इससे एक बात और साबित होती है हिन्दू स्टेट में प्रेस के फ्रीडम पे भी अंकुश रखा जाता है. वही खबरे पब्लिक डोमेन में आने दी जाती है जो लंगूर पत्रकारों को पहले से ही आका महोदय प्रसारित करने की मंजूरी दे चुके होते हैं. और जो खबर आका या हिन्दू स्टेट के आतंकिओ की साख को धूमिल करती हो उसको ब्लेक आउट कर दिया जाता है. फिर भी अगर किसी पत्रकार जो लंगूरो में से नहीं है या मीडिया हाउस ने जुर्रत की आका की शान में गुस्ताखी करने की तो उस चेंनल या मिडिया हाउस को ही ब्लेक आउट कर दिया जाता है.

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