हिन्दू स्टेट के आतंकिओ ने २०१४ के युद्ध के बाद भारत के तक़रीबन आधे से ज़्यादा हिस्से पे ज़बरदस्ती फरेब और हेरा फेरी कर के कब्ज़ा कर लिया है. हिन्दू आतंकिओ के ज़ुल्म का शिकार समाज का हर वर्ग हो रहा है. मुस्लिम, क्रिस्टी, दलित और यहाँ तक के खुद हिन्दू समाज भी इन आतंकिओ के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष ज़ुल्म का शिकार हो रहा है. ये आतंकी अपने आप को हिन्दू हितो के रक्षक के रूप में पेश करते
है जबकि असलियत तो ये है ये खुद हिन्दू हितो की अनदेखी कर रहे है. सच्ची बात तो ये है के ये लोग हिन्दू हितो के नहीं
बल्कि अपने संघटन से जुड़े हुए लोगो के हितो के रक्षक है. ये लोग भारत के वफादार नहीं बल्कि हिन्दू स्टेट
के वफादार है
आज ये आतंकवादी हर मोर्चे पे बे नकाब हो रहे है बे मतलब
का विवाद पैदा करना इन आतंकवादीओ की आदत बन गई है. लव जिहाद के नाम पे झूट और फरेब
फैलाना हत्या करना चीख पुकार करना फिर खुद बीजपी और संघ के ६०% से ज़्यादा कारकून और
बड़े नेता हिन्दू महिलाओ पे बलात्कार की घटनाओ में शामिल है. यहाँ तक के खुद मोदी और अमित शाह ने गुजरात में
एक हिन्दू लड़की की जासूसी करवाई थी ये बात किसी से भी छुपी हुई नहीं है. इन आतंकवादीओ का बेमतलब का विवाद और बोहोत ज़्यादा
हूँ हल्ला करना ही इस बात का प्रमाण है के ये लोग अपने कुकर्मो को छुपाने के लिए दूसरो
के ऊपर बेबुन्याद लांछन और आरोप लगाते है ताके किसी भी व्यक्ति को उनके कुकर्मो की
जानकारी से दूर रखा जाए. और जनता को धर्म की आड़ में इस तरह से गुमराह किया जाए के उनके
काले कारनामो पे किसी भी प्रकार की बहस की गुंजाइश ही न रहे.
गौ हत्या बंदी कानून के ऊपर गौ आतंकिओ ने अभी तक अनगिनत
मासूमो की जान ले ली जबकि गौ हत्या में सबसे ज़्यादा हिन्दू आतंकी ही शामिल है. खुद
हिन्दू स्टेट का गौ मॉस का व्यापार २०१४ के बाद ९०% बढ़ गया और हिन्दू स्टेट गौ मॉस
के निर्यात में ब्राज़ील को पछाड़ के पहले नंबर पे जा पंहुचा. ये बात किसी से भी छुपी
हुई नहीं है जितने भी बड़े क़त्ल खाने है वो जैन और मारवाड़ी समाज के है. उत्तर प्रदेश
का एक विधायक जो मुज़्ज़फ़्फ़रनगर आतंकी हमलो का सूत्रधार है और जिसने विवादित इमारत के
ऊपर बेहूदा बयान दिया था वो खुद गौ मॉस के व्यापार में शामिल है और उसका क़त्ल खाना
है.
फिर गोवा में तो हिन्दू हितो की रक्षको की ही सरकार
है फिर वहा पे किस हिसाब से गौ वध चालू है.
यहाँ पे भी ये बात सिद्ध होती है के अपने कुकर्म छुपाने के लिए गरीब और निर्दोष
जनता को ये गौ आतंकी क़त्ल करते है चीख पुकार मचाते है हूँ हल्ला करते है ताके आम नागरिक
से ये आतंकवादी अपने कुकर्मो छुपा सके की हिन्दू समाज खुद गौ वध में शामिल है.
हिन्दू स्टेट के आतंकी देश द्रोही गतिविधिओ में शामिल
है. धुरूव सक्सेना नाम का जो आतंकी और उसके
साथ १५ बीजेपी और संघ के आतंकी पकडे गए वो सभी देश विरोधी गतिविधिओ में शामिल थे. सेना की महत्वपूर्ण जानकारी पाकिस्तान को मोहिय्या
करते थे. लेकिन जब कभी भी देश भक्ति की बात आएगी ये लोग लाइन में सबसे पहले मिलेंगे.
और दिखावा ऐसा करेंगे जैसा इन से बड़ा देश भक्त कोई दूसरा है ही नहीं. दूसरो से देश भक्ति का प्रमाण पत्र मांगना विवादित
साम्प्रदाइक गाने को गाने के लिए ज़ोरदार मुहीम चलाना और जो नहीं गाये वो देश भक्त नहीं.
और हर भारतीय नागरिक को सच्ची और कड़वी बात कहने पे देश द्रोही कहना पाकिस्तान को कोसना
हूँ हल्ला करना ही इस बात का सबूत है के असल में ये लोग ही देश द्रोही है तभी तो ये
लोग देश भक्ति के ऊपर इतना बवाल कर रहे है.
सच्चे देश भक्त को दिखावे की ज़रुरत ही नहीं उसके कर्म ही उसकी देश भक्ति का
प्रमाण है. जो दिखावा करता है छलावा करता है चीख पुकार मचाता है मतलब वो ही झूठा है
फरेबी है पाखंडी है
ये लोग आतंक मचाने में और सत्ता से चिपके रहने में यकीन
रखते है. क्या उत्तराखंड, हिमाचल और बिहार की बहुमत वाली सरकार को गिरा के कैसे काबिज़
हुए समूची जनता को मालूम है. गन्दी और गलीज़ राजनीति की शुरुआत बीजेपी ने की है.
साम्प्रदाइक ध्रूवीकरण की राजनीति भाजपा ने की, जाती धर्म के आधार की राजनीति भाजपा
ने की. ये पत्रकार कांग्रेस का स्पोक पर्सन नहीं है और इसको सच्ची बात कहने में कोई
गुरेज़ नहीं. ये पत्रकार २०१० में लेखन फिल्ड
में आया था उस समय कांग्रेस भी सत्ता के नशे में चूर हो कर ऊट पटांग निर्णय लेती थी
फिर इस पत्रकार के लेखन की वजह से क्या हालत हुई केंद्र और महाराष्ट्र दोनों जगह से
गई. जब मोदी ने वाराणसी में प्रधान मंत्री की शपत विधि से पहले पब्लिक मीटिंग की थी
उसके बाद इस पत्रकार ने उनको कुछ नसीहते दी थी. जिसके ऊपर उन्होंने अगली जनरल सभा में
इस पत्रकार का मखौल उड़ाया और कहा हर पत्रकार के सवालो का उत्तर पहले वाली सरकार देती
थी हम किसी के भी सवाल का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है. जिसको ज़रुरत है भारत सरकार
की वेब साइट पे जाए और अपने सवालो का उत्तर खोज ले. मोदी जी को सम्पूर्ण बहुमत का अहंकार
था. फिर उनको ये नहीं मालूम था के खरीदे हुए पत्रकार और विज्ञापनों से लादी हुई सरकार
कभी भी कामयाब नहीं होती. सरकार वही कामयाब होती है जो कटाक्ष और सच्ची बात
कहने वाले पत्रकारों की सूने और अगर कुछ कमी हे तो उसको दूर करे ताके जनता का विशवास
उस सरकार में बना रहे. चापलूसी करने वाले हाँ
में हाँ मिलाने वाले लंगूर पत्रकार तो बोहोत मिलेंगे जिसको पैसा दोगे वही
आगे आगे दुम हिलायेगा. कड़वी बात वही करेगा जिसको आपसे कोई लालच नहीं होगा और जो जनता
की भलाई चाहता होगा.
हर उस मुद्दे पे इन आतंकिओ और उसके आका की निति भेदभावपूर्ण रही जो मुस्लिम समाज से जुड़ा होता है. २०१४ के बाद से न जाने कितने मुस्लिम नौजवान हिन्दू आतंकिओ के हमले में शहीद हो गए. कभी गौ हत्या के नाम पे कभी लव जिहाद के नाम पे कभी बच्चा चोरी करने के नाम पे कभी गौ मॉस खाते हो कभी मुसलमान हो कभी देश भक्त नहीं हो. हिन्दू आतंकी तो मुस्लिम नौजवानो को शहीद कर ही रहे है यहाँ तक के पुलिस भी इस कुकर्म और हत्या से अछूती नहीं है राजिस्थान, मध्यप्रदेश हरयाणा में मुस्लिम नौ जवानो
को गोली मार के योजनाबद्ध तरीके से कुछ भी इलज़ाम लगा के शहीद कर रही है. इन सभी हमलो पे कभी भी आतंकिओ के आका की आखे भर के नहीं आई. लेकिन केरल में सिर्फ दो आतंकवादीओ की हत्या होती है तो समूचा कैबिनेट आँसू बहाने लगता है. जेटली जैसा कद्दावर नेता केरल पहुंच जाता है. वेस्ट बंगाल में एक हिन्दू; मुस्लिम मज़हब के खिलाफ कुछ पोस्ट फेस बुक पे अपलोड करता है जिसकी वजह से दंगा हो जाता है उसकी रिपोर्ट लेने एक तीन मेंबर की कमेटी मीनाक्षी लेखी, सत्यपाल समेत बंगाल पहुंच जाती है.
कश्मीर मुद्दे पे भी इन आतंकिओ की निति भेदभाव पूर्ण
रही जिसमे हर दुसरे रोज़ एक दो एक दो कश्मीरी नागरिक शहीद किये जा रहे है और आतंकिओ
की सेना इनको पत्थरबाज या आतंकी कह के शहीद कर रही है. अगर पत्थरबाज़ी ही किसी की शहादत का पैमाना है तो
हिन्दू स्टेट के कब्ज़ा किये हुए हिस्से उत्तर प्रदेश, हरयाणा, गुजरात, राजिस्थान और
मध्य परदेश में तो पुलिस के साथ कई बार हिन्दू जनता ने पत्थर बाज़ी की उनके ऊपर गोलीअ
काहे को नहीं चली. कश्मीर में आतंक के नाम
पे सारे गुनाह माफ़. खून करो और बोल दो आतंकी था, रेप करो और बोल दो आतंकी सपोर्टर थी.
हिन्दू स्टेट के आतंकिओ और देश द्रोहिओ के खिलाफ विद्रोह करना कोई गुनाह नहीं है फिर
भारतीय साम्प्रदाइक, आतंकी सहानुभूति रखने वाली सेना से चूक नहीं ब्लकि जान बूझ के
गोली मारी जाती है. मुझे तो मेहबूबा मुफ़्ती पे तरस आता है इतना सब हो जाने के बाद भी
वो भारत की सेना और सविधान की गुणगान करती है. राजिस्थान में वसुंधरा राजे और हरयाणा
में कट्टर हर तरह के हिन्दू आतंकवाद में शामिल है मुस्लिम समाज के नौजवानो को हिन्दू
आतंकी मार रहे है और कभी खाकी आतंकी (पुलिस) फिर भी एक्शन लेने में असमर्थ है. और दिखावे
के लिए बड़ी बड़ी बाते के हम सविधान के रक्षक है भारत की अस्मिता के कुछ भी करने को तैयार
है. देश के लिए मर मिटने को तैयार. असल में ये लोग देश के लिए नहीं बल्कि हिन्दू राष्ट्र
को बढ़ावा देने के लिए मर मिटने को तैयार है. ऐसा ही मेहबूबा कहे को नहीं करती अंदर
ही अंदर कहे को हुर्रियत और आज़ादी के सिपाहीओं से मिलती है और भारतीय सेना को कश्मीर
से निकालने के लिए काहे को कार्य नहीं करती. जैसा वसुंधरा राजे, मोदी अमित, कट्टर,
रमन, शिवराज सभी हिन्दू आतंकिओ से मिले है और इस्लाम और मुसलमानो को इज़ा पहुँचाने के
हर संभव प्रयास करते है उसी तरह से मेहबूबा
को भी मिल जाना चाहिए हुर्रियत से और आज़ादी के सिपाहीओं से और दिखावा ऐसा करना चाहिए
के वो बड़ी देश भक्त है जैसा के आम तोर पे हिन्दू आतंकी करते है भारत के लिए जान देने
की बात तो करेंगे लेकिन काम भारत को बर्बाद करने के और हिन्दू राष्ट्र को आबाद करने
के करेंगे. होने दो गृह युद्ध उसकी शुरुआत भी हिन्दू आतंकिओ ने ही की है. और उसके लिए
भी वही ज़िम्मेदार होंगे. अगर भारत की सेना इन्साफ नहीं कर सकती बेगुनाहो को मार के
बहादुरी समझ रही है तो तुम मिल जाओ आज़ादी के सिपाहीओं से फिर देखो ये साम्प्रदाइक सेना
कैसे अपनी मन मानी करती है.
लंगूर पत्रकार, राजनेता
और खाकी आतंकी (पुलिस) कश्मीर में छूट पुट पत्थरबाज़ी की घटनाओ को बड़ा चढ़ा के कवरेज
देती है और कश्मीर के अवाम को बदनाम किया जाता है जो अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे है. लेकिन हिन्दू आतंकवादी किस आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे
है. केंद्र में उनके आतंकवादी काबिज़ है जहा ये आतंकवादी पुलिस से मुठभेड़ करते है वहा
उन्ही का कब्ज़ा है फिर भी लंगूर पत्रकार हिन्दू आतंकिओ के हमले और लोकल पत्थरबाज़ी
की घटनाओ पे मौन धारण किये हुए है. कश्मीर के अवाम के पास एक बोहोत ठोस वजह है गुस्से
की क्योके वहा जेनरल डाइर की सेना हर दुसरे रोज़ झलियावाला बाग का हत्याकांड करती है
बर्बरता, आतंक फैलाती है. हर दुसरे रोज़ लोकल कश्मीरी नौजवान को गोली मार के उसको आतंकी
घोषित किया जाता है. फिर कश्मीर की अवाम भारत से आज़ादी चाहती है और पाक के साथ जाना
चाहती है.
आज हमें विद्रोह की ज़रुरत है भारत के खिलाफ नहीं बल्कि हिन्दू स्टेट के खिलाफ और आतंकवादीओ के खिलाफ. हमें हमारे सविधान की रक्षा करना है और हर उस इंसान से लड़ाई लड़ना है जो शपत तो भारत के सविधान की लेता है और गुलामी आतंकवादीओ की करता है. पुलिस असहाय और असमर्थ जान पड़ती है आतंकवादीओ के खिलाफ कोई भी एक्शन लेने में जबकि मुस्लिम, दलितो को गोली मारना पुलिस का एक पेशा बन गया है.
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