गुजरात के बाद अब राजिस्थान हिन्दू आतंक की नई पनाह गाह
होता जा रहा है. वैसे तो ये पत्रकार हर फोरम और डेबिट में हिन्दू स्टेट के आतंकी ट्रेनिंग
केम्प होने के सबूत पेश करता रहा है उसमे राजिस्थान का भी नाम है. लेकिन ये आतंकी अब
खुल के युद्ध के लिए ललकारेंगे और पुलिस, न्यायालय को भी अपने कब्ज़े में कर लेंगे ये
किसी ने नहीं सोचा होगा.
जी हां ऐसा ही हुआ है पिछले सप्ताह एक हिन्दू आतंकी ने
एक बेगुनाह मुसलमान मज़दूर की आतंकी हमले में जान ले ली थी. उस आतंकी ने बर्बर आतंकी
हमले का समूचा विडिओ बना के फेसबुक पे वायरल किया था. हमला करने के बाद इस हिन्दू आतंकी ने अधमरे तड़पते
हुए ५० साल के मुस्लिम युवक के ऊपर पेट्रोल डाल के उसको जिन्दा जला दिया था.
आतंकी हमले
के कुछ दिनों बाद पुलिस ने इस आतंकी को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन इसको गिरफ्तार करना था के उसके संघटन के आतंकिओ
ने पुलिस बल पे सशत्र हमला बोल दिया जिसमे कुछ ८ से १० पुलिस कर्मी घायल हो गए. पुलिस आतंकिओ को पकड़ पाती उससे पहले हिन्दू संगबाज़
उन आतंकिओ के लिए ढाल बन गए और पुलिस पे ज़बरदस्त पत्थरबाज़ी की गई. एक तरफ पत्थरबाज थे और दूसरी तरफ आतंकिओ की गोलिआ.
आखिर कार पुलिस को अपने पाँव पीछे खींचने पड़े और आतंकी भागने में कामयाब हो गए. इन
आतंकिओ को भगाने में लोकल पत्थरबाजो का हाथ है जो शंभू नामक आतंकी के बचाव में आये
थे जो पुलिस की गिरफ्त में है.
आतंकिओ से
घिरे पुलिस कर्मी
फिर जब हिन्दू
आतंकी संघटन के आतंकिओ को पता पड़ा के शंभू नामक आतंकवादी को न्यायलय में पेश किया जाएगा
तो शुक्रवार १५/१२/२०१७ को आतंकवादीओ ने न्यायलय को अपने कब्ज़े में ले लिया और न्यायलय
के गेट के ऊपर चढ़ के किया ज़बरदस्त तांडव. कोर्ट से तिरंगा झंडा उतार के फेंक उसको जला
दिया फिर न्यायलय के गेट पे हिन्दू स्टेट का भगवा झंडा फेहरा दिया. इस समूचे आतंकी हमले और न्यायलय के ऊपर कब्ज़े में
हिन्दू स्टेट के पत्थरबाज बने आतंकिओ के हिमायती और ठाल पुलिस ने खड़े
किए हाथ. और पुलिस किसी नपुंसक की तरह असहाय
दिखाई पड़ी. जिस तरह एक नपुंसक मर्द की औरत किसी साधू के आश्रम में नियोग प्रथा के तहत
सम्भोग करवाने जाती है और न चाहते हुए भी पति उसको जाने देता है उसी तरह पुलिस भी उस
नपुंसक पति की तरह असहाय दिखी.
आतंकिओ के
सामने दिखे असहाय पुलिस कर्मी
न्यायलय के ऊपर कब्ज़ा, इस समूची आतंकी हमले और पहले जितने
भी मुस्लिमो पे होने वाले आतंकी हमले हुए है उनमे हिन्दू स्टेट के आतंकिओ दोवारा कब्ज़ा
किये हुए एक हिस्से राजिस्थान में हिन्दू स्टेट की उस हिस्से की मुख्या के हमलो में
शामिल होने के संकेत इस पत्रकार को मिले है. जिसमे प्रदेश की मुख्या की सहमति प्रतीत
होती है. जिसके ऊपर इस पत्रकार ने १३ दिसंबर
२०१७ को अपनी प्रक्रिया दी है. इस पत्रकार
ने हिन्दू स्टेट के आतंकिओ के मुख पत्र आज तक की एक खबर पे ये बात ज़ाहिर की है.
Zuber Ahmed Khan shared his post.
इस आतंकी को हत्या का आरोपी कह के आतंक का जुर्म कम मत करो.
एक होती है हत्या,
दूसरी होती है साजिश के तहत हत्या और तीसरी होती है साजिश के तहत आतंकी हमला कर के बर्बर हत्या. फिर उस आतंकी हमले के बाद समाज में एक खौफ और आतंक का माहौल पैदा करना. जिसको देख समाज के दुसरे वर्गो को भी आतंकित करना.
तो इस आतंकी ने भी वैसा ही किया है. सोची समझी साजिश के तहत आतंकी घटना को अंजाम दिया है. इतना ही नहीं फिर उसने खुद ही इस आतंकी घटना का विडिओ बना के समाज के दुसरे वर्गों को आतंकित करने की कोशिस की है. हिन्दू लड़कीओ को और मुस्लिम लड़को को पैगाम दिया है विडिओ के ज़रिये. तो हो गया न ये आतंकवादी. फिर इसके साथ समूचा संघटन है. तो इसमें कोई दो राय नहीं के ये एक निर्दोष निरपराधी पे आतंकी हमला था. अगर ऐसा ही वीडियो इस्लामिक स्टेट का कोई इंसान फेस बुक पे पोस्ट करता तो क्या लंगूर पत्रकार उसको आतंकी धमकी या आतंकी हमला करार नहीं देते. फिर हिन्दू स्टेट में हिंदू आतंकी के किये हुए कृत को कैसे महज़ हत्या का नाम दे सकते है.
जहा तक इस पत्रकार की जानकारी है इस समूचे आतंकी हमले में और उसी रोज़ किये गए हत्याकाण्ड में जिसमे दो २० और २२ साल के मुस्लिम नौजवानो की पुलिस ने हत्या कर दी थी उसमे हिन्दू स्टेट के उस हिस्से की महिला लेफ्टिनेंट मुख्या का हाथ होने की जानकारी मिली है उसके साथ हिन्दू स्टेट के उस हिस्से का कटारिया नामक लेफ्टिनेंट कमाण्डेन्ट के आतंकी हमले की साजिश में शामिल होने की जानकारी मिली है. अब आगे पुलिस के ऊपर है के कितनी कुशलता से समूचा प्रकरण जल्द से जल्द हल करती है. जब एक पत्रकार के पास जानकारी आ सकती है तो पुलिस के पास तो समूची व्यवस्था है. सिर्फ ज़रुरत है ईमानदार ज़ेहन और निष्ठां पूर्वक काम करने की ललक.
इस तरह के आतंकी हमले और बढ़ जाते है जब सरकारी अमला या
राजनेता आतंकिओ की हिमायत करते है और धर्मगुरु मज़हब और धर्म के नाम पे ऊट पटांग बयानबाज़ी
करते है जिससे आतंकवादीओ की हौसला अफ़ज़ाई होती है न के उनके ऊपर अंकुश रखा जाता है. इस पत्रकार ने महसूस किया है हर हिन्दू आतंकवादी
समर्थित साधू खून खराबे की और ज़हरीली भाषा बोलता है. प्यार, मोहब्बत, अमन चेन से इन साधू संतो का दूर
दूर तक कोई सरोकार नहीं है.
१३ दिसंबर २०१७ को हिन्दू आतंकवाद
समर्थित साधू तरुण सागर ने मुस्लिम विरोधी बयान दिया है. उसने हिन्दू समाज में मुस्लिम
धर्म के प्रति बढ़ती हुई रुचि पे चिंता दिखाते हुए मोदी सरकार से अपील की है के मुस्लिम
नस्ल कूशी ज़रूरी है. उसके बयान का इस पत्रकार ने सटीक अनुमान लगया और कहा था. “इस आतंकवादी की बात का दो प्रकार
से मतलब निकाला
जा सकता है. एक
वो मोदी सरकार को सरकारी
यंतर्णा का उपयोग कर के मुसलमानो का खात्मा
करने के लिए उकसा रहा है.
दूसरा ये
आतंकवादी अपने चेले चमचो को खून खराबे के लिए उकसा रहा है.” और
१५/१२/२०१७ को आतंकवादीओ ने न्यायलय के ऊपर हमला कर के उसको अपने कब्ज़े में ले लिया.
आगे
उसने लव जिहाद पे भी मुस्लिम समाज के ऊपर बेबुन्याद आरोप लगाए जो सच्चाई से परे है.
इस तरह की बढ़ती हुई आतंकी वारदातों पे कोई अंकुश नहीं
लग पा रहा है उससे साफ़ तोर पे ज़ाहिर हो रहा है के आतंकी हमलो में प्रदेश की मुख्य मंत्री
की पूरी सहमति है और आतंकिओ को संरक्षण. कश्मीर में पथरबाज़ो के ऊपर तो पुलिस की गोलिआ
चलती है. फिर अगर कश्मीर की लोकल जनता का गुस्सा पुलिस की बर्बरता के खिलाफ फूटता है
तो समूचे हिन्दू स्टेट के आतंकी कश्मीर को बदनाम करने का बीड़ा उठा लेते है. और जब कोर्ट
परिसर को आतंकवादीओ ने अपने कब्ज़े में ले लिया फिर भी पुलिस की गोली नहीं चली. यहाँ
तक के पुलिस ने लाठी चार्ज तक नहीं किया. तिरंगे को उतर के फेक दिया गया और हिन्दू
आतंकिओ ने हिन्दू स्टेट का भगवा झंडा कोर्ट के ऊपर फेहरा दिया फिर भी पुलिस मूक दर्शक
बानी रही.
आतंकिओ ने
फेहराया हिन्दू स्टेट का झंडा
इन सभी घटनाओ
के लिए लचर प्रशासन केंद्र का हो या स्टेट का पूरी तरह से ज़िम्मेदार है और उसपे आतंकवादी
समर्थित साधू संतो के ज़हरीले बयानबाज़ी. जिससे हालात और पेचीदा होने वाले है.
लंगूर पत्रकार, राजनेता और खाकी आतंकी (पुलिस) कश्मीर में छूट पुट
पत्थरबाज़ी की घटनाओ को बड़ा चढ़ा के कवरेज देती है और कश्मीर के अवाम को बदनाम किया जाता
है जो अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे है. लेकिन
हिन्दू आतंकवादी किस आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे है. केंद्र में उनके आतंकवादी काबिज़ है जहा
ये आतंकवादी पुलिस से मुठभेड़ करते है वहा उन्ही का कब्ज़ा है फिर भी लंगूर पत्रकार
हिन्दू आतंकिओ के हमले और लोकल पत्थरबाज़ी की घटनाओ पे मौन धारण किये हुए है. कश्मीर
के अवाम के पास एक बोहोत ठोस वजह है गुस्से की क्योके वहा जेनरल डाइर की सेना हर दुसरे
रोज़ झलियावाला बाग का हत्याकांड करती है बर्बरता, आतंक फैलाती है. हर दुसरे रोज़ लोकल
कश्मीरी नौजवान को गोली मार के उसको आतंकी घोषित किया जाता है. फिर कश्मीर की अवाम
भारत से आज़ादी चाहती है और पाक के साथ जाना चाहती है.
२०१४ के बाद से हरयाणा, गुजरात, राजिस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इस सभी जगहों पे पुलिस के साथ आतंकी संघटनो बजरंगदल,
वि.ही.पि. युवा वाहिनी, गौ आतंकी और दुर्गा वाहिनी ने पत्थरबाज़ी की है आगरा और भोपाल
में बजरंगदल के आतंकिओ को पुलिस स्टेशन पे सशस्त्र हमला कर के आतंकी छुड़ा ले गए और
पुलिस मूक दर्शक बनी रही. फिर कश्मीर के अवाम
पे सिर्फ पत्थरबाज़ी पे गोलिओ की बौछार उसपे लंगूर पत्रकार इस निर्मम और सामूहिक हत्याकांड
की हिमायत करते है. खाकी आतंकी (पुलिस) का
लेफ्टिनेंट कर्नल वैद्य कहता है अगर जो पुलिस पे पत्थर फेकेगा हम उसका जवाब गोली से
देंगे. जब पुलिस इतनी साहसी है तो हिन्दू स्टेट में काहे को वही पुलिस वही कानून के
रक्षक वही सविधान की शपत लेने वाले पुलिस वाले नपुंसक बन जाते है. साफ़ ज़ाहिर होता है के पुलिस और सेना के मन में मुस्लिम
समाज के प्रति एक ज़हर भरा हुआ है जिसकी खेती आज कल हिन्दू स्टेट में खूब पनप रही है
और खूखार आतंकी संघटन बीजेपी के आतंकवादी उस ज़हर के बीज बोने का काम करते है.

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