अज़ीज़ नज़रीन,
आलमी क़ुव्वत जोहरी ताक़त पाकिस्तान ने कमो बेश २० लाख ग़ैर क़ानूनी अफ़गानी पनाह गुज़ीनों को पाक से निकाल दिया है। यह अवाम २४ साल क़ब्ल जब ज़ाफ़रानी और यहूद दहशत अफ़ग़ानिस्तान में ज़ुल्म, बर्बरियत और क़त्ल ए आम मचा रहे थे तब यह पाकिस्तान में दरअंदाज़ी कर पनाह ले कर बस गए थे। तब से अब तक यह अवाम पाकिस्तान की हवा, पानी, रिज़्क़ और सरमाये का खूब लुत्फ़ उठा रहे थे।
लेकिन हाल ही में जब तालिबान ने ज़ाफ़रानी और यहूद दहशत को जड़ों से उखाड़ फेंका और एक एक ज़ालिम, दरिंदे, बर्बरियत मचाने वाले दहशतगर्द को ढेर कर दिया और अमन क़ायम किया तो अब इन ग़ैर क़ानूनी अफ़गानी पनाह गुज़ीन अवाम को पाकिस्तान में मज़ीद रहने की कोई हाजत नहीं समझ में आती है।
कियोंके इनमे से किसी के पास भी शिनाख़्स्त कार्ड, अफ़ग़ानी अवाम या ख़ाना जंगी वाले मुल्क से भागे हुए अक़वाम ए मुताहिदा की पनाह गुज़ीन सनद मौजूद नहीं है। इनमे से कौन जासूस, दरअंदाज़ (घुस्पेठिया) है कौन अवाम इसकी पहचान शिनाख़्त कार्ड से ही होती है। इनमे से ज़्यादातर ज़ाफ़रानी और यहूद दहशतगर्द या किसी दुश्मन मुल्क के जासूस होने के ज़्यादा इमकान हैं।
अब
सिक्के का दूसरा रूख देख लेते हैं। भारत की
अवाम, ज़ाफ़रानी लंगूर और क्रिकेट में जहाँ अफ़ग़ानिस्तान का नाम आता है मीठा मीठा शहद
टपकाने लगता है। अब भारत की हुकूमत से गुज़ारिश
है इन २० लाख अफ़ग़ान की अवाम को अपने मुल्क में पनाह दे। वैसे भी दिल्ली और उसके अतराफ़ एन.सी.आर. में कम
से कम ५ लाख अफ़ग़ानी रहते हैं। भारत इन २० लाख
को भी पनाह दे और एक अलहदा शहर बना कर उनके लिए सरमाया कारी करे।
दूर दराज़ इजराइल के लिए भारत के लंगूर लँगूरनियों और अक्सरियत अवाम के दिलों में मोहब्बत भरी है अगर यह मोहब्बत इंसानियत की वजह से है तो अफ़ग़ान अवाम को पनाह दो। अफ़ग़ानिस्तान भारत से ज़्यादा नज़दीक है बनिस्बत इजराइल के तो पहला हक़ अफ़ग़ानिस्तान की अवाम के लिए होना चाहिए।
अफगानिस्तान
से मोहब्बत और पाकिस्तान से नफरत ज़हर का भारत की अवाम में वोह पैमाना है की क्रिकेट
में अफ़ग़ानिस्तान की जीत पर संघी और दहशतगर्दों की नस्ल मस्जिद के बजाये ग्राउंड पर
ही नाचने लगा। अवामी हल्क़ों में दौर ए बादशाही
में तवाइफ़ों की औलादें रक़्स करती थी यह मस्जिद का मुतवल्ली कैसे नाचने लगा। इसके नुतफ़े में शक और शुकूक की बू आती है।
दूसरा
लंगूरों की जमात अफ़गानी अवाम की झूटी मोहब्बत में पाकिस्तान की अज़मत को कम कर रहा है। में इन लंगूरों से पूछना चाहता हूँ अगर ऐसा ही भारत
में हो जाए तो क्या तब भी यह लंगूर बिलडोज़र क़ानून की मुख़ालेफ़त करेगें। अगर २० लाख से ज़्यादा बंगलादेशी, रोहिंगिया या अफ़ग़ानी
ग़ैर क़ानूनी तरीके से रह रहे होंगे और हुकूमत उनके घरों को मिस्मार कर देगी तब इनकी
हैडिंग और ख़बरनामों की सुर्ख़ियां कैसी होंगी।
अमित शाह ने २०१९ से क़ब्ल इन्तेख़ाब में कैसे कैसे ज़हरीले बयान दिए थे। एक एक घुस्पेठिये को चुन चुन के बहार निकालेगें
और हिन्दू बोध सिख जैन किच्चंन शरणार्थियों को नागरिकता देगें।
नाज़रीन आज जो लंगूर पाकिस्तान के ऊपर ऊँगली उठा रहें हैं ज़रा अपने गिरेबान में झाँक कर देखें ज़ाफ़रानी हुकूमत में तो भारत के ख़ुद के अवाम मुस्लिम बस्तिओं को तबाह कर दिया यहाँ तक की प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत मफ़लूज मुस्लिम अवाम के रोज़गार और घरों को तबाह कर दिया। तब तो लंगूर और लँगूरनियों की जमात को बड़ी तस्कीन मिलती थी। योगी बाबा के बिलडोज़र की बड़ी तारीफ़ होती थी। कियोंके घरोंदे बस्तियां मुस्लिम अवाम की तबाह होती थी तो तुमको सुकून मिलता था।
वहीं पाकिस्तान ग़ैर क़ानूनी अवाम को निकाल रहा है तो तुमको पेट में दर्द हो रहा है। पाकिस्तान के बारे में ना जाइज़ ज़हर अंगेशी के मज़मून छापे जा रहें हैं। पाकिस्तान की किरदार कूशी की जा रही है। यह मुनाफ़ेक़त क्यों। यह मुनाफ़ेक़त क्यों। जहाँ इजराइल के अवाम के साथ हमदर्दी है वहीँ अफ़ग़ानिस्तान के अवाम के साथ भी दिखाओ। करो दिल बड़ा बसाओ उन २० लाख अफगनिस्तान अवाम को भारत की सरज़मीं पर। वैसे भी तुमको तो अफ़ग़ानिस्तान और अफ़गानी अवाम बोहोत पसंद हैं।
दिखावे की मोहब्बत और सियासत मत करो कुछ उनके मसले हल करो तब जाने की तुम बड़ा जिगर रखते हो।
सहाफ़ी ज़ुबेर की क़लम से
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