अज़ीज़ नाज़रीन,
२०२४ के इन्तेख़ाब के लिए तमाम सियासी जमातों ने कमर कस ली है। जिसका असर हाल ही में हुए सूबों के इन्तेख़ाब में ख़ूब देखने को मिल रहा है। ऐसा महसूस हो रहा है ज़ाफ़रानी महाज़ सभी सूबों से ग़ायब होने वाली है। ताहम जिन सूबों में इन्तेख़ाब हो चूकें हैं वहां मुख़ालिफ़ ज़ाफ़रानी महाज़ हवा ख़ूब देखने को मिल रही है। सूबे शुमाल में साधू के ऊल जलूल फ़ैसले और मुस्लिम अवाम को हरसा करने की वजह ही वही समझ में आ रही है की ज़ाफ़रानी महाज़ का बोरिया बिस्तर बंद होने वाला है।
तमाम सियासी तंज़ीमों यहाँ तक ज़ाफ़रानी तंज़ीम बीजेपी से भी २०२४ के लिए यही मुतालबा होगा अगर उनको मेरी तंज़ीम के नुमाइंदों के वोट चाहिए तो उनको अपने मेनिफेस्टो में यह बात दर्ज करना होगी अगर हम इन्तेख़ाब जीत गए तो २५ करोड़ मुसलमानों को ३७० की तर्ज़ पर ख़ुसूसी दर्जे का मुस्लिम सूबा देंगें या एक अलहदा रियासत की बात करें। जिसमे अदालतें, वज़ीर ए आज़म, एवान, सदर ए ममलकत, इन्तेज़ामियाँ, बल्दिया सभी मुस्लिम अवाम के लिए वक़्फ़ होना चाहिए। मरकज़ के पास महज़ फ़ौज और करेंसी का इख़्तेयार होना चाहिए। हमारे उस मुस्लिमों के सूबे में किसी भी क़िस्म की बाहरी (भारत) की क़ुव्वत की कोई मदाखलत नहीं होना चाहिए।
बोहोत ज़ुल्म हो गए मुस्लिम अवाम पर हर जानिब ज़ाफ़रानी दहशत को एक आसान हदफ़ मुस्लिम अवाम ही दिखता है। किसी भी मुस्लिम को कभी भी गिरफ्तार कर लिया जाता है। सहाफी खुले आम मुस्लिम बच्चिओं को हिन्दू बनाने की बातें अवामी टीवी पर करतें हैं। यह सब बातें कहाँ जा कर रूकेगी।
किसी भी मुस्लिम नौजवान को साधू, हेमंत, नरोत्तम, कट्टर जैसे ज़हरीले कीड़े गिरफ़्तार करतें हैं फिर उनका कोई पुरसान ए हाल नहीं होता है। अदालतों में ज़ेर गौर मुस्लिम नौजवान जेलों में सड़ रहें हैं। ना ही उनकी सज़ा पर कोई फैसला हुआ है और ना ही उनका मुद्दा अदालतों के सामने रखा गया है। इसलिए ना ही उनको बैल मिलती है और ना ही उनकी सुनवाई होती है। यह नाइन्साफ़ी ख़तम करना होगी।
भारत के २०% मुस्लिम अवाम लेकिन कमज़ोर उनकी क़ियादत करने वाले सियसतदांओं को थोड़ी समझ होना चाहिए। भारत में योगी, अमित, हेमंत, नाथूराम (नरोत्तम) के आतंकवादी कभी भी कही भी किसी भी मुस्लिम को गोली मार देतें हैं। पुलिस की निगरानी में हिन्दू आतंकवादी मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट को गोली मार देतें हैं। भारत की सहाफ़त है की मुस्लिम किरदार कुशी करती है। ज़ाफ़रानी हुकूमतों में मुसलमानों की बस्तियां ऐसी उजाड़ी हैं जैसे कोई फ़िज़ाई हमले किया हो। मुसलमानों की मस्जिदें गसप की जाती हैं। तोड़ दी जाती हैं। मुस्लिम अवाम से ज़बरदस्ती ऐसे नारे लगवाए जातें हैं जो उनके मज़हबी अक़ीदे की खिलाफ़वरज़ी करते हैं। हर हलके में हिन्दू दहशत गले फाड़ फाड़ कर नारा लगाते हैं।तफ़रीह फिल्मों में सिर्फ और सिर्फ इस्लाम. मुस्लिमानों और पाकिस्तान के खिलाफ बदगुमानी ज़हर फैलाया जाता है। अगर यह हिन्दू दहशत ज़ुल्म बर्बरियत का क़िस्सा ख़तम नहीं हुआ तो हो सकता है कोई अबू ओबेदा भारत में भी पैदा हो जाएँ। जिनका नाम लेने से पहले ही योगी अमित हेमंत नाथूराम का पेशाब निकल जाए।
वैसे भी तमाम भारत में मुसलमानों के खिलाफ लंगूर जमात ने इतना ज़हर भर दिया है की उनको इस माहौल में कोफ़्त होती है। हर जगह उनको पाकिस्तानी, गद्दार, भारत के दुश्मन, आतंकवादी बोल कर मुखातिब किया जाता है। उनके हर तेहवारों पर दंगा फसाद होता है। चाहे वोह ईद हो या ईद ए क़ुर्बान चाहे वोह ईद मिलाद हो या मुहर्रम। ठीक है हम खाते हैं गाये, बैल, भैंस, ऊँट, मुर्गा, बकरे का गोश्त अगर हिन्दू समाज के जज़बात हमारे खाने से टूटते हैं तो हमको अलहदा सूबा दो।
उस सूबे में शरिया क़ानून नाफ़िज़ किया जाएगा अगर कोई मुनाफ़िक़ या मुनाफ़िक़ा पाई जाती है जो इस्लामिक क़ानून की ख़िलाफ़ वर्ज़ी करती या करता है या हिन्दू हो कर मुस्लिम नाम रख कर इस्लाम के ख़िलाफ़ बदगुमानी पैदा करती या करता है मुस्लिमानों में इन्तेशार फ़ैलाती या फ़ैलाता है या सूबे की हुकूमत के ख़िलाफ़ ऐसा झूट फ़ैलाता या फ़ैलाती है जो हक़ नहीं है तो उसका होगा सर तन से जुदा।
२०२४ में मुसलमानों को अपनी अलहदा पहचान चाहिए। आज जिन यहूदिओं के लिए लंगूर लँगूरनियों की छाती से दूध टपक रहा है। अगर मुस्लिम अवाम को उनकी अलहदा पहचान नहीं दी गई और हालात वैसे ही रहे जैसे आजकल हैं तो २०२४ से ले कर २०३० भारत के लिए बोहोत बोहोत सख़्त होने वाला है।
अब
मुस्लिम अवाम मज़ीद ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं करेगा।
कभी कपड़ों से पहचाने वाले आज मुस्लिम ड्रेस कोड को इख़्तेयार कर के रक़्स कर रहें हैं। एक तरफ तो ज़ालिम दरिंदे शैतान जल्लाद क़साई को मुस्लिम
पहनावे और अज़ान से इतनी तकलीफ है दूसरी तरफ़ बुर्का पहन कर रक़्स किया जा रहा है। अब वोह बजरंगी, संघी, लंगूर लँगूरनियाँ कहाँ गए
किस भोग में जा छुपे जो सूबे शुमाल में बच्चियों के बुर्का पहन कर क्लास पर आने और
इम्तेहान देने पर आग बबूला हो जाते थे। पूरे
कॉलेज में बुर्का पहन कर लड़किया स्टेज पर आई तो आग बबूला क्यों नहीं हुए। कैसे किसी भी इदारे में उसके ऊपर रक़्स किया जा
सकता है।
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