Friday, 17 November 2023

ज़ईफ़ और उसके बेटों को जिन्नात की मदद।

अज़ीज़ नाज़रीन,

कश्फ़ और करामात की महफ़िल में आज का क़िस्सा उन अल्लाह वालों को वक़्फ़ है जिनकी नस्लें अपने वाल्दैन की फ़र्माबरदार होती हैं फिर उनके लिए फ़रिश्ते ग़ैब से मदद करतें हैं। 

किसी शहर में एक ज़ईफ़ बुज़ुर्ग रहा करते थे।  उनके कुछ फ़र्ज़न्द थे जो वाल्दैन के निहायत ही फ़र्माबरदार थे।  उनके माशी हालात  ख़ुशगवार नहीं थे।  लेकिन वोह सभी हर हाल में अल्लाह का शुक्र बजा लाते थे।  उनके शुक्र पर अल्लाह की मज़ीद रेहमत उनके ऊपर नाज़िल होती।  और अल्लाह ऐसी ऐसी जगह से उनको रिज़्क़ फ़राहम करता था जहाँ से उनको तवक़्क़ो भी नहीं होती थी।  

एक रोज़ ज़ईफ़ ने अपने बेटों के साथ जंगल में शिकार का प्रोग्राम बनाया।  सभी लोग जंगल पहुंचे।  वालिद ने एक बेटे से कहा बेटा ज़रा खाने का इंतज़ाम करो।  फ़ौरन बोला जी अब्बा में अभी कुछ तलाश कर आता हूँ।  दुसरे से बोला पानी लाओ।  जी अब्बू वोह नदी बह रही है में पानी लाता हूँ।  एक से बोला बेटा आग जलाओ और खाने पकाओ।  जी अब्बू अभी लकड़ियां जलाते हैं हो जाएगा।  अब उन्होंने बोला देखो वोह परिंदा दरख़्त पर बैठा है उसका शिकार करो और ज़िबाह कर के उसको पकाओ।  जैसे ही बेटे ने उस पर निशाना लगाना चाहा उसने इंसानी शकल इख़्तेयार की और बोला की तुम मुझे कियों मारना चाहते हो में तो अजिन्ना में से हूँ। में तुम्हारे बेटों की फ़र्माबरदारी से ख़ुश हूँ, तुमको ख़ज़ाने का पता बताता हूँ तुम लोग वहां जाओ और ख़ज़ाना ले कर अपनी हाजत पूरी करो।  चुनाचे सभी परिंदे की बताए हुई जगह पर पहुंचे और ख़ज़ाना हासिल किया।

रातों रात माला माल होने और जंगल में ख़ज़ाना मिलने की बात आग की तरह पूरे गाँव में फैली, शहर सूबे को चीरती हुई आस पड़ोस के मुल्क में भी पहुंची।  वहां पर भी ऐसे बेटे ख़ज़ाने के लिए निकले जो बुढ़ापे में अपने वाल्दैन को बोझ समझ कर या तो उनको ज़ईफ़ घर में छोड़ देतें हैं या किसी वृद्ध वन की ज़ीनत बना देतें हैं। 

ऐसे ही एक बूढ़े शक़्स ने अपने नाफ़र्मान बेटों के साथ ख़ज़ाने की तलाश में निकला।  जंगल में पहुंच कर उसने एक बेटे से कहा बेटा खाने का इंतज़ाम करो तो वोह बोला अरे पिताजी यहाँ जंगल में कहाँ खाना मिलेगा दूर दूर तक कोई बस्ती नहीं बड़े बड़े पेड़ सीना ताने खड़े हैं।  एक से कहा बेटा पानी लाओ अरे पिताजी बुढ़ापे में तुम साटिया गए हो नदी दूर है कैसे और कहाँ पानी मिलेगा।   एक से कहा आग जलाओ खाना पकायेगें उसने कहा अरे लकड़ियां गीली हैं आग नहीं जल सकेगी।  बड़े मियां ने कहा ठीक है वोह परिंदा बैठा है उसको तीर से मारो कुछ खाने का इंतज़ाम हो जाए।  जैसे ही बेटे ने तीर से उसके ऊपर निशाना लगाना चाहा वोह एक बड़ा सा नाग बन गया और उन लोगों पर हमलावर हुआ।  उसने उनसे कहा।  ख़बरदार मुझे मारने की कोशिश की में जिन्नातों में से हूँ।   

तुम लोग अपने वालिद के नाफ़र्मान तुम उस ज़ईफ़ के जैसे ख़ज़ाने की तलाश में आये हो जो तुमको कभी नहीं मिलेगा।  वोह बेटे अपने वालिद की एक आवाज़ पर लब्बैक बोल कर कुछ भी करने को तैयार रहते थे तो अल्लाह की मदद भी उनको मिलती थी।  उनको अपने वालिद की अज़मत और आपस में इत्तेहाद की वजह से खज़ाना मिला तुमको नाफ़रमानी, इन्तेशार, भेद भाव और आपसी लड़ाई झगड़ों की वजह से ज़लालत  मिलेगी।

कहानी का सार यही है जो बच्चे अपने वाल्दैन की इज़्ज़त करतें हैं उनकी कही बात कभी नहीं ठुकराते आपस में मिल झूल कर एकता से रहतें हैं तो अल्लाह की मदद भी ऐसे बच्चों के साथ होती है और ग़ैब से उनके काम पूरे होतें हैं। 

सहाफ़ी ज़ुबेर की क़लम से

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