Sunday, 5 November 2023

ज़हरीली फ़िज़ाओं में अमन तलाशती ज़िंदगियाँ।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज का मौज़ूं बोहोत बोझिल दिल से लिखने पर मजबूर हूँ।  भारत में नहीं बल्कि आलमी हल्क़े में भी हर जानिब मुस्लिम नुमाइंदगी, सहाफ़त,  रोज़गार, बस्तियां, शिनाख़्त दाढ़ी, हिजाब और तालीमी इदारों को ही हदफ़ बना कर ख़त्म किया जाता है।  फ़िलहाल भारत की ही बात करतें हैं।  फ़िज़ाएं इतनी ज़हरीली हो चुकी है ऐसे माहौल से एक घुटन सी महसूस होती है।

हाल ही में ०७ अक्टूबर २०२३ से फ़लस्तीन के हमास और इजराइल की बर्बरियत, ज़ुल्म, नाइंसाफ़ी, दहशतगर्दों के बीच जंग हो गई।   इस दौरान बॉलीवुड की नचौड़ी इजराइल के नुमाइंदे से मिली और भारत को हिन्दू राष्ट्र बोल कर मुख़ातिब किया।  उसने तमाम हिन्दू अवाम के साथ इजराइल के दरमियान यकजेहदी दिखाई और हमास को एक दहशतगर्द तंज़ीम और रावण बोल कर मुस्लिम अवाम के लिए बोहोत से नाज़ेबा कलेमात बोले।  अब सवाल यह उठता है उसको भारत सरकार की किस एजेंसी ने यह इख़्तेयार दिया था की वोह बेरुन मुल्क सफ़ीर से मिले।  फिर वोह कौन होती है भारत को हिन्दू राष्ट्र होने का एलान करने वाली तीसरी बात वोह क्या तमाम हिन्दू अवाम की ठेकेदार है वोह कैसे तमाम हिन्दू अवाम की जानिब से बोल सकती है की तमाम हिन्दू अवाम इजराइल के साथ है। 

यहां दो चीज़ें हैं या तो उसको ऐसा कहने के लिए मोदी इन्तेज़ामियाँ ने कहा था या फिर यह नचौड़ी मोदी, अमित शाह, योगी जैसे दिगज्जों से भी ज़्यादा ताक़तवर हो गई जो बात इन सियसतदांओं ने इजराइल के सफ़ीर से नहीं कही वोह उसने कह दी।  

जब उस मुद्दे पर इस सहाफ़ी ने उसकी थिएटर "तेजस" पर उसको घेरा तो उसने दो क़दम आगे निकल कर बोल दिया जो भी तेजस नहीं देखेगा वोह देश द्रोही, दुश्मन और तमाम राष्ट्रवादी उसकी सिनिमा देखेगें।  यह तो दहशत है किसी भी इंसान को उस हद तक परेशान करो की वोह तुम्हारी ग़लत बात को भी सही बोलने लगे। 

क्या खाना है, क्या पहनना है, क्या पढ़ना है, कहाँ इबादत करना है, किस्से शादी करना है, किस्से मोहब्बत करना है।  यह सब तो पहले ही ते हो चूका था और मुस्लिम अवाम इसको पहले ही भुगत रहे थे।  अब तफ़रीह की चीज़ें भी इन से पूछ कर करना होंगी।  नहीं तो लगेगा देश द्रोही का तमग़ा।  

उसकी इस नाज़ेबा बात पर एक मज़मून लिखा जो कश्मीर में भारत की फौज और हमास में इजराइल के बड़े बोल पर सख़्त तनक़ीदी था।  उस पर आला हूकूमती नुमाइंदों से ले कर पुलिस अफसरों के फोन आना शुरू हो गए।  हर बार की तरह वही ताना अगर पाकिस्तान से इतनी मोहब्बत है तो

जले जाओ पाकिस्तान।

में बहैसियत एक सहाफ़ी उन तमाम पुलिस अधिकारिओं और हूकूमती नुमाइंदों से कहना चाहता हूँ कितनों को आप पाकिस्तान भेजगें।  मसला पाकिस्तान का नहीं है बल्कि भारत में पनपे उस ज़हर और नफ़रत का है जिसकी वजह से हर वोह इंसान इन शिद्दत पसंद संघी अवाम को पाकिस्तानी और ग़द्दार नज़र आता है जो उनकी ग़ैर क़ानूनी, ख़िलाफ़ ए दस्तूर बातों पर अमल नहीं करता है या उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है।

आप ज़हरीली खेती को तो पनपने दे रहे हो उसके बीज ख़ूब फल फूल रहें हैं और जो इस ज़हर को खा कर ज़हरीला हो रहा है उसके ऊपर हिकमत कर रहे हो।  अब यह ज़हर नहीं लगता है जल्दी ख़तम होगा। 

ठीक है हम भी इन भाजपा वालों की बात की ताईद करतें हैं चले जायेगें पाकिस्तान लेकिन फिर बात वही होती है तोहसीह करो आज की तारीख़ में २५ करोड़ मुस्लिम अवाम को अगर पाकिस्तान भेजना है तो पाकिस्तान की तोहसीह करना होगी।  कियोंके हर बीजेपी वाले और संघ परिवार को हर मुसलमान में पाकिस्तानी ही नज़र आता है।  वोह अपने फैलाये हुए ज़हर को नहीं देखते।  

यूं तो इस ज़हर का आग़ाज़ बोहोत पहले ही हो चूका था लेकिन इसका ग़लीज़ बीज १९२५ में बोया गया जिसका फल भारत के बटवारे के रूप में मिला।  ताहम १९४७ के बाद भी मुस्लिम अवाम को हर ख़ित्ते में वही ज़िल्लत और रूस्वाई का सामना करना पड़ता था जो १९४७ से क़ब्ल था।  अब हर जगह उनको पाकिस्तानी बोल कर मुख़ातिब किया जाता।  आला हूकूमती अधिकारी ताने मारते तुम लोग पाकिस्तान कियों नहीं चले जातें।  उनकी वतन परस्ती पर हर वक़्त शक किया जाता।  जबकि इस दौरान दो जंगों में मुस्लिम फ़ौजिओं ने अपनी जान की कुर्बानी दे कर यह साबित कर दिया की मुस्लिम ग़द्दार या पाकिस्तान परस्त नहीं हैं।  

लेकिन संघ की शर अंगेज़ी और मुस्लिम अवाम को हरासा करने की हिकमत कभी भी कम नहीं हुई और वोह सदा ही मुस्लिम अवाम के लिए हद दर्जे का ज़हर ले कर महज़ कुछ नारों पर "वन्दे…..”  “भारत…..” पर हर मुस्लिम का वफादारी का पैमाना तोलने लगे। 

सहाफ़ी ज़ुबेर की क़लम से।

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