अज़ीज़ नाज़रीन,
आलमी "काल गर्ल" और मौज का सामान घरेलू सामान के मुक़ाबले जल्दी ही दम तोड़ देता है। यह बात सो फि सद दुरुस्त साबित होती है। हमास आधुनिक रावण फ़ेम बीजेपी की आइटम गर्ल के दिन अच्छे नहीं चल रहें हैं। जहाँ देखो बदनामी ज़िल्लत और रुस्वाई हाथ लग रही है। एक तो उससे रावण ख़तम नहीं हुआ तीर चला ही नहीं दूसरी उसकी थेटर "तेजस" जदबर्दस्त धूम मचा रही है। धूम मतलब फ्लॉप होने में धूम मचा रही है। गुजरात, बिहार, दिल्ली में थेटर मालिकों ने एक हफ़ते में ही ४-५ दिन के तमाम शो केंसिल कर दिए। कियोंके एक भी टिकट नहीं बिका था।
बीजेपी की आइटम गर्ल ने हमास को आधुनिक रावण बोला था उसको ख़तम होना पडेगा। लेकिन जब तीर चलाने की बारी आई जल्दी ही ठंडी पड़ गई। इन जैसी नचौड़ियों के लिए अर्ज़
किया है।
ना तीर चलेगा ना तलवार उठेगी इन हाथों से
यह बाज़ू मेरे आज़माये हुए है।
नाज़रीन दूसरी है आलमी टॉनिक वाली बाई जिसके पास हुनर है ज़ईफ़ मर्दों को टॉनिक पिला कर जवान करती है, फिर उनसे पूछती है क्या आपको काम करने में मज़ा आता है। यह टॉनिक वाली बाई कभी कभी अपने शोहर को भी मना कर देती है नहीं आज नहीं आज बोहोत थक गई लेकिन एक ज़ईफ़ को टॉनिक पिला कर पूछती है आपको मज़ा आ रहा है। बेशर्म रंग।
यह लँगूरनी भारत से कई हज़ार किलोमीटर दूर इजराइल और हमास लड़ाकों की जंग देखने चली गई लेकिन ख़ुद के वतन में मणिपुर में क्रिस्टी समाज के साथ हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशत, क़तल ए आम, ख़ातूनों को नंगा घूमाने के बाद इज्तेमाई ज़िना की वारदात देखने नहीं पहुंची।
अपनी बात अपने हक़ के लिए कहिये ग़ुलाम मत बनिये। इंसाफ़ की बात कहिये, रोज़गार की बात कहिये, फ़िर्क़ापरस्ती के ख़िलाफ़ बोलिये। हुकूमत की चाटुकारिता छोड़िये उससे आँखों में आँखे डाल कर सवाल करने की आदत डालिये। इंसान बनिये ग़ुलाम नहीं। नहीं तो तुम में और एक पत्थर की मूर्ती में क्या फ़र्क़ रहेगा। बड़े बड़े नेताओं की पत्थर की विशाल मूर्ती लगा दी लेकिन उसके ऊपर चील कव्वे बैठ कर हगते हैं और उसमे इतनी ताक़त नहीं की उनको उड़ा सके। ग़ुलाम बनोगे #तेजस जैसा हाल होगा सवाल करोगे #जवान जैसा हाल होगा। फैसला है आपका।
इन सभी के मुक़द्दर में ज़लालत लिख दी गई है। जो भक्त गण शाहरुख को भीक मगवाना चाहते थे उसकी फिल्म को फ्लॉप करवाना चाहते थे उसके तो वारे न्यारे हो गए बल्कि अपनी ही दीदी को चौराहे पर ला खड़ा किया।
योगी जी आप तो शाहीन बाग़ की ख़ातूनों को चौराहे की ज़ीनत बोलते थे। शोहर रज़ाई में सो रहें हैं और अपने घर की बेहेन बेटिओं बीविओं को चौराहे पर बिठा दिया। अब आपकी चहेती जिसकी फिल्म आप देखने को बेताब थे। चकले पर बैठ गई। कहिये क्या बोलते हो।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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