Sunday, 29 October 2023

जब पीर होंगे नायाब तब मुरीद होंगे कामयाब

 अज़ीज़ नाज़रीन,

आज का मौजूं पीरी मुरीदी की निस्बत से हासिल रूहानी फैज़ के ऊपर इस गुनाहगार को तहरीर करने का शर्फ़ हासिल हुआ है। 

किसी शहर में एक पीर साहब थे जिनको अल्लाह ने वोह सलाहियत दी थी उन्होंने अपने नफ़स पर क़ाबू पा लिया था।  उनको शैतान, जादू, टोना टोटका और कोई भी ख़बीस अमल ईज़ा नहीं पहुंचा सकता था।  हत्ता के अब उनके रूहानी उरूज का वोह आलम हो गया था की कोई भी तकलीफ़ परेशानी अगरचे वोह शैतानी अमल की वजह से उनके मुरीदीन की जानिब आती थी तो पीर साहब फ़ौरन एक ढाल के जैसे अपने मुरीद को बचा लेते थे और वोह तमाम तर तकलीफ़ ज़ाईल हो जाती थी।  

उनके रूहानी फ़ैज़ और नफ़स पर फ़तह हासिल करने के चर्चे अब मोहल्ले से निकल कर शहर फिर सूबे अल ग़र्ज़ तमाम मुल्क में फ़ैल गए।  हम जैसे किसी गुनहगार को भी उनकी बुज़ुर्गी के क़िस्से मालूम हुए तो दिल में इश्तियाक़ पैदा हुआ।  जब उनकी ख़ानक़ाह में पहुंचे तो देखा की दरवाज़े पर एक शख़्स को नैज़ों से भेद कर सूली पर लटकाया हुआ है और उसके जिस्म से ताज़ा ख़ून बह रहा है।  बोहत रंजीदा हुआ की कैसे पीर साहब है एक इंसान का क़तल कर दिया।  एक आवाज़ बुलंद हुई चले आओ, एक दरवाज़ा दो दरवाज़ा तीन दरवाज़ा हर दरवाज़े पर आवाज़ आती गई चले आओ और मुरीद अंदर दाख़िल हो जाता एक एक कर के दरवाज़े ख़ुलते गए और मुरीद मज़ीद अंदर दाख़िल होता गया। जब सारे दरवाज़े ख़ुल गए अब वोह उस हुजरे में दाख़िल हुआ जहाँ पर पीर साहब तशरीफ़ फ़रमा थे।  वहां का नज़ारा देख कर मुरीद के पैरों तले ज़मीन खसक गयी।     

उसने देखा की पीर साहब ज़मीन पर सो रहें हैं और उनके साथ एक हसीन ख़ातून सो रही है पीर साहब उससे पीठ किये हुए है और वोह ख़ातून उनके जानिब मुँह किये हुए है।  यह माजरा देख कर मुरीद को बड़ी ईज़ा हुई। यह सारा हर्बा शैतानी अमलियत और ख़बीसों का बुना हुआ जाल था।  अब शैतान ने मज़ीद दिल में शक शुकूक ओर वस्वसे डालना शुरू किये। 

कैसे पीर साहब है एक पराई ख़ातून की आग़ोश में सो रहें हैं, यह ख़ानक़ाह किसी वली की नहीं बल्कि क़ातिल, ज़िनाकार की अय्याश गाह है।   फिर उसने सोचा जो बहार दरवाज़े पर शख़्स को सूली दी थी हो सकता है वोह शख़्स इसका मर्द होगा और इन पीर साहब ने उसको भी ऐसे ही अपने जाल में फंसाया होगा।  बाद में उनका क़तल कर के इसकी बीवी के साथ ज़िना कर रहें हैं। 

ग़लत जगह पर आ गया दिल में यह मलाल ले कर मुरीद जाने को पलटा था फिर आवाज़ आई कहाँ जा रहे हो जो काम करने आये थे क्या वोह पूरा हो गया।  अब मुरीद से रहा ना गया उसने कहा कुछ काम नहीं जब आँखों से देख लिया तो उसको यक़ीन करना ही पडेगा यह किसी वली की ख़ानक़ाह नहीं अय्याशगाह है।  अब पीर साहब बेख़बरी से बेदार हुए और आलम ए अर्वाह से आलम ए असबाब में आये और बोले बैठो। 

जो तुमने देखा वोह एक शैतानी साया था तुम्हारी आखों पर ग़फ़लत का पर्दा।  इस ख़ानक़ाह में कहाँ है कोई ख़ातून एक कमरा है और सिर्फ एक आने का दरवाज़ा कहीं कोई ख़ातून नज़र आ रही है।  जब मुरीद की आँखों से शैतानी ग़फ़लत के परदे दूर हुए तो कहीं कोई ख़ातून नज़र नहीं आई।  पीर साहब ने सूली वाले शख़्स की हिकमत मुरीद को बताई।  जो शख़्स दरवाज़े पर सूली पर लटका देखा था वोह दरअसल मेरा नफ़्स था।  जिसको मेने नैज़ों की तेज़ नोक से भेद रखा है और उसको सूली पर टांग रखा है।  जो ख़ातून देखी वोह दुनियां और आलम के असबाब थे जो मेरे जानिब मुतवज्जो थी और में उनसे पीठ कर के ग़ाफ़िल सो रहा था।  मेरे को ना माल दौलत और ना ही दुनयावी साज सामान की हिर्स।  जब मुरीद पर हक़ीक़त आशकार हुई तो बोहोत रंजीदा हुए और अपने पीर के क़दम पकड़ लिए मुझे आपको समझने में ग़लती हुई।  फिर उन्होंने उस बन्दे को मुरीद किया।  

नाज़रीन बताने का मक़सद वही है कभी कभी जब बन्दे के अच्छे दिन का आग़ाज़ होता है तब शैतान जो नहीं चाहता की उसका कुछ भला हो तो ऐसे हर्बे खेलता है ग़ाफ़िल करता है शक और शुकूक में मुब्तला करता है ताके उस बन्दे तक अल्लाह की वोह रेहमत ना पहुंच पाए जो की अल्लाह ने उसके लिए शर्तिया लिखी है।  अब ऐसे मौके पर कामिल पीर का होना बोहोत लाज़िम है जो हर दुनियावी लज़्ज़त और नफ़स पर क़ाबू पा चूका हो। 

ऐसे कामिल पीर शैतान के हर हर्बे की बख़ूबी काट जानते हैं और उसको ना सिर्फ काट डालते हैं बल्कि अपने मुरीदों की किफ़ालत भी बख़ूबी करते हैं।  कियोंके शैतान को तमाम क़ुव्वत और ताक़त खुद अल्लाह ने फ़राहम की है और वोह मोमीनों के हर अच्छे काम पर डाकाज़नी करने को बेताब होता है।  लेकिन अगर पीर कामिल होता है ताक़त वाला क़ुव्वत वाला होता है हर शैतानी हर्बे से अपने मुरीद को बचा लेता है और एक ढाल के जैसे उसको मेहफ़ूज़ करता है।    

सहाफ़ी ज़ुबेर

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