मुझे काफ़िरों से नहीं गिला, क़ौम की रहबरी से है सवाल
बता क्या मिला उम्मत को वतन से मोहब्बत के नाम पर
सहाफ़ी ज़ुबेर
अज़ीज़ नाज़रीन,
जो ज़ुल्म और दहशत हिन्दू ज़ालिम, फ़िरक़ापरस्त ज़ेहनियत उस्तादों की इस सहाफ़ी ने भोगी है हू बहू वही हालात आज आज़ादी के ७५ साल बाद भी मुस्लिम तालिब ए इल्म भोग रहें हैं। उस्ताद के उस ज़ुल्म और दहशत का ज़िक्र इस सहाफ़ी ने अपने मज़मून जुमेरात ३० जुलाई २०१५ को एक और बटवारा ………। में भाई याक़ूब मेमन की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और बीजेपी संघी ज़ेहनियत प्रणब मुखर्जी की क़ियादत में जुडिशल मर्डर (शहादत) के बाद किया है।
यूपी के मुजफ्फरनगर से ऐसा ही मामला सामने आया है जो इस सहाफ़ी और आम तोर पर मुस्लिम तालिब ए इल्मों को स्कूलों में भोगना पड़ता है। एक वीडियो वाइरल हुआ है जिसमे नजर आ रहा है कि स्कूल चलाने वाली दुर्गा वाहिनी की महिला आतंकिनी टीचर क्लास के दूसरे बच्चों से एक मुस्लिम तालिब ए इल्म को पिटवा रही है।
वह एक-एक कर दुसरे मज़हब के तालिब ए इल्मों को बुला रही है और अपने पास खड़े मुस्लिम लड़के के गाल पर चांटा पड़वा रही है। मुस्लिम लड़का आंखों में आंसू लिया जोरों ज़ोर से रो रहा है, लेकिन उस ज़ालिम, दरिन्दनी दुर्गा वाहिनी की आतंकिनी ख़ातून का दिल नहीं पसीज रहा है।
दुर्गा वाहिनी की आतंकिनी टीचर का मुस्लिम बच्चे पर दहशतगर्द हमला मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र खुब्बापुर गांव का है। यहां पर तृप्ता त्यागी नाम की दहशतगर्द महिला टीचर स्कूल चलाती है। तृप्ता कुर्सी पर बैठी हुई है. उसके पास एक तालिब ए इल्म खड़ा हुआ है. पास ही जमीन पर दर्जनों छात्र-छात्राएं बैठे हुए हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। तृप्ता एक-एक कर जमीन पर बैठे छात्रों को बुलाती है और अपने पास खड़े छात्र के गाल पर उन लोगों से चांटा मारने को कहती है. दूसरे छात्र लाइन से आ रहे हैं और ज़ोर से पूरी ताक़त से एक थप्पड़ जड़ देतें हैं। थप्पड़ खाने के बाद मुस्लिम बच्चा दर्द से तिलमिला जाता है। लेकिन उस ज़ालिम के दिल पर उसकी चीख उसके दर्द का कोई असर नहीं होता है।
दुर्गा वाहिनी की आतंकिनी तृप्ता त्यागी के पास ही कुर्सी पर एक मर्द बैठा है जो मुस्लिम लोगों के बारे में बात कर रहा है हो सकता है की वोह तृप्ता का कोई यार दोस्त होगा। जैसा की इस सहाफ़ी ने दुर्गा वाहिनी की जवान लड़कियों और ज़ईफ़ होने के बाद उनके काम काज के बारे में पूरी तहक़ीक़ के साथ कई लेख लिखे हैं।
मजलिस के सरबराह असदुद्दीन ने भी वीडियो को सांझा किया है। मेरा सवाल उन्ही से है कब तक ऐसी ज़लालत और ज़ुल्म मुस्लिम तालिब ए इल्म भोगते रहेगें। क्लास में लड़कियों के सामने ऐसा ज़लील करना स्कूल में कहाँ तक जाइज़ है। इस मुद्दे पर मेने तहक़ीक़ात कर एक किताब लिखी है और उसमे एक वजह ज़लालत को भी मुस्लिम ड्राप आउट रेट में बड़ी वजह बताया है।
फिर असद साहब से में पूछना चाहता हूँ क्या और कुछ देखना बाक़ी है या अब तक़सीम के बारे में बात की जाएगी। आप की मर कर इस अज़ीम वतन की ज़मीन में दफ़न होने की ज़िद्द और दोग़ले वतन की मोहब्बत उम्मत को बोहोत भारी पड़ रही है। आपका क्या आप उस मुक़ाम पर हैं की आपकी नस्लों, भाई, बेटियों और सात पुश्तों को कोई तकलीफ और ज़लालत नहीं होगी। तकलीफ, ज़लालत, हलाकत तो आम मुसलमानों की क़िस्मत में आ रही है।
नाज़रीन चंद्रयान की चाँद पर फ़रेबी लेंडिंग के बाद सोशल मीडिया पर मुल्ले मुबारकबाद देतें नहीं थक रहे थे। फिर सिलसिला जुमे के नाम पर हमदर्दी लेने का शुरू हुआ उस पर भी दिल नहीं भरा तो ना जाने किन किन मुसलमानों को पकड़ लाये की उनकी कारगरदेगी की वजह से इसरों ने इस काम को सरंजाम दिया।
सहाफ़ी जुबेर का मुल्लों को जवाब
लंगूरों की जमात से हो, जो काफ़िरों की कारगरदेगी को एक मुस्लिम पर लाद रहे हो, लोहार की ख़ानदान से हो जो ज़हीन को हथियार और औज़ार बोल रहे हो। क्या बकवास है झूठी खबर कब तक फैलाओगे साइंसदानों में कहीं भी किसी मुल्ले का नाम नहीं है। मेरे पास पूरी लिस्ट है सब काफ़िर हैं।
१. रॉकेट वुमन नाम से चर्चित अंतरिक्ष वैज्ञानिक ऋतु करिधाल श्रीवास्तव का अहम रोल है
२. काफिर धर्मेंद्र प्रताप यादव चंद्रयान-3 की लांचिंग टीम का सदस्य है.
३. इटावा का काफिर अंकुर गुप्ता
४. फतेहपुर का काफिर सुमित कुमार
५. उन्नाव का काफ़िर आशीष मिश्रा
६. मिर्जापुर का काफ़िर आलोक पांडेय
७. अल्लाहाबाद का काफिर हरिशंकर गुप्ता
अगर किसी मुस्लिम का नाम होगा भी तो इसको बाईपास कर दिया अब खड़े रहो आख़िर सफ़ में दरी बिछाने के लिए और कुर्सियां लगाने के लिए। जो हक़ मुस्लिम का था उस पर तो काफ़िर आ बैठे। और तुम वतन वतन खेल रहे हो। बेशर्मों शर्म करो।
दूसरी बात चंद्रयान के चाँद पर पहुंचने से मिल्लत का क्या फायदा हुआ। जिसका ज़िक्र में मेरी २४ अगस्त २०२३ को लिखी नज़म में कर चूका हूँ।
वैसे भी त्यागी नंबर एक के ज़ालिम और मुस्लिम अवाम से हद दर्जे का बुग्ज़ और कीना रखने वाली क़ौम है। त्यागी आम तोर पर दहशतगर्द ज़ेहनियत और मुसलमानों का खून बहाने पर यक़ीन रखते हैं। बॉम्बे का पुलिस कमिशर के.सी.त्यागी जिसने सलमान रश्दी की किताब पर एहतेजाज करते हुए मसुलिम नौजवानों पर गोलियों की बौछार कर दी थी जिसमे १२ मुस्लिम शहीद हो गए थे। १९९३ में सुलेमान बेकरी में बंद कर के दर्जनों मुस्लिम अवाम को ज़िंदा जला दिया था।
छी न्यूज़ की लँगूरनी अदिती त्यागी अपने आप को सहाफ़ी कहती है लेकिन ज़हनियत एक ज़हरीली नागिन के कम नहीं है। मुसलमानों के हक़ की बात करते ही अंगारे सी दहकने लगती है। ज़हर ऐसा की अगर ७ फुट दूर से भी फुफकार दे तो सामने वाला डर जाए।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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