Saturday, 12 August 2023

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम और भारत के मुसलमान

अज़ीज़ नाज़रीन,

क्रिकेट आलमी कप का आगाज़ हो रहा है इस बार इसकी मेज़बानी एक ऐसा मुल्क कर रहा है जो १९९२ के बाद हिन्दू दहशत की पनाहगाह  साबित हो चूका है।  ताहम २०१४ के ग़ुलाम भारत में उनके खुद के अवाम मुस्लिम, क्रिस्टी, सिख और दलितों के साथ अज़ीयतनाक माहौल है।  मुस्लिम, क्रिस्टी क़त्ल, अज़ीयत, मज़हबी तशद्दुत, रियासत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशतगर्दी की वारदात बेहद बढ़ गई हैं।  वैसे भी अक्सरियत अवाम, सयसतदांओं और लंगूर लँगूरनियों को पाकिस्तान का नाम आते ही ज़हर और पारा सर के ऊपर पहुंच जाता है। 

भारत में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ज़हर की मिक़्दार उस हद तक बढ़ चुकी है की खिलाड़िओं में भी उसका असर देखा जा सकता है।  अब जो अज़ीम खिलाड़ी सुनील गवास्कर, सचिन तेंदुलकर, वीरेंदर सहवाग जैसे ज़हरीली सोच पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेल को एक जंग जैसा लेते हैं तो आम भारतीय और सियासतदानों की बात ही अलहदा है। 

भारत जैसे हिन्दू दहशत और ख़ाना जंगी से मुत्तासिर मुल्क में होने वाले वर्ल्ड कप में शिरकत को ले कर पाकिस्तानी क्रिकेट उनकी टीम के तहफ़्फ़ुज़ पर फ़िक्र मंद नज़र आ रही है। 

हिन्दू दहशत के ज़ेरे इंतज़ाम भारत हुकूमत ने वाज़े किया है कि आलमी कप २०२३ (ICC World Cup 2023) में पाकिस्तानी टीम के साथ टूर्नामेंट में वैसा ही बर्ताव होगा जैसा हिस्सा लेने वाली दूसरी टीमों के साथ होता है। 

यहाँ पर में हुकूमत ए हिन्द को याद दिहानी करना चाहता हूँ जो ज़लालत हाल ही में गोवा सबमिट में पाकिस्तान के वज़ीर ख़ारजा जनाब बिलावल भुट्टो की हुई थी इस बात की कौन ज़िम्मेदारी लेगा की वही या उससे भी बदत्तर हालात पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के साथ नहीं होँगे।   लंगूर लँगूरनियाँ, हुकूमत हिन्द और सियसतदाँ तो पानी पी पी कर पाकिस्तान को कोसते रहतें हैं।  फिर तहफूज़ज कौन फ़राहम करेगा।

उसके ऊपर भारत के वज़ीर ख़ारजा का बयान की हम इंसान की हैसियत और मुल्क देख कर इज़्ज़त देतें हैं पाकिस्तान की क़िस्मत में हमारी जानिब से ज़िल्लत ही लिखी है तो वोह उसको मिल रही है।    

फिर फौज, पुलिस, इन्तेज़ामियाँ, एवांन सभी तो ज़ाफ़रानी ज़हर से भर चुके हैं।   दूसरी बात जो मुल्क अपने खुद के शहरियों में महज़ मज़हब की बुनयाद पर फ़िरक़ावारना तशद्दुत फैलाता हो जो मुल्क इन्साफ के नाम पर फ़रेब झूट और दोगला किरदार पेश करता हो जिन पुलिस वालों के ऊपर अवाम के तहफ़्फ़ुज़ की ज़िम्मेदारी होती है वोह महज़ दाढ़ी और कपडे देख कर ट्रैन में नाम पूछ कर बोगी से अलहदा ले जा कर पेंट्री की  बोगी में गोली मार देतें हों उस मुल्क में बेरुन मुल्क वोह भी पाकिस्तानी टीम के साथ हुस्न ए सुलूक की तवक़्क़ो रखना बेवक़ूफ़ी है। 

भारत की फ़िज़ाओं में पानी में सड़क यहाँ तक ट्रैन और हवाई जहाज़ों तक में मुसलमानों, पाकिस्तान और कश्मीर के ख़िलाफ़ ज़हर फ़ैल चूका है।  ऐसे हालात में अगर पाकिस्तानी टीम के साथ कुछ भी नाज़ेबा हालात पेश आएं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। 

जिस मुल्क की फिल्मों में तफ़रीह के नाम पर सिर्फ़ और सिर्फ़ पाकिस्तान,  मुसलमानों और इस्लाम के ख़िलाफ़ ज़हर भरा जा रहा है बेहद अदना दर्जे के डायलॉग और घटिया बात की जाती हो उस मुल्क में पाकिस्तान के साथ कुछ भी मुमकिन है। 

नाज़रीन आपको वानखेड़े स्टेडियम का वोह पिच याद है जहाँ पर इमरान खान की सदारत में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम भारत के साथ खिलने वाली थी।  फिर क्या हुआ एक दहशतगर्द ने पूरा पिच ही खोद डाला था।  मज़े की बात यह रही की ना ही वोह दहशतगर्द पकड़ा गया और ना ही उसके ऊपर कोई हिकमत हुई। 

वहीँ अगर ऐसा कोई भी काम मुस्लिम अवाम करता या पाकिस्तान की मेज़बानी में भारत के साथ ऐसा कुछ होता तो लंगूर बवाल मचा देते।

कूल मिला कर यह सहाफ़ी इस नतीजे पर पहुंचा है जब हाकिम ही मुनाफ़िक़ ज़ेहनियत होगा उसके ज़हन में मुस्लिम, पाकिस्तान कश्मीर नाम आते ही बर्बाद करने का क़त्ल करने का एक जूनून तारी हो जाता है तो तवक़्क़ो कुछ भी अनहोनी की करी जा सकती है। 

जहाँ कहीं भी घरों को गिराने की तबाह करने की बात होती है हुकूमत को मुस्लिम सरे फेहरिस्त नज़र आते हैं तो क्या जुर्म, क़तल, दहशत में अभी तक कोई हिन्दू नज़र आया ही नहीं फिर इजतेमाई मुस्लिम बस्तिओं को क्यों बर्बाद किया गया। 

जिस मुल्क में हुकूमत दुसरे मज़हब में शादी वग़ैरा के क़ानून बनाती है लेकिन उसको इस्तेमाल सिर्फ़ मुस्लिम अवाम पर किया जाता है और  उनको ही गिरफ्तार किया जाता है।  जबकी गिरफ्तार शुदा शोहर की बीवी खुद आ कर बयान देती है में अपनी मर्ज़ी से इस शोहर के निकाह में आई हूँ लेकिन उसको छोड़ा नहीं जाता है। 

फिर ऐसे फ़िरक़ापरस्त ज़हरीले मुल्क में कुछ भी हो सकता है।  मोहताद रहें।  आना है अपनी ज़िम्मेदारी पर आएं।  बाद में पापले पीटने से कुछ नहीं होगा।  जो बिगाड़ होना था हो चूका होगा।  आज जिन बेगुनाह मुसलमानों के घरों को मिस्मार किया वोह सभी रोड पर ज़िन्दगी बसर करने को मजबूर हैं।

जिस मुल्क में लंगूर लँगूरनियाँ पाकिस्तान के उस वक़्त के वज़ीर ए आज़म इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ इश्तेआल अंगेज़ी की झूटी फ़रेबी खबरे चलाते हों उनकी सादगी का मज़ाक़ बना कर उनकी अज़मत को कम करतें हो उनकी अहलिया एक खातून के ख़िलाफ़ झूट फ़रेब फैलातें हो की वोह काला जादू करती हैं ऐसा कर के उनकी अज़मत और वक़ार को कम करतें हो उस मुल्क में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के साथ हुस्ने सुलूक होगा इसकी कोई जामिन नहीं है।     

सहाफ़ी ज़ुबेर

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