Monday, 6 March 2023

आज़ाद रियासतें तवज्जो दें।

आज़ाद रियासतों के हाकिम_________ 

ग़ुलाम हिंदुस्तान की तमाम आज़ाद रियासतों (ग़ैर भाजपा) के हाकिमों को दरख़्वास्त की जाती है ग़ैर भाजपाई आज़ाद रियासतों में इन अडानी अम्बानी इंडिया कंपनी के एजेंट भाजपाईयों, संघियों शिद्दत पसंद हिन्दुओं को क़तल करना शुरू कर दो।  पुलिस इनका शिकार करे। एक बार ऐसा मोडल हिट हो गया तो इन ग़द्दार बीजेपी वालों के लिए देहशतगर्दों के लिए और शिद्दतपंसदों के लिए हिंदुस्तान की ज़मीन तंग हो जाएगी। और इंडिया गुलामी की ज़ंजीरों से फिर आज़ाद होगा। 

जब तमाम दहशतगर्द मारे जाए हर ग़द्दार बीजेपी का कारकून संसद विधायक मारा जाए तब शिकार जंगली सुव्वरों का करना मोदी, योगी, अमित, नाथूराम मिश्रा, शिवराज, विस्वा सरमा और तमाम छोटे बड़े सुव्वरों का डुगडुगी बजाते हूए गावों वाले इनके पीछे भागेंगे और इनको पीछे से पुलिस गोली मारेगी। जैसा की अफ़ग़ानिस्तान का सदर रूसी एजेंट नजीबुल्लाह और उसकी तमाम फौज को मारा था। नजीब को ज़िबह कर के तीन दिन तक सदर महल के गेट पर लटका रखा था।

ग़ुलाम भारत की हर आज़ाद रियासत ग़ैर भाजपाई हुकूमत में इन भाजपा वालों हिंदुस्तान के गद्दारों का अंग्रेज़ी गुलामों का जीना हराम कर दो। हर छोटी सी बात पर गिरफ्तार कर लो। फिर एक चेतावनी दे रहा हूँ जैसा की कांग्रेस, सोनियां गांधी, मनमोहन सिंह, वज़ीरे दाख़ला, वज़ीर अमूर ख़राजा, सदरे जम्हूरिया, सी.जे.आई. और बोहोत से ओहदेदारों को २०११ से फ़रवरी २०१४ तक इस बीजेपी और संघ के ऊपर हिकमते अमली करने के लिए कई चेतावनियां दी थी। उस वक़्त कांग्रेस ख़ौफ़ज़दा हो गई आज भुगत रहे हो। अगर तुमने ग़ैर भाजपाई हुकूमतों में भाजपाइयों को नहीं क़तल किया तो वोह तुम्हारे नुमाइंदों को अपनी हुकूमतों में मौत दे देगें। 

दरअसल मुस्लिम तालीमी और सामाजिक तंज़ीम सिमी को हिन्दू दहशत और बीजेपी के दबाओ में कांग्रेस ने बेन किया था।  तब हिन्दू शिद्दत पसंद और ज़ालिम तरीन, दरिंदा सिफ़त दहशतगर्द तंज़ीम बजरंगदल, संघ और विहीपी को शकील एहमद की क़यादत में २००८ में तक़रीबन बेन करने की कवायत पूरी हो गई थी।  लेकिन सब कवायत धरी की धरी रह गई।  पहले उस मसौदे से संघ का नाम अलहदा किया फिर वीहपी का किया और बिलआख़िर बजरंगदल का भी नाम नहीं था और बेन की हिकमते अमली ठन्डे बस्ते में चली गई।  

यह आज से नहीं बल्कि बरसों से ऐसा होता आया है मुस्लिम तंज़ीमों को झूठे सच्चे केस लाद कर उसको फ़ौरन बेन कर दिया जाता वहीँ हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीमों पर कोई हिकमत नहीं होती।  वहीँ अब्दुल के फ़रज़न्द को झूठे सच्चे केस में गिरफ्तार किया जाता है और अगरचे उसका क़तल ख़ाकी दहशत के हाथों हो गया तो उस मासूम को मुजरिम ज़ाहिर कर के ख़ाकी की ताज पोशी की जाती है। वहीँ अगर किसी हिन्दू ब्राह्मण का क़तल भी हो जाता है तो चारों जानिब ख़ामोशी छाई रहती है।

बात उलटा प्रदेश की ही कर लेते हैं जहाँ बरोज़ पीर ६ मार्च २०२३ को एक ब्राह्मण ४८ साल के अनिल चतुर्वेदी का क़तल हो जाता है।  कियोंके गोरक्षकों ने अपनी गाये को उस ज़मीन पर बाँध दिया था जिसपर तनज़िया था।  जिस पर अनिल ने एतेराज़ किया बस फिर क्या था गोरक्षकों के दहशतगर्द कुल्हाड़ी तलवार त्रिशूल भाला ले कर अनिल ब्राह्मण पर टूट पड़े।  और उनके हाथ पैर गले पर इतने वार किये की जगह पर ही ब्राह्मण अनिल हलाक हो गए।  बरोज़ जुमे ३ मार्च को भी मक़तूल के अहले ख़ाना बेहेन और वालेदा से भी इसी मुद्दे पर देहशतगर्दों ने मार पीट की थी।

दूसरी बात अनिल कोई मामूली इंसान नहीं थे या गुंडा मवाली जिसकी मौत की खबर पर लंगूर और लँगूरनियाँ बवाल मचा देतें हैं ब्रेकिंग न्यूज़ चलाते हैं वोह एक बड़ी कंपनी में मैनेजर थे।  तीसरी बात ब्राह्मण थे।  इससे यह बात भी साबित हो गई की उल्टा प्रदेश में गुंडों अपराधियों की झांकी है योगी से लेकर उल्टा प्रदेश का पुलिस हेड लंगूर लँगूरनियाँ उनके चलने हगने मूतने मरने सब पर ब्रेकिंग न्यूज़ बड़ी बड़ी हेडलाइंस में ख़बर चला देंतें हैं।  और एक ब्राह्मण मैनेजर के क़तल पर ख़ामोशी छा जाती है, निल बटे सन्नाटा।  उसकी वजह है अगर गोरक्षकों ने एक ब्राह्मण मैनेजर को क़तल किया ऐसी ब्रेकिंग न्यूज़ बोल कर ख़बर चला दी तो वोट नहीं मिलेगें। लेकिन अब्दुल की मौत की ख़बरें चलाई तो वोट मिलेंगे।  लेकिन इस तमाम गहमा गहमी में बोहोत तबाही जो हो चुकी तुम्हारी नस्लों की वोह तुम देख ही नहीं पाए।  बदला लेने की चाहा में इतने अंधे हो गए की ख़ुद तुम्हारे घर में आग लग गयी और तुम बहार की बातें करते रहे।

फिर इस क़तल से यह बात भी साबित हो गई योगी का गोपालक ब्राह्मण मोहब्बत सब एक ढोंग है छलावा है, गाये की सेवा करने वाला।  दअसल योगी और बीजेपी सरकार ब्राह्मण मुख़ालिफ़ है, और योगी उल्टा प्रदेश में ठाकुर राज लाना चाहता है।  ब्राह्मण को नीचा दिखा कर ठाकुरों को उनके ऊपर मुसल्लद करना चाहता है।  योगी हुकूमत में अभी तक कितने ब्राह्मण मारे गए।  बल्कि भाई दुबे के क़तल में तिवारी, मिश्रा, जोशी जितने भी पुलिस वाले थे सब ब्राह्मण ही थे जो मारे गए।  काहे को कोई ठाकुर नहीं मारा जाता और काहे को दुबे के घर पर छापा मारने कोई ठाकुर पुलिस वालों की टीम नहीं गई थी।  यह तो उस क़ौम से उसी क़ौम के इंसान का क़तल करवाने जैसा है।  ताके हमारे फौजी मेहफ़ूज़ रहें।   अब जिस ब्राह्मण को मौत के घाट उतारा अब कोई एक्शन नहीं लेगा योगी। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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