अज़ीज़ नाज़रीन
ईरानी मुजाहिदों ने यहूद दहशत को तबाह करने के लिए बेक़रार है। नाज़रीन आप को भारत की आज़ादी याद है १९४७ में भारत को आज़ादी मिली थी। और १९४८ में यहूद दहशत का फलीस्तीन पर क़ब्ज़ा हुआ था। भारत की २०१४ में ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की ग़ुलामी के बाद इधर जब भी भारत की तक़सीम और आज़ादी होगी उधर यहूद दहशत इजराइल का जनाज़ा निकलेगा। इधर भारत हिन्दू दहशत से आज़ाद हो कर पाक होगा उधर फ़लस्तीन यहूद दहशत से आज़ाद होगा।
इस्लाम
दुश्मन मुमालिकों के लिए एक के बाद एक मनहूस ख़बरों से परेशान होना लाज़िम है। भारतीय ज़ाफ़रानी साधू ने फ़रवरी माह में एक अवामी
इजलास में नमाज़ और मुसलमानों पर नाज़ेबा झूठी तोहमत तराशी के चलते अब दुबाई की शहज़ादी
हिन्दा अल मक़तूम ने साधू की कंपनी पतंजली के तमाम आशियात की खरीद फ़रोख़्त पर पाबन्दी
लगा दी है।
नाज़रीन
में इस्लामिक मुमालिकों से २०२१ से गुज़ारिश कर रहा था अगर आलमी हिन्दू दहशतगर्दी पर
क़ाबु पाना है तो भारत को माशी शाकिस्त देना होगा और इस्लामिक मुमालिकों में पल रहे
ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों की पैदावार को केमिकल का छिड़काव कर के हलाक करना होगा। बचे हुए दहशतगर्दों को या तो जेल में सख्त अज़ीयतनाक
हालात में रखना होगा या उनको इस्लामिक मुमालिकों से बहार निकालना होगा। यह तमाम हिन्दू दहशतगर्द मुस्लिम मुल्कों से कमा कर भारत
भेजते हैं और वोह पैसा दहशतगर्दी और मुसलमानों के क़त्ले आम में लगाया जाता है।
ईरान और क़तर ने मेरे मज़मून पर हिकमते अमली इख़्तेयार की और ईरान ने भारत के तमाम आशियात पर पाबन्दी लगा दी। वैसा ही क़तर ने किया। अब आहिस्ता आहिस्ता कुवैत, सऊदी भी भारत पर पाबन्दी लगाने वाले मुमालिकों की फेहरिस्त में आ गए हैं।
वैसे तो पुलवामा पर अपने ही फ़ौजिओं को मौत के घाट उतार कर पाकिस्तान पर इलज़ाम लगा कर आलामी बरादरी से जंग में भारत का साथ देने जैसी फ़रेबी, दोगली और झूटी हिकमते अमली पर भारत रूसवा हो चूका है और पाकिस्तान पहला इस्लामिक मुल्क बना था जिसने सबसे अव्वल भारत के तमाम आशियात पर पाबन्दी लगाई थी। भारत ने भी वैसा ही किया लेकिन भारत में पाकिस्तानी आशियात इतने मक़बूल हैं की अवाम दो गुना पैसा दे कर दुबाई के रस्ते पाकिस्तानी आशियात मांगा रहे हैं।
नाज़रीन
इल्म रहे की भारत का ज़ाफ़रानी दहशत उसके बढ़ते हुए जंगी तय्यारे तबाह होने के सबब पहले
ही दीफ़ाई फ़ौजिओं के सामने हथियार डाल चूका है।
सहाफ़ी ज़ुबेर
No comments:
Post a Comment