Saturday, 18 March 2023

रमज़ान पर नितीश के हुकुम से ज़ाफ़रानी कीड़ों का कुलबुलाना।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज आप हज़रात के दरमियान आज़ाद रियासत बिहार में रमज़ान में नितीश बाबू का मुस्लिम अवाम के लिए सहूलत का सर्कुलर को ले कर हाज़िर हुआ हूँ।   नीतीश कुमार की ज़ेरे इंतज़ाम आज़ाद रियासत बिहार हुकूमत ने रमजान के मौक़े पर मुस्लिम मुलाज़िमों के लिए बड़ा फैसला लिया है. बिहार हुकूमत में काम करने वाले मुस्लिम मुलाज़िम और आला ओहदेदारों के लिए रमजान के महीने में  ड्यूटी के वक़्त में तरमीम की गई है।  नए हुकुमनामे के मुताबिक मुस्लिम मुलाज़िम दफ्तर एक घंटा पहले आ कर एक घंटे क़ब्ल दफ्तर से जा सकेंगे. 

नाज़रीन तवक़्क़ो भी की जा रही थी ऐसे हुकुम ग़ुलाम भारत में कोई आज़ाद रियासत नाफ़िज़ करे और कीड़ों का उछल कूद ना हो।

सबसे पहले भारत को ग़ुलाम बनाने वाले दहशतगर्द तंज़ीम बीजेपी इस हुकुमनामे के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई।  ऐसा ही हुकुम उसको हिन्दू अवाम  लिए के लव रात्री पर चाहिए।  ऐसे हुकुम पर सबसे पहले मोदी अकीदतमंद, ज़ालिम दरिंदा कीड़ा योगी आदित्यनाथ, शिद्दतपसन्द काफ़िर, संघी दहशतगर्द और बीजपी वालों को अंगार लगना मुतवक़्क़ो था और इस हुकुम के ख़िलाफ़ बीजेपी ही आई।  अभी तीन रोज़ क़ब्ल तो मोदी, योगी बीजेपी वाले मुसलमानों के चापलूसी को आतुर थे। बीजेपी मुस्लिम दिलों को  जीतने की हिकमत करेगी।  ऐसे बीजपी मुस्लिम अवाम का दिल जीतेगी क्या?  संघ बोल रहा था की मस्लिम अवाम में जा कर उन के अंदर संघ के लिए एतेमाद जगायेगा।  अभी तो आज़ाद रियासत बिहार ने महज़ एक हुकुम नाफ़िज़ किया है जिसमे मुस्लिम माश, रोज़गार और तालीम का तो कोई ज़िक्र ही नहीं है और जितने भी कीड़े कुलबुला रहे हैं वोह सभी कट्टरपंथी काफिर संघी और बीजेपी ज़ेहनियत से ही हैं।   अगर तमाम आज़ाद हुकूमतें अपनी रियासतों में मुस्लिम आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की बात भर कह दें तो देखो यह ज़लील तंज़ीम ज़ाफ़रानी बीजेपी सबसे पहले बवाल काटेगी।   

बीजपी सबसे पहले हिन्दू खतरे में आ जाएगा बोल कर हिन्दू अवाम को ख़ौफ़ज़दा करेगी फिर ऐसा ही क़ानून हिन्दू अवाम को चाहिए और ऐसे ही उनके तेहवारों पर सहूलियत दी जाए।  फिर होगी बराबरी करने की होड़।  सबको एक जैसे बर्ताव की दुहाई।  जैसे की दहशत की वालेदा पाकिस्तानी बेगम ने बोल दिया की मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड की तरह हिन्दू बोर्ड भी होना चाहिए।  बीजपी वालों तुम से नहीं हो सकेगा मुस्लिम अवाम  का दिल जीतने का काम।  तुम लोग वही काम करो जो तुम से हो सकता है।  

जब बीजेपी और मोदी ने एलान ऐ आम किया था की बीजेपी मुस्लिम अवाम का दिल जीतने का काम करेगी तभी बोला था तुम दिल जीतोगे अभी रमज़ान आ रहें हैं होने दो ज़रा सा कोई एलान सबसे पहले तुम लोग ही उछल कूद करोगे।  फिर रिजर्वेशन की बात कही थी।  चलो जीतो दिल ऐसा ही हुकुम तमाम ग़ुलाम भारत के बीजेपी हुकूमतों में दो।  बल्कि इससे ज़्यादा बढ़ कर सहूलतें दो।

नाज़रीन दिसम्बर २०२२ को जब चीन ने भारत की मज़ीद २०० किलोमीटर ज़मीन पर क़ब्ज़ा किया था और २६ भारतीय फ़ौजिओं को हलाक कर दिया था उस हमले की तकलीफ वतन परास्त असदुद्दीन को सबसे ज़्यादा हुई थी।  और उन्होंने मोदी इन्तेज़ामियाँ को कटघरे में खड़ा किया था।  लेकिन भारत के ग़द्दार अँगरेज़ परास्त लंगूर-लँगूरनियाँ मोदी इन्तेज़ामियाँ को मेहफ़ूज़ करने में लगी थी और असदुद्दीन को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे थे।  उसमे भारत के ग़द्दार भारत की फौज से किनाराकश हुआ एक संघी दहशतगर्द असदुद्दीन की शबाहत कुत्ते से करता है। 

अब वही फ़लसफ़ा बीजेपी पर लागू होता है।  कुत्ते की दुम को १२ बरस भोंगली में रखो जब निकालोगे टेडी ही रहेगी।  बीजेपी लाख मुस्लिम अवाम के फलाह की बड़ी बड़ी बातें कर ले, उनका दिल जीतने की मीठी मीठी बातें कर ले लेकिन जब भी मुस्लिम अवाम को फायदा पहुंचाने की कोई भी कवायत होगी उसको सबसे पहले डेरेल यह बीजपी ही करेगी।  इसको हर मुद्दे पर हिन्दू मुस्लिम करने की आदत जो है।  कुत्ते की दुम।  

अब ऐसे हुकुम से भी बीजपी को तकलीफ हो रही है जो मुसलमानों को कोई माशी, तालीमी या रोज़गार में कोई नफ़ा नहीं दे रहा है।  अगर एक घंटे क़ब्ल छोड़ा जा रहा है तो एक घंटे क़ब्ल बुलाया भी जा रहा है इस हुकुम में ना ही मुस्लिम अवाम को कोई फायदा दिया जा रहा है और ना ही हुकूमत के काम काज में कोई नुकसान या ख़सारा हो रहा है।  बीजेपी को ऐसा मुस्लिम अवाम से बारबारी करने की होड़ हो गई है तभी तो गाये के ज़बीहे पर पाबन्दी लगवा दी और एतेराज़ यह की हमारे मज़हबी अक़ीदे की ख़िलाफ़वर्ज़ी होती है।  जब्कि मज़हबी अक़ीदा नहीं बल्कि मुस्लिम अवाम से बराबरी करनी होती है मुस्लिम गाये का गोश्त खातें हैं उसको देख कर हिन्दू भी खा रहे है लेकिन ज़ाहिर नहीं कर सकतें हिन्दू मज़हब खतरे में आ जाएगा तो मज़हब के नाम पर गाये के ज़बीहे पर पाबन्दी लगा दी।  अब ना हम खायेगे और ना तुमको खाने देंगें। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...