अज़ीज़ आलमी बरादरी,
आज कल भारत में एक हैवान (गाये) को मुक़द्दस बोल कर उसकी इबादत करने की नई होड़ चल पड़ी है। मज़े की बात तो यह है की इस जानवर को मुक़द्दस जानने वाले खुद इसके गोश्त की तिजारत करतें हैं लेकिन उसके नाजिस्त (गोबर, गौ मूत्र) को मुक़द्दस जान कर दूसरों पर उसकी ताज़ीम लाज़िम करतें हैं।
में आलमी बरादरी से गुज़ारिश करूँगा की अब से भारत से जो कोई भी हिन्दू अवाम या सियासतदां बेरुन मुल्क दौरे पर जाए या बेनक़वामी खेल जगत से गुज़ारिश करूँगा अब से कोई भी भारतीय खिलाड़ी किसी भी खेल में हिस्सा ले तो उसको गाये का गोबर दिया जाए और गौ मूत्र पिलाया जाए। इससे हिन्दू सक़ाफ़त (संस्कृती) भी बची रहेगी और अकीदतमंदों (भक्तों) का जो ग़ुस्सा ग़ुबार है की बेरुन मुल्कों में हमारी वालेदा के पाख़ाने पेशाब की इज़्ज़त नहीं होती वोह भी कम होगा। रोज़ सुबह आधा किलों गाये का गोबर अगर भारतीय टीम खा लेगी तो उससे खिलाड़ियों का दिमाग़ भी चुस्त रहेगा और उनको कोहिनूर हीरे की क़ुव्वत मिलती रेहगी। भारत के खिलाड़ियों या सियासतदानों के इस गौ मूत्र पीने और गोबर आहार देने में मुस्लिम, क्रिस्टी और सिख अवाम को शामिल नहीं किया जाए। हाँ अलबत्ता जो मुस्लिम, क्रिस्टी, सिख बीजेपी से मुनसलिक है उसको दिया जाए।
अगर
गोबर आहार और गौ मूत्र पिलाने पर भारत की हुकूमत की जानिब से या भारत के खेल वाज़ारतख़ाने
से कोई एतेराज़ दर्ज किया जाता है तो उनको वाज़े अलफ़ाज़ में जवाब दिया जाए आपके मुल्क
में तो गाये के गोबर और पेशाब को मुक़द्दस माना जाता है। हम आपके कल्चर की नदामत नहीं कर सकते आप हमारे मेहमान
हैं और आपको वही दिया जाएगा जो आपके मुल्क में मुक़द्दस माना जाता है जिसको आप दुसरे
अवाम पर लाज़िम करते हो।
ज़ाफ़रानी तंज़ीम बीजेपी का एक सर फ़िरा तर्जुमान पड़ा लिखा गवार जाहिल संबित पात्रा इतना गोबर अक़ीदत में मशग़ूल हो गया की अवामी टीवी चैनल पर बैठ कर बोलता है आधा किलो गाये का गोबर कोहिनूर हीरे से ज़्यादा क़ीमती होता है। अरे संबित पड़ा लिखा गधे (मोदी) पर लादा वैसा हिसाब मत करो। अगर इतना क़ीमती है गाये का गोबर तो आज भी भारत में गांव की क्या हैसियत है। किसान आज भी खुदकशी कियों कर रहें हैं, जिनके पास गायों का रेवड़ है और हर रोज़ आधा किलों नहीं बल्कि मनों से गोबर निकलता है। अगर इतना क़ीमती है गाये का गोबर तो आज भी भारत गरीब मुल्कों की फेहरिस्त में सबसे अदना दर्जे पर कियों फ़ाइज़ है। भिकारी, मुफ़लिसी और ग़ुरबत क्यों भारत के अवाम का मुक्क़द्दर बन गई है।
जय शाह को अब से दुबाई, अबू धाबी और तमाम इस्लामिक मुल्कों में आला तरीन खाने देने की हाजत नहीं है। उसको गोबर आहार दिया जाए और बिसलरी की जगह गौ मूत्र पीने को दिया जाए। यह बीजेपी ही है जो हर मसले पर मुस्लिम अवाम को अपनी अक़ीदत के हिसाब से करवाती है। गोबर आहार तुम्हारे लिए मुक़द्दस है तो तुम खाओ तुम पीओ पेशाब दूसरों पर कैसे लाद सकते हो। तुम्हारी मुक़द्दस चीज़ और उसकी अज़मत हम करें तुम पांच सितारा खाना खाओ। राम तुम्हारे, भारत तुम्हारा गाये तुम्हारी गोबर आहार तुम खाओ हम कहाँ से आये बेचारे।
एक लंगूर है सुधीर चौधरी (तिहाड़ी) उसके हिसाब से अब जर्मनी, अमेरिका, इंग्लैंड और बोहोत से मग़रिबी मुल्क भारत से गाये के गोबर का इम्पोर्ट करेगें। भारत को मोदी जी की वजह से करोड़ों रूपये का मुनाफा होगा। गाये का गोबर फ़िज़ाई तय्यारों में भर कर बेरुन मुल्क पहुंचाया जाएगा।
हर मुद्दे पर भारत के लंगूर-लँगूरनियाँ पाकिस्तान में आटे की किल्लत, दालें मॅहगी हुई खाने के आशियात मेहगे हुए लेकिन भारत के १०० करोड़ हिन्दू अवाम गोबर आहार खा रहें हैं लेकिन क्या वजह है की भारत में कभी गोबर कम नहीं होता और ना ही गोबर भक्ति में कमी आती है।
पुलवामा मुद्दे पर भारत के वज़ीरे ख़ारजा बोलतें हैं की हमने पुलवामा का बदला लिया और घर में घूस कर मारा। में उनसे सिर्फ इतना पूछना चाहता हूँ। भारत पहले बताये की अभिनन्दन आज कल कहाँ हैं और क्या कर रहें हैं। क्या वोह पाकिस्तान की जेल में नहीं हैं। अगर वोह भारत वापिस आ गए हैं तो क्या वोह जंग में पकडे गए फौजी के अदला बदली की मुहायदे की खिलाफ़वर्ज़ी नहीं है। बग़ैर किसी शर्त और पाक फ़ौजिओं की रिहाई के बदले कैसे पाकिस्तान ने अभिनन्दन को भारत को सौंप दिया
क्या अभिनन्दन अभी तक पाकिस्तान की जेल में क़ैद हैं। भारत हुकूमत सदन में इस बात को वाज़े करे।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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