Friday, 7 October 2022

आलमी बरादरी भारत से क़ता ताल्लुक़ करे।

अज़ीज़ नाज़रीन

हिन्द से आलमी बरादरी का समाजी, सियासी और माशी नाता पूरी तरह मुनतक़ा करना चाहिए।  उसकी कुछ वाजिब वजह बता हूँ। 

१.           जिस हिसाब से हिन्द में २०१४ के बाद ज़ाफ़रानी दहशत हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम फल फूल रही है उससे आलमी अमन को ख़तरा है।   तमाम हूकूमती और जमहूरी इदारे सदरे जम्हूरिया, आला अदालत, रिज़र्व बैंक, फौज, पार्लियामेंट, इन्तेख़ाबी कमीशन, इन्तेज़ामियाँ सभी ज़ाफ़रानी दहशत के ज़ेरे इंतज़ाम काम कर रहें हैं।    भारत के जोहरी असलाह और जोहरी रिएक्टर्स भी दहशतगर्दों के हाथों में हैं। 

२.          भारत में तंज़ीम बीजेपी के ज़ेरे इंतज़ाम हुकूमतों के अंदर बदउनवानी (corruption). के बढ़ते हुए वाक़ियात।  जिसकी वजह से असली मुजरिम मौज उड़ा रहें हैं और मासूम जेलों में क़ैद हैं।  बदउनवानी के सबब ही भारत की कफ सिरप के चलते गाम्बिया में ६६ मासूम बच्चों की हलाकत हुई।  आलमी अदालत में भारत के ऊपर इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी, नस्ल कूशी और धोखा धड़ी का मुक़दमा दर्ज कर केस चलना चाहिए।  वैसे भी भारत में हर आशियात मिलावट से भरी पड़ी है।  मिलावट ही मिलावट।  हुकूमत है लेकिन हक़ गोई नहीं अदलिया है लेकिन इन्साफ नहीं इंतेख़ाब हैं लेकिन ईमानदारी नहीं।  सब कुछ गोल मोल है घपले बाज़ी।  ऐसे मुल्क के ऊपर फौजी हिकमत करने की ज़रुरत है।  उसके बाद माशी, समाजी और सियासी अलहदगी करना चाहिए।  क्योंकि ज़्यादा मुनाफ़ा लेने के चक्कर में तीसरे दर्जे की दवाई बनाई गई भारत में।  फिर भारत हुकूमत भी पूरी तरह ज़िम्मेदार है ज़ब्ते मय्यार (Quality Control)  चेक क्यों नहीं किया गया जब बेरुन मुल्कों में दवाई जैसी आशियात बहार जा रही है तो पूरी तरह से तहक़ीक़ात कियों नहीं की गई।

गाम्बिया में ६६ बच्चों की मौत की ज़िम्मेदार हूकूमते हिन्द है और उसके ऊपर माक़ूल हिकमते अमली होना चाहिए।    क्योंकि अगर हूकूमते हिन्द ने ग़फ़लत और नाहीली नहीं दिखाई होती और कड़क ज़ब्ते मय्यार (Quality Control)  चेक किया होता तो आज भारत आलमी बरादरी के सामने ज़लील और रुस्वा नहीं होता।  लेकिन हूकूमते हिन्द को अपने मुल्क की इज़्ज़त और बेरुन मुल्क जाने वाली आशियात की तहक़ीक़ात की नहीं बल्कि हूकूमते हिन्द को तो बेगुनाह मुसलमानों के ऊपर दहशतगर्दी के इल्ज़ामात लगाने की पड़ी हुई है मदरसों की तहक़ीक़ात की जल्दी है लेकिन तुम्हारे ख़ुद के वतन में तुम्हारे ख़ुद के लोग तबाही मचाये हुए हैं उसकी कोई फ़िक्र नहीं।  अगर मदरसों की झूटी फरेबी तहक़ीक़ात करने के बजाये जो हिन्दू दहशत की फैक्टरियां भारत में फल फूल रही हैं उनकी तहक़ीक़ात की होती तो ऐसी ज़लालत भारत के हाथ ना लगती।  लेकिन वोह दवाई की फैक्टरी किसी संघी,  बीजीपी वाले या कट्टरपंथी काफिर की होगी।  तभी दवाई में ज़हर मिलाया जा रहा है दवाई दुसरे या तीसरे दर्जे की है उसकी कोई जांच नहीं की गई।   ज़ब्ते मय्यार (Quality Control) चेक नहीं किया गया।

जैसा की भारत में बीजेपी की हुकूमत में बदउनवानी बेहद बढ़ गई है।  अगर बीजेपी की हुकूमत का कोई नुमाइंदा मरकज़ या सूबे से क्वालिटी चेक के लिए आया होगा तो उसको खरीद लिया होगा।  अब बेइज़्ज़ती भारत की हो रही है।  वैसे केंद्र सरकार तो दीगर प्रदेशों की हुकूमतों को गिराने में ज़्यादा दिलचस्पी रखती है।  सी बी आई, एन आई तो बहुमत वाली गैर बीजेपी सरकार को गिराने और उनके रकूने असेंबली को गिरफ्तार करने के चक्कर में रहतें हैं।  अगर सही इंसान को गिरफ्तार किया होता तो ज़लालत भारत की नहीं होती।  हाँ एक नुमाइंदा और एक पैसे देने वाला भाजपा का कम हो जाता।  लेकिन साख भारत की बनी रहती। 

Zuber

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