Sunday, 16 October 2022

कर्नाटक पहुंचे दीफ़ाई फौजी, पहले ही हमले में ९ हलाक।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

जैसा की आप तमाम हज़रात को इत्तेला दी जाती रही है की अंग्रेज़ों के ग़ुलामों माफ़ी वीरों हिंदुस्तान के दुश्मनों, वतन के असासे फ़रोख़्त करने वाले ज़ालिमों, दरिंदों, जल्लादों, नाइंसाफों से हिंदुस्तान को आज़ाद करवाना ही दीफ़ाई फ़ौजिओं का मक़सदे ऊला है।  और इस जंग में उनको काफी कामयाबी मिल रही है।  जिस तरह अंग्रेज़ वतन के असासे ले जा कर दरिया थेम्स में फेंक देते थे फिर जो आशियात उनके यहाँ नहीं होती थी या जो उनको पसंद आती थी उसको निकाल कर अपने यहाँ रख लेते थे। वही सोच और हरकत दहशतगर्द करतें हैं तमाम भारत के आशियात को या तो फ़रोख़्त कर देतें हैं या नागपुर के हेडक्वार्टर में ले जा कर आरास्ता कर देतें हैं।  फिर उसको अपने किसी दहशतगर्द ज़न्खे के नाम पर मंसूख़ नाथूराम, साधुराम, गोलवलकर, सावरकर या कोई और दहशतगर्द जिसने कभी वतन आज़ादी में कभी कोई नायाब किरदार नहीं निभाया उसके नाम पर बड़ी बड़ी बातें लेखना शुरू कर देतें हैं।  बुलबुल  

लेकिन आहिस्ता आहिस्ता जैसे अंग्रेज़ों से वतन को आज़ाद करवाया था वैसे ही उनके ग़ुलामों से इन देश को आज़ाद करने का सिलसिला शुरू हो गया है।  इस ज़िम्न में कारवां ऐ आज़ादी ऑपरेशन फिनिश संघी कश्मीर से चला था तमाम शुमाल दिल्ली मिला कर राजिस्थान सूबे दरमियान (MP) गुजरात महाराष्ट्र होता हुआ पंहुचा कर्नाटका।  दूसरी जानिब आसाम, मग़रिबी बंगाल, झारखंड, बिहार और आंध्र प्रदेश में भी दीफ़ाई फौजों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है।      

जहाँ तक कर्णाटक का सवाल है पहले ही हमले में शिद्दत पसंद हलाक हुए हैं।  जहाँ हासन में ज़बरदस्त तसद्दुम हुई और दो आमने सामने की फौजों के बीच चली इस जंग में सुब्रमण्य और हसनंबा मंदिर से मश्क कर के लौट रहे दहशतगर्द जगह पर ही ढेर हो गए।  सूबे कर्णाटक के हिन्दू दहशतगर्दों ने ढेर हुए अपने साथिओं को टेम्पो काट और खींच कर बाहर निकाला जहाँ ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को शिफ़ा खाने ने मारा हुआ एलान किया है। 

ख़बर है की दिफ़ाई फ़ौजिओं (फरिश्तों) और जिस टेम्पो में सवार हो कर हिन्दू दहशतगर्दों आये थे ज़बरदस्त जंग हुई जिसकी वजह से हिन्दू दहशतगर्दों के टेम्पो के परखच्चे उड़ गए और अतराफ़ में चीख़ पुकार मच गई।  आस पास से अवाम दौड़ कर मदद को आया लेकिन तब तक दहशतगर्दों की रूह परवाज़ कर चुकी थी और दिफ़ाई फौजी (फ़रिश्ते) उनके जिस्म से रूह क़ब्ज़ कर चुके थे। 

अक्टूबर में महाराष्ट्र में दो बड़े हमले के बाद यह कर्नाटक में दिफ़ाई फ़ौजिओं का यह पहला जंगी हमला है। 

नाज़रीन जैसा आप हज़रात को इत्तेला दी जा चुकी है की इस जंग में हर हाल में हिन्दू दहशतगर्द, शिद्दत पसंद काफ़िर, बीजेपी वालों की शाकिस्त होगी।  जैसा की पहली और दूसरी ललकार में मोदी को इनतेबह (वार्निंग) दी जा चुकी है की तू यह जंग हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत पायेगा।  और दूसरी वार्निंग में बोला है की अब देखना यही होगा की कितनी भारत की बर्बादी करने के बाद मोदी अपनी शाकिस्त मानता है और हुकूमत मुस्लिम क़ियादत को सोंपता है। 

ख़ैर अभी के लिए जंग जारी रहेगी।  ऑपरेशन फिनिश संघी दहशत, बीजेपी, शिद्दत पसंद काफ़िर चालू रहेगा।  जब तक एक एक संघी दहशत, बीजेपी, शिद्दत पसंद काफ़िर को उनके ही खून से ग़ुस्ल नहीं करवा दिया जाता या मोदी अपनी शाकिस्त नहीं मान जाता यह जंग जारी रहेगी। 

 

Zuber

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