अज़ीज़ नाज़रीन,
आज
का मज़मून उन मुनाफ़िक़ों पर सख़्त तन्क़ीदी है जो पाकिस्तान का नाम आते ही आग बबूला हो
जातें हैं। नाज़रीन जिस हिसाब से दौरे मुनाफ़िक़त
में कौन अपना है और पराया यह तस्सव्वुर करना बोहोत ही मुश्किल है। उसी तरह कौन सच्चा मुसलमान है कौन संघी जासूस यह भी समझ पाना मुश्किल है। हर शक़्स ज़ाहिरी अपने आपको इस्लाम का अलम्बरदार और
मुसलमानों का ख़ैरख़्वाह बताता है। लेकिन उसकी
असलियत जब कुफ्र से जंग और इस्लाम दुश्मन को हलाक करने की गुफ्तुगू पर भारत से हमदर्दी
ख़ास मोदी, बीजेपी और संघी नरम रुख से ज़ाहिर हो जाती है। फिर हदीसों का बयान हर इंसान पर हुसने सुलूक करने
की बातें नबी सल्लम से ऐसी मोहब्बत का दिखावा करेगें की इन से बड़ा हमदर्द कोई नहीं
होगा। लेकिन जहाँ नूपुर शर्मा, टी राजा, नवीन
जिंदाल और उन तमाम गुस्ताख़े रसूल की बात करो तो माफ़ करने की वकालत करने लगेगें। फिर इनकी हमदर्दी का पैमाना नबी से हट कर उन गुस्ताखों
की जानिब माईल हो जाएगा। फिर नबी की मोहब्बत
का पैमाना इन लोगों के नज़दीक माफ़ करना और नबी के उसवाये हसना तक महदूत रह जाएगा। नबी ने अपने दुश्मनों तक को माफ़ कर दिया उनके लिए
रेहमतुल लील आलमीन का लक़ब क़ुरआन में आया तो हम कौन होतें हैं गुस्ताखों से बदला लेने
वाले।
किसी
मुजाहिद सच्चे आशिक़े रसूल की हिम्मत पस्त करना हौसले को कमज़ोर करना संघी, बीजेपी वालों
और गुस्ताख़े नबी के लिए भारत के लिए नरम रुख रखना मतलब ज़ाहिर हो जाता है की वोह संघी
नुमाइंदा है। जो शक होता है वोह कुछ ही अर्से
बाद मज़बूत बन जाता है जब उस शक़्स के फोटो बीजेपी के इजलास में देखे जातें हैं। जब उस शक़्स को बीजेपी की मजलिसों में नाचते हुए
टोपी को हवा में उछालते हुए दाढ़ी के साथ खिलवाड़ करते हुए देखा जा सकता है।
फिर अगर भारत से जंग करने या तक़सीम की बात करो तो हुब्बुल वतनी की वोह हदीस बताना शुरू कर देंगें जिसका मेने कभी मुताला नहीं किया। मेरी नज़रों से तो हुब्बुल वतनी की ऐसी कोई हदीस नज़र में नहीं आई। अगर ज़ालिम की इताअत करना हुब्बुल वतनी है और ज़ुल्म के खिलाफ, ना-इंसाफ़ी के खिलाफ, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी करने वाले हाकिम के खिलाफ, बोलना या जंग करना. हुब्बुल वतनी के फ़लसफ़े की ख़िलाफ़वर्ज़ी करना है तो मुझे ऐसी बगावत और इंक़लाबी मोहीम का हिस्सा बनना मंज़ूर है, मुझे ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त, ना इन्साफ, मस्तूरातों की अस्मतदरी करने वाले शैतान के खिलाफ जंग करना मंज़ूर है लेकिन ऐसी ज़ालिम की इताअत करने जैसी हूबल वतनी मंज़ूर नहीं। क्योंकि मेने तो ना ही ऐसी हदीस और ना ही क़ुरानी क़ौल देखा है बिलफार्ज होगा और मेरे इल्म में नहीं तो वोह ज़ालिम तरीन, ना इन्साफ, दरिंदा सिफ़त हाकिम के लिए नहीं होगा।
अगर
हिन्द का मुसलमान तक़सीम या पाक्सितान की सरहदों की तोहसीह के ख़तरात को महसूस कर के
हर ज़ुल्म और अज़ीयत बर्दाश्त कर रहा है तो उन से मेरी गुज़ारिश है अभी तक खामोश थे क्या
हुआ वही सब तो वैसे भी हो रहा है जो नहीं होना चाहिए।
१. तुम्हारी हर मस्जिद पर अब तो अदलिया की जानिब
से डाका डाला जा रहा है और उसको अहले हुनूद वोह भी शिद्दत पसंद और दहशतगर्दों के हवाले
कर दिया जा रहा है।
२. जिन दहशतगर्दों ने तुम्हारी बेहेन बेटिओं की
अस्मत दरी की उनको लूटा तुम्हारे अपनों का क़त्लो ग़ारत किया उनके रोज़गार को तबाह किया
उनको बाइज़्ज़त बरी किया जा रहा है।
३. तुम्हारे तालीमी इदारों (मदरसों, स्कूलों, यूनिवर्सिटीज)
को तोडा जा रहा है। तुम्हारे घरों को तोड़ा
जा रहा है।
४. तुम्हारी शरीयत पर डाका डाला जा रहा है उसको
तब्दील किया जा रहा है। मस्जिदें इस्लाम का
अहम हिस्सा नहीं हैं, नमाज़ इस्लामिक फ़रीज़ा नहीं है, नक़ाब या हिजाब इस्लाम का हिस्सा
नहीं है। मर्द नमाज़ नहीं पड़ सकते, चेहरे पर
दाढ़ी नहीं रख सकते दुख्तराने मिल्लत हिजाब नहीं पहन सकती। दाढ़ी वाले मर्दों की दाढ़ी भरे बाजार नोची जाती है। उनको दाढ़ी की वजह से बज़र्ब मारा पीटा जाता है। दुख्तराने मिल्लत का हिजाब रोड पर उतरवाया जाता
है।
५. तुम्हारी शिनाख्त को मिटाया जा रहा है। हर उस चीज़ को तबाह किया जा रहा है जिससे की इस्लाम
और मुसलमान इस मुल्क का हिस्सा थे वोह ज़ाहिर होता होगा।
वैसे
भी वोह सब हो रहा है जो तक़सीम के वक़्त हुआ था।
तो अब तमाम मुसलमानों को पाकिस्तान से लगी सरहद की तोहसीह करना चाहिए और बंगलादेश
से लगी सरहद पर बिहार, मग़रिबी बंगाल और आसाम के मुसलमानों को दाख़िल होना चाहिए। फिर जो हाल ग़द्दारे पाकिस्तान, ग़द्दारे इस्लाम मुजीबुर्रेहमाँन
के साथ किया था वही हाल उसकी लौंडिया के साथ करना चाहिए। फांसी पर लटकाने से क़ब्ल मुजीब के कुत्ते तक को
हलाक कर दिया था। उसकी लौंडिया के साथ भी वही
सब करना चाहिए। मुजीब की लौंडी भी मुनाफ़िक़
पैग़म्बर मोदी की गुलाम है। जैसा की उसका बाप
था।
फिर
बंगलदेश पाकिस्तान से एक एक मंदिर तोड़ कर एक एक काफिर को वहां से भगा कर दोनों मुमालिकों
की सरहद की तोहसीह कर देना चाहिए।
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