Thursday, 8 September 2022

शेर की खाल में छुपे भारतीय गीदड़ (भेड़िये)

अज़ीज़ नाज़रीन,

अज़ीम इस्लामिक रियासत पाकिस्तान का एशिया कप में अफगानिस्तान पर फतह का परचम लहराना था की उस फतह की तकलीफ और जलन भारत में मौजूद गीदड़ों, संघी दहशतगर्दों के दिलों दिमाग पर एक जूनून पैदा करने लगी।  जितने भी भारतीय गीदड़ इस्लामिक रियासत यूनिटेड अरब अमेराब में एक दरन्दाज़ के जैसे भारत को फाइनल में देखने की आरज़ू लिए दाखिल हुए थे उनकी आरज़ू चकना चूर हो गयी।  उनका तमाम जादू टोना टोटका मंतर का असर ज़ाइल हो गया और भारत के हाथ लगी ज़लालत भरी हकाल पट्टी।

दिल के अरमा, आसूओं में बह गए।

अब ऐसे में अपनी मायूसी का ग़ुबार किस के ऊपर निकालते तो उन भारतीय गीदड़ों ने अफ़ग़ान शेरों की खाल पहन कर दंगा फसाद मचाना शुरू कर दिया।  वैसे भी भारत के संघी, शिद्दत पसंद काफिर और बीजेपी वाले दहशत मचाने में मशहूर हैं।  जब वोह अपने खुद के मुल्क को बर्बाद किये जा रहें हैं तो एक इस्लामिक रियासत को कैसे बख्शेंगे।  उसको तो बेदर्दी से बर्बाद करने में सरे फेहरिस्त रहेंगे।

फिर इन भारतीय संघी और शिद्दत पसंद काफ़िरों ने अफ़गानी क्रिकेट यूनिफार्म में पाकिस्तानी फेन्स पर अपना ग़ुबार निकाला और उनके ऊपर कुर्सियां फेंकी मार पीट की गई।  ताके सभी को ऐसा लगे की अफगानी और पाकिस्तानी लड़ रहें हैं।  जबकि वोह अफ़ग़ानी शेर नहीं बल्कि वोह  संघी, कट्टरपंथी काफ़िर और भारत से आये हुए अफ़ग़ानी खाल में छुपे भारतीय भेड़िये हैं।   दूबाई हुकूमत से गुज़ारिश है इनको पकड़ कर इनका पिछवाड़ा लाल करो सब क़ुबूल देंगें किस के इशारे पर हंगामा किया है। 

दरअसल इनको काफिर शिद्दतपसन्द टीम को फाइनल में देखने की खूब आरज़ू थी।   जब आस टूटी तो इन काफिरों की टोटी टूटी और इन्होने हंगामा मचा दिया और नाम अफगानिस्तान पर लाद दिया।  अगर सबसे ज़्यादा इज़ा और तकलीफ अफगानिस्तान की शाकिस्त से किसी को हुई है तो वोह भारत को हुई है ना की अफगानिस्तान को हुई होगी।  फिर पाकिस्तान की शाकिस्त से सबसे ज़्यादा फायदा किस को होने वाला था भारत को ना की अफ़ग़ानिस्तान को।  आस फाइनल खेलने की भारत की थी, अफगानिस्तान को भी इल्म होगा की हम फाइनल में हरगिज़ नहीं पहुंच सकेगें।  क्योंकि अगला मुक़ाबला भारत से होगा।   इस मुद्दे पर जो भी अवाम ट्वीट कर रहें हैं उनको मामले की पूरी तहक़ीक़ात से आगाह किया है और उनको ५-७ ट्वीट किये हैं।

की हगामा करने वाले अफ़ग़ानी नहीं बल्कि भारतीय हैं।  जहाँ तक मैदान पर झगडे दंगा फसाद का सवाल है तो वोह भी अफ़ग़ानी नहीं बल्कि अफ़ग़ान टीम में मौजूद भारतीय ग़ुलाम सोच है।  अफ़ग़ानिस्तान की तो अपनी कोई टीम ही नहीं है।  दूबाई में मुक़ीम भारतीय और पाकिस्तानी अवाम को ले कर टीम बनाई गई है। अफ़ग़ानिस्तान की टीम के झगड़ू वैसे ही हैं जैसा की भारत का गुज्जू दलाल इरफ़ान पठान और कैफ़ जैसे दरिंदे मुसलमानों पर लानत है इन जैसे ज़मीर फ़रोश ग़ुलाम सोच और मोदी भक्ति पर, जब जब पाकिस्तान के खिलाफ मैच होता था भारतीय संघी दहशत तो खुद आगे नहीं बढ़ते थे और इन जैसे ज़मीर फरोशों को आगे कर के दंगा करवाते थे।  वही हाल अब अफ़ग़ानिस्तान की टीम के साथ है। 

ऐसी ही हालत अभी हाल ही में खेले गए टी-२० आलमी कप में हुई थी तब भी अफ़ग़ान की पाकिस्तान पर फतह के ऊपर भारतीय टीम सेमी फाइनल का खवाब सजाये बैठी थी।  लेकिन हुआ उसके उल्टा जैसा की  एशिया कप में हुआ है पाक जीत गया फिर किया था वही हंगामा अफ़ग़ानिस्तान का पाकिस्तान के फेन्स को मार पीट करना लहू लूहान करना।  उस वक़्त भी लिखा था की सभी को मालूम है की एक मैच जीत कर अफ़ग़ानिस्तान सेमी फाइनल में नहीं पहुंच सकता, लेकिन पाक की हार से भारत की सेमी फाइनल में पहुंचने की उम्मीद जाग जाती सो पूरी नहीं हुई और हिंदुस्तानी फेन्स ने अफगानी यूनिफार्म में दंगा फसाद मचा दिया था।    

दूबाई हुकूमत से एक गुज़ारिश और है इन स्टेडियम में दंगा फसाद करने वालों कुर्सी तोड़ने वालों पाकिस्तानी फेन्स पर जान लेवा हमला करने वालों को गिरफ्तार किया जाए।  और पकड़ कर ऊदा नीला कर के पूछ ताछ की जाए सब उगल देंगें के किस के इशारे पर इन्होने यह गन्दी हरकत की है।  नुकसान की भरपाई का हर्जाना भारत में बैठे इन काफिर आतंकवादिओं के आक़ा और आतंक के सरगना मोदी से वसूल किया जाना चाहिए।  जब माल लगा है घटने लगा कलेजा फटने।  इन काफिरों को आर्थिक पनिशमेंट के साथ साथ पीनल पनिशमेंट भी होनी चाहिए।  

सख्त सज़ा होना चाहिए ताके मुस्तक़बिल में ऐसी वाहियात हरकरत कोई ना कर सके।  नहीं तो भारत से आने वाले तमाम फेन्स से वीसा देते वक़्त एक बांड लिख कर लेना चाहिए, की कोई दंगा फसाद नहीं करेगें। 

Zuber

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