(BSF) का सब इंस्पेक्टर दीफाई फोजों के साथ लड़ते हुए मारा गया उसको दीफाई फौजों की हार्ट अटैक यूनिट ने मौत के घाट उतारा है। काम तमाम किये हुए खाकी आतंकी की पहचान शशांक रावत आला ज़ात का हिन्दू के रूप में हुई है और वोह महज़ २८ साल का जवान था। मारा गया आतंकवादी का बाप शिव चरण रावत पलवल के गांव धतीर में प्रोफेसर की हैसियत से काम करता है और उसकी माँ सुनीता एक निजी स्कूल में टीचर है। इस आतकवादी को जो संस्कार उसके घर से मिले थे उसी पर चल कर वोह हिन्दू आतंक की फाॅर्स में शामिल हो गया था। फिर इसके माँ बाप जो बच्चो में ज़हर भरने का काम करते होंगे, वैसे भी भारत में आज कल टीचर और प्रोफेसरों की हैसियत हिन्दू आतंक को बढ़ावा देने की हो गई है। जिसका ज़िक्र यह सहाफी कई मज़मूनों में कर चूका है।
मारा गया आतंकवादी हरयाणा का रहने वाला था। उसके मौत की वजह दिल में ज़बरदस्त खौफ और फिर दिल फट जाने से हुई। हार्ट अटेक।
मारा गया आतंकवादी शशांक की लाश को उसके पलवल की आदर्श कालोनी में लाया गया जहाँ उसके बाप शिव चरण रावत ने उसको जला डाला। मारे गए आतंकवादी की बहिन श्रीनगर में युवाओं में आतंक का ज़हर भरने का काम करती है। कहने को तो वोह डॉक्टरों है लेकिन उसके अय्याशी और आतंक की कहानी और कुछ है।
शशाक की महज़ २८ साल की उम्र में मौत से आतंकवादी के घर में मातम पसरा हुआ है। इस मौके पर आतंक की राजनैतिक विंग की मुख्या का मुख्या विधायक दीपक मंगला ने उसको श्रद्धासुमन दिए। एक आतंकी की लाश पर फूल डालने को ले कर पूरे देश में हगामा मच गया है। सभी पूछ रहे हैं की आतंक को बढ़ावा कब तक देती रहेगी भगवा तंज़ीमे। इस मौके पर विधायक उक्त आतंकवादी को देश का सपूत बोला और उसकी मौत को शहादत का दर्जा दिया। आगे उसने कहा एक वीर सपूत देशसेवा में शहीद हो गया उनके योगदान को कभी भूलाया नहीं जा सकता। उनकी कमी कभी कोई पूरी नहीं कर सकता। विधायक के बयान के ऊपर भी सभी ने सख़्त एहतेजाज दर्ज किया है जिसमे उक्त विधायक दीपक मंगला आतंकी मौत के गुणगान और महिमा मंडन कर रहा है।
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