अज़ीज़ नाज़रीन,
आर्मीनिया
- अज़रबाइजान जंग तीसरे आलमी जंग की जानिब बढ़ती जा रही हैं। खदशा और अंदेशा है की इसराईल और दीगर मुस्लिम मुमालिकों
के दरमियान भी, जंग शुरू हो सकती है। अगर तीसरी
आलमी जंग होती है तो फलस्तीन, कश्मीर, कोसोवो, बोस्नियां जैसे तमाम मुतानाज़े मसले हल
होंगें। इस मुद्दे २०१७ से कई मज़मून लिखें
हैं की कश्मीर का मसला जंग के बग़ैर हल ना होगा।
फिर इमरान ख़ान की हुकूमत का इक़्तेदार आने के बाद जब उन्होंने बात चीत की पुरज़ोर वकालात की थी और मसलाये कश्मीर को अक़वामे मुताहिदा की जानिब ले कर गए थे तब भी जो बात हर बार कही है वही कही थी, लाख इमरान ख़ान मसलाये कश्मीर को अमन पसंद हिकमते अमली के बग़ैर ख़ून रेज़ी से हल करने की कोशिश कर लें लेकिन कश्मीर मसला जंग के अलावा हल नहीं होगा। दूसरी बात कही थी की जंग का आग़ाज़ पाकिस्तान की जानिब से नहीं होगा। इमरान ख़ान लाख जंग टालने की कोशिश करेगें लेकिन उनको जंग करना ही पड़ेगी। उनकी जंग के मुज़िर असरात और जंग टालने की तमाम हिकमत नाकाम साबित होगी। जंग का आग़ाज़ पाकिस्तान नहीं बल्कि हिंदुस्तान जंग करेगा, पाकिस्तान पर हमला करेगा। हिंदुस्तान के अंदुरुनी हालात ऐसे हो जायेगें की हिन्दुस्तानी हुकूमत को अपनी ग़फ़लत और कमज़ोरी को पोशीदा करने के लिए पाक पर हमला करना पडेगा। पाकिस्तान पर जंग मुस्सल्लद की जाएगी या थोपी जाएगी।
तमाम हालात तीसरी आलमी जंग की जानिब इशारा कर रहें हैं। अगर तीसरी आलमी जंग हुई तो बोहोत बड़ी तबाही होगी। ना सिर्फ बार्रे सग़ीर के लिए बल्कि आलमी इंसानियत की बड़ी तादात में हलाकत होगी। लेकिन एक बात वाज़े है की तीसरे आलमी जंग के बाद तमाम आलम में मुख़्तलिफ़ मुमालिकों का अक्स और नक्शा तब्दील हो जाएगा। अपने आपको क़वी और सुपर पावर तस्सव्वुर करने वाले कई मुमालिकों में बड़ी तादात में तबाही आएगी। बार्रे सग़ीर का नक़्शा भी काफी हद तक तब्दील हो जाएगा।
अभी तो अवाम को बोहोत कुछ देखना और मालिके कायनात को दिखाना बाक़ी है।
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