नाज़रीन इकराम बार्रे सग़ीर में जो मौजूदा हालात हैं उनमे तमाम आलम में इस्लाम की फतह वाज़े देखी जा सकती है। २०२० के इक्तेदाम पर बोहोत से इस्लाम दुशमन और ग़ासिप मुमालिकों को अपना नाजाइज़ दावा छोड़ कर नाजाइज़ क़ब्ज़ा किया हुआ मुस्लिम हिस्सा खोना पड़ेगा। जिसकी शुरूवात अर्मेनिया से हो चुकी है। अर्मेनियाँ ने अज़रबाइजान का बोहोत सा हिस्सा मुतानाज़ा कर उस पर ना जाइज़ क़ाबिज़ कर लिया था और अपने फौजी अहलकार वहां पर मुस्सल्लद कर दिए थे।
लेकिन
गुजिस्ता १ महीने से ज़ाइद जारी जंग में अर्मेनिया तक़रीबन हार चूका है और अपने हलाक शुदा फ़ौजिओं
की लाशों को चुनता फिर रहा है। जब जंग में
हार का सामना हो चूका है तो ऐसी सूरते हाल में अब अर्मेनिया मुजाकेरात के बाब खोलने
की सिफारिश कर रहा है।
नाज़रीन
इकराम आपको इस बात का इल्म बाखूबी होना चाहिए की अर्मेनिया को भारत और इसराइल फौजी
और दीगर इमदाद फ़राहम कर रहे थे। और मज़े की
बात तो यह है की दोनों ही मुमालिक सख़्त तरीन दहशतगर्दी, इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी,
मुसलमानों के पहले दर्जे के दुश्मन, इस्लाम से सख़्त तरीन कीना बुग्ज़ और हसद रखने वाले,
ना इन्साफ, मुस्लिम इलाक़ों पर, मुस्लिम इबादत गाहों पर नाजाइज़ क़ब्ज़ा करने वाले मुल्क
हैं। जबकी अज़रबाइजान को पाकिस्तान और तुर्की
फौजी और दीगर इमदाद फ़राहम कर रहे थे। और यह
दोनों मुमालिक अमन पसंद, इन्साफ पसंद, तरक़्क़ी पज़ीर, इंसानी हुक़ूक़ का तहफ़्फ़ुज़ करने वाले
मुमालिक हैं।
अर्मेनिया की इस शिकस्त से दहशत गर्दी की पनाह गाह भारत और इजराइल को ज़बरदस्त झटका और नदामत से रू बरू होना पड़ रहा है। अर्मेनिया की इस शाकिस्त को मुस्लिम सियासत दान कश्मीर और फलस्तीन में भी ऐसी ही कारगर्दिगी कर के इन गुलाम मुस्लिम मुल्कों को आज़ाद करवाने की बात कर रहें हैं। वाज़े रहे की कश्मीर तक़रीबन आज़ाद हो चूका है। अब वहां भारत का और उसका नाम लेने वाला वली वारिस शायद ही कोई हयात रहा होगा। ऐसा कह सकते हैं की भारत के वज़ीरे आज़म मोदी और वज़ीरे दाखला अमित दोनों ही हलाक हो चुके हैं लेकिन उनकी लाशों को देख कर कहा जा सकता है की यह लाशें अमित और मोदी की हैं। उसी हिसाब से कश्मीर आज़ाद हो चूका है। लेकिन महज़ अब कुछ और मुतफ़र्रिक़ रसूमात बाक़ी रह गई हैं, जिसकी वजह से भारत कश्मीर को अभी भी अपना तस्लीम कर रहा है। कश्मीर का अवाम हरगिज़ हरगिज़ भारत के साथ नहीं है। जिस हिसाब से गले लग कर ०५ अगस्त २०१९ को कश्मीरी अवाम का क़त्ले आम किया था खून ग़ारत की थी कश्मीरी अवाम की नस्ल कुशी की थी उससे कश्मीरी अवाम बोहोत ही बर्गश्ता है। अब तो जो सियासत दान कभी भारत की ऐवान में बैठ कर भारत की शान में बड़े बड़े कसीदे पड़ते थे, दस्तूर पर मुकम्मल एतेमाद दिखाते थे और पुर एतेमाद थे की हमारे साथ कभी धोखा नहीं होगा वोह भी भारत से खिलाफ हो चुके हैं। अब तो अवाम मज़ीद भारत की जानिब से किसी भी किस्म की पेशकश के हामी नहीं हैं और हरगिज़ हरगिज़ भारत की हुकूमत के साथ जाने को तैयार नहीं हैं।
अज़रबाइजान ने जिस हिसाब से अपने मुस्लिम हिस्से ग़ासिप अर्मेनिया से हासिल किये हैं। कश्मीर भी भारत से अलहदा हो कर पाकिस्तान का हिस्सा बन चूका है। बल्कि जहाँ तक इस सहाफी की तहक़ीक़ कहती हैं और जानकारी फ़राहम हुई हुई हैं, दीफाई फौजी भारत के शुमाली हिस्से पर काफी अंदर तक पहुंच चुके हैं। गढ़वाल, शुमाली उत्तर प्रदेश, हरयाणा, शिमला दीफाई फोजों के तक़रीबन क़ब्ज़े में हैं। भारत की इन्तेज़ामियाँ और हुकूमत की जानिब से इस मुद्दे पर एलान करना महज़ अब एक रस्म अल खत रह गया है। हुकूमत की जानिब से ऐलान करने के बाद दीफाई फौजी अपनी पकड़ मज़ीद मज़बूत कर लेंगें।
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