अज़ीज़
नाज़रीन,
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Pakistan Prime Minister Mr. Imran
Khan Save our Soul (SoS)
दिल्ली
में जो कुछ भी बरहना रक्स हिन्दू दहशतगर्दों ने किया है वो सब उस मश्क़, आलूद और ज़हर
का नतीजा है जो मुतवातिर उनके ज़ेहनों में वतन परस्ती के फरेब के नाम पर भरा जा रहा
था. नाज़रीन यहाँ ये बात वाज़े रहे की अभी तक
जितने भी गद्दारी, बगावत या भारत की एहम ख़ुफ़िया, फौजी या इन्तेज़ामियाँ जानकारी पाकिस्तान
को मोहिय्या करवाते हुए पकडे गए हैं वो सभी हिन्दू आला ज़ात मिश्रा, चौबे, चतुर्वेदी
शिद्दत पसंद और संघ या बीजेपी से ताल्लुक़ रखने वाले ही हैं. हाल ही में ट्रम्प के दौरे से महज़ दो दिन क़ब्ल कुछ
१० आला ज़ात के हिन्दू पाकिस्तान को एहम जानकारी फ़राहम करने के इलज़ाम में पकडे गए हैं. लेकिन वो खबर ऐसी पोशीदा कर दी गई जैसे कुछ हुआ
ही नहीं. बरक्स अगर कोई जुम्मन मियां पकड़ा
जाता तो उसको पीट पीट के पुलिस नहीं बल्कि हिन्दू शिद्दत पसंद ही हलाक कर डालते. उसके बाद उन हिन्दू शिद्दत पसंदों के मुवाफ़ेक़त में
संघी, बीजेपी और शिद्दत पसंदों की तैयार करदा सोशल मिडिया की फौज रहती जो गद्दारों
को मारने जैसे अमल पर हौसला अफ़ज़ाई करते हुए उनके मुवाफ़ेक़त में एक मोहीम तैयार करती.
नाज़रीन
इन दहशतगर्दों को सभी मुसलमान गद्दार नज़र आतें हैं. वो भी जो हुकूमत के सियाह क़ानून के खिलाफ आवाज़ उठाये
और वो भी जो हुकूमत के किसी भी ना ज़ेबा फैसले पर तब्सिरा चाहे. ये सभी चीज़ें तो दस्तूर और जमुहरियत का एक एहम हिस्सा
हैं. हुकूमत के किसी भी ना ज़ेबा अमल पर एहतेजाज
करना कहाँ से कहाँ तक गद्दारी हो जाती है.
दिल्ली
की फ़िज़ा को गर्द ग़ुबार के आलूद और खून से सुर्ख़ करने में ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और
लँगूरनियों का बड़ा किरदार रहा है. उन्होंने
ही शाहीन बाग़ की मस्तूरातों के खिलाफ इश्तेयाल अंगेज़ी भरी खबरे शाया करना शुरू की थी. ताहम आज ३ महीनों से ज़ाइद मस्तूरातें धरने में शामिल
थी लेकिन एक भी दंगा फसाद या क़त्ले आम नहीं हुआ.
और २ दिन क़ब्ल हिन्दू दहशतगर्द और जंग में हारा हुआ फौजी आया और उसने मस्तूरातों
के खिलाफ ज़हर अंगेशी कर के मसले को हिन्दू मुस्लिम रंग दे दिया और दंगा भड़का दिया जिसकी वजह से १३ मुस्लिम शहीद हुए.
दिल्ली के दहशतगर्दाना हमले को असदुद्दीन ने फ़िरक़ावाराना फ़सादा मानने से इंकार करते हुए इसको हुकूमत के ज़ेरे क़यादत हमला क़रार दिया. जो बिलकुल दर हक़ीक़त है उसपे तास्सुरात ऐसे जिससे इन शिद्दत पसंदों में पेवस्त आलूद और ज़हर की अक्सरियत का अंदाजा हो जाता है.
John18h
अससुद्दीन, हरा मज़ादे, अब पुलिस उठवायेगी तेरे कोठेवालिओं को. बेहतर है की तू अपने भाई और लावारिस पठान के साथ कहीं छुप जा.
जैसे ही आज डोनाल्ड ट्रम्प का हवाई जहाज एयरफोर्स-१ , हमारे रनवे से अमेरिका के लिए परवाज़ करे, दिल्ली पुलिस को चाहिए कि १ मिनिट भी रुके बग़ैर दंगाइयों पर crackdown शुरू करे !
शाहीन बाग़ की मस्तूरातों के लिए महज़ एक दो शिद्दत पसंद काफिरों की ज़ेहनियत एक जैसी पस्त और अदना नहीं है बरक्स सभी दहशतगर्दों, शिद्दतपसंदों, संघी, बीजेपी वाले और लंगूर-लँगूरनियों की ज़ेहनियत एक जैसी है. दूसरी बात जहाँ तक मुस्लिम सियासत का सवाल है सभी सियासतदां एक अहमक़ के जैसे क़ानून, सुप्रीम कोर्ट, ऐवान, दस्तूर, हुकूमत, पुलिस, फौज से मदद की बात करतें हैं.
मेरा उन सभी सियासतदाओं ख़ास असदुद्दीन ओवेसी जैसे आला तालीमी आफ़ता बेरिस्टर से सवाल है जब हुकूमत ने आपको पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया है. जब हुकूमत ने आपके क़त्ल के पूरे साज सामान तैयार कर लिए हैं फिर भी अगर आप हुकूमत से किसी मदद की उम्मीद रख रहे हो तो ये आपकी नाहेली है. एक तरफ तो आप हुकूमत की ज़ेरे क़यादत दहशत हुई इस फलसफे पर ज़ोर डाल रहे हो दूसरी जानिब आप ये बयान दे कर की दिल्ली को फौज के हवाले कर दो, सेना पर एतेमाद दिखा रहे हो. ये कैसे मुमकिन हैं अगर हुकूमत ने दहशत फैलाई और वो आपका क़त्ले आम करना चाहती है तो कैसे वो आपकी मदद करेगी.
आपको तो खुल के अब पाकिस्तान और दीगर मुस्लिम मुमालिकों से मदद तलब करना चाहिए. जंग का आगाज़ हो चूका है और अगर आप अब भी मोदी हुकूमत से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हो तो में समझता हूँ की आप १९७१ में जिस तरह से अमेरिका की फरेब पर पाकिस्तान पुर एतेमाद था की इमदाद आएगी वैसा ही कर रहे हो. फिर जिस हिसाब से ज़ुल्म, जब्र के ख़िलाफ़ मुजीबुर्रहमान ने भारत से मदद तलब की थी उसी तर्ज़ पर पाकिस्तान से आज के हालात में मदद तलब करने में कोई शर्म और हया नहीं होनी चाहिए. शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के ना ज़ेबा तास्सुरात और असदुद्दीन के बयान के बाद एक ट्वीट कर चूका हूँ.
जैसे ही ट्रम्प अमेरिकन एयर फ़ोर्स से उड़ान भरें की हमको एक मिनिट भी नहीं रूकना चाहिए पाकिस्तान के साथ मिल के जंग शुरू कर देना चाहिए. ओवेसी जी क्या आपको पता है जिस पाकिस्तान ज़िंदाबाद को आप पानी पी पी के कोसते हो और हिंदुस्तान मुर्दाबाद की क़ानून, पुलिस, संसद की दुहाई देते रहते हो तुम्हारे और तुम्हारी क़ौम पर बूरा वक़्त पड़ने पर पाकिस्तान ज़िंदाबाद ही साथ आता है. हिंदुस्तान मुर्दाबाद और वहां के काफिर कट्टरपंथी आतंकिओं के ऊपर भरोसा कर के तुम खुद अपनी क़ौम को मौत की आगोश में धकेल रहे हो. इमरान खान ने लीचिंग पर थोड़ा सा बयान क्या दिया था की तुमको अंगार लग गई थी. बोलते थे इमरान खान अपना देश सम्भालो हम हिन्दुस्तान के M0SLMAN सरकार से अपना हक़ लेना जानते हैं. चाहे वो मोदी जैसा सख्त मिजाज़ ही क्यों न हो. हमारे पास संविधान है क़ानून है सुप्रीम कोर्ट है. क्या हुआ सब ने मिल कर घुसा दिया अंदर.
जब हुकूमत आपसे आपके जीने का हक़ छीन ले तो आपको ज़िंदा रहने के लिए हर किस्म की जद्दो जेहद करने का हक़ है. किसी भी दरवाज़े को खटखटाने का हक़ है. ये बात तो वाज़े हो चुकी है की, आलूद की अक्सरियत हिन्दुस्तान में इस क़दर बढ़ गई है की अब आपको पाकिस्तान पर ही एतेमाद दिखाना पड़ेगा. वैसे भी मारे जा रहे हो मदद मांग के भी अगर मारे जाते हो तो कोई हर्ज नहीं. फिर अगर मदद मांगने पर ज़िंदा रहे तो हो सकता है आप अपने मक़सद में ना सिर्फ कामयाब हो जावो बल्कि आती नस्ले आपको दुआ दें.
जो अवाम आज तख़्तियां ले कर हिन्दू मुस्लिम एकता ज़िंदाबाद, हम सब एक हैं. जैसे नारे लगा रहे हैं वो सब सिर्फ और सिर्फ फरेब है. हो सकता है वो संघी और दहशतगर्दों की चाल हो कहीं पाकिस्तान के साथ मिल कर मुस्लिम जंग का आगाज़ ना कर दें. दूसरी वजह इस बटवारे की मोहीम को कमज़ोर करने की कवायत. अब अगर सेक्युलर हिन्दू बचे हैं तो वो सिर्फ १००० में से एक या दो ही होंगे. यहाँ पर में उस स्वाति खन्ना नाम की ख़ातून का नाम लेना चाहूंगा जिनको दिल की गहराइयों से सलाम करता हूँ. ऐसे सच्चे सेक्युलर हिन्दू आज कल सिर्फ ना के बराबर ही बचे होंगे. अब अगर जो कोई भी हिन्दू मुस्लिम एकता की बात करता है उसमे उसका कुछ तो जाती मफ़ात पोशीदा होता है. क्योंकि जिस तरह के तास्सुरात और नज़ारियात आतें हैं मुसलमानों के ख़िलाफ़ उससे ज़ाहिर हो जाता है की बरियानी अब पक चुकी है.
में सहाफी जुबेर अपनी तंज़ीम की जानिब से पाकिस्तान के वज़ीरे अज़ाम इमरान ख़ान से मदद की दर्ख़्वास्त करता हूँ. में मेरी तंज़ीम की जानिब से अस.ओ.अस. (सेव अवर सोल) भेज रहा हूँ. इस अपील में मेने तमाम भारत के मुस्लिम अवाम को शामिल नहीं किया है. और ना ही मेरे अपने एहले ख़ाना को शरीक किया है. हो सकता है कोई जुम्मन मियाँ उठ कर बोल दे सून ले जुबेर तुम्हारे १५ करोड़ मुसलमानों की मदद की दरख़ास्त में शामिल नहीं हूँ. या हो सकता है कोई जावेद अख्तर जैसा उठ कर बोल दे की हमको हमारे वज़ीरे अज़ाम मोदी पर यक़ीन हैं हम पाकिस्तान से मदद नहीं लेंगे.
जिन मुसलमानों को अभी तक मोदी के फरेब पर यकीन है की उनके साथ किसी किस्म का धोखा नहीं हो रहा है और उनके क़त्ल के पूरे साज सामन तैयार कर के नहीं रखे गए हैं. वो मोदी पर यकीन करें, भारत के क़ानून, सुप्रीम कोर्ट, पुलिस, हुकूमत, इंतेज़ामिया, फौज पर यकीन करें. हमें तो वज़ीरे अज़ाम इमरान ख़ान पर ज़्यादा एतेमाद है बजाये मोदी के. यहाँ तक की में दावे के साथ कह सकता हूँ, अगर इमरान ख़ान सच्चे मुस्लिम होंगे और क़ुरान, हदीस, इस्लाम के फलसफे को पूरी तरह से अमल करतें होंगे तो ना सिर्फ मुस्लिम बल्कि कोई भी गैर मुस्लिम हिन्दू, सिख, जैन, बोध, खिच्चन, पारसी सभी मेहफ़ूज़ रह सकतें हैं. जो मोदी हुकूमत में अपने आपको दहशत के ज़ेरे साये पाते हैं.
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