अज़ीज़ नाज़रीन मेरे हम वतनों,
आज के रोज़ दो हम मुद्दों पर आप हज़रात से रू बरू हुआ हूँ. एक जामिया के तालिबे इल्मों पर फिर से ख़ाकी दहशत दूसरा गर्गी यूनिवर्सिटी में तुलबाओं के साथ जिन्सी दहशत.
पहला बाब.
जामिया मिलिया इस्लामिया के तालिबे इल्मों ने बरोज़ पीर को शहरियत कानून के ख़िलाफ़ इहतजाजी मार्च निकाला, जिसमें उनके ऊपर पुलिस ने जब्र किया और दहशत का माहौल पैदा किया जिसके चलते काफी सारे तुलबा ज़ख़्मी हुए हैं. दिल्ली पुलिस ने तुलबाओं के मार्च को ऐवान की जानिब जाने से रोका जब तुलबा नहीं रुके तो उन पर पुलिस ने हमला किया.
जामिया की एक तुलबा का इस मामले पर कहना है कि उस पर लेडीज पुलिसकर्मी ने हमला किया और बुर्का उतार फेंका. वहीं समाजवादी पार्टी के सरकारी टि्वटर हैंडल से ट्वीट किया गया है कि दिल्ली में सीएए के खिलाफ पूर अमन जुलूस पर निकले तालिबे इल्मों पर लाठीचार्ज अज़हद तशवीशनाक और दुखद है. दस्तूर से मिले स्याह कानून और मुख़ालेफ़त के हक़ को भी ताक़त के ज़ोर पर कुचला जा रहा है. हम तालिबे इल्मों के साथ हैं और ज़ख़्मी तालिबे इल्मों के लिए हमारी तमाम हमदर्दी है. हम इस बुज़दिली के मुज़ाहिरे sकी सख्त मज़्ज़मत करते हैं.
अब तक जामिया में प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. करीब 200 प्रदर्शनकारी अब भी डटे हुए हैं. पुलिस ने घटनास्थल पर भारी सुरक्षा इंतजाम किए हैं. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उनकी तरफ से कोई लाठीचार्ज नहीं हुई है. लेकिन जो स्टूडेंट्स आगे की लाइन में थे, उन्हें लाठी खानी पड़ी. वहीं जामिया प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों से वापस जाने को कहा है. पुलिस ने दोपहर को जिन प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था, उन्हें छोड़ दिया गया है.
दूसरा बाब
दिल्ली के गार्गी कॉलेज में तुलबाओं पर जिन्सी हमले छेड़छाड़ और फ़िकरेबाज़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कॉलेज की तुलबा कॉलेज में एहतेजाज कर रही हैं. इस बीच दिल्ली ख़वातीन के कमीशन की एक टीम आज कैंपस पहुंची और तुलबाओं से पूरे मामले की जानकारी ली. इसके साथ ही कांग्रेस ने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया.
मालूम रहे की दिल्ली के गार्गी कॉलेज की तुलबाओं ने इलज़ाम लगाया है कि ६ फरवरी को शराब पीकर कुछ बाहरी नावाक़िफ़ अनासिर कॉलेज कैंपस में घुस गए. उन्होंने लड़कियों के साथ छेड़खानी और बदतमीजी की. गार्गी कॉलेज की लड़कियों का कहना है कि ३ दिनों तक चलने वाले फेस्टिवल 'Reverie' के दौरान यह जिन्सी हमला हुआ.
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लड़कियों ने कहा कि जब कॉलेज में फेस्टिवल चल रहा था उस दौरान कुछ शराबी कॉलेज का गेट फांदकर अंदर आ गए. उन्होंने लड़कियों को दबोच लिया और उनके साथ बदतमीजी की. लड़कियों ने इस मामले में फौरी कार्रवाई की मांग की है.
छात्राओं का आरोप है कि बाहर से आए लोगों ने बदतमीजी की हदें पार कर दी. कुछ बदमाशों ने कॉलेज कैंपस में मस्टरबैट तक किया.
मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस के आला अफसर बरोज़ पीर सुबह कैंपस पहुंचे थे और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे थे. उस दौरान पुलिस का कहना था कि हमें अभी कोई शिकायत नहीं मिली है. दोपहर में कॉलेज इन्तेज़ामियाँ ने पुलिस को शिकायत दी. इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.
सहाफी जुबेर की नुक़्ता ऐ नज़र
मोदी इन्तेज़ामियाँ भले ही मामलों को हलके में ले रही है लेकिन इस तरीक़े कार हिकमते अमली से मोदी का तो जो कुछ बूरा होना है होगा ही बरक्स भारत की साख़ और इज़्ज़त को सख्त तरीन ठेस और इज़ा आलमी चबूतरों पर पहुंची है उसकी तलाफ़ी शायद बरसों तक ना हो पाए. २०१५-१६ के बाद हर दुसरे रोज़ भारत के ख़िलाफ़ आलमी मुमालिकों में मज़ाहेरे, एहतेजाज इस बात की गवाही दे रहे हैं जो इज़्ज़त भारत के पुरखों ने बरसों में कमाई थी उसको नालायक, आवारा और बदचलन, बदकार २ औलादों ने कुछ ही दिनों में बर्बाद कर दी.
मस्तूरातों के साथ ज़िना बिल जब्र के मामलात हो (जिसमे ८ साल की आसफा के साथ पुलिस के साथ साथ हिन्दू दहशतगर्दों की मजमूई अस्मतदरी भी शामिल है) या बढ़ते हुए लीचिंग के मामले. बढ़ते हुए फिरकावाराना ममलता हों या हुकूमत की मुत्तसिब कारगरदेगी. चाहे वो बढ़ते हुए ज़ाफ़रानी दहशतगर्दी के मामले हो कश्मीर में हुकूमत की जानिब से हमला करना और मुस्लिम अवाम की नस्ल कूशी के सियाह क़ानून बनाना.
मोदी इन्तेज़ामियाँ के लिए हालात इतने दुशवार कुन हों गएँ हैं की हर मसले पर अब तो आलमी बरादरी मोदी से सबूत फ़राहम करने की बात करती है. चाहे वो इन्तेख़ाब में अपने मुवाफ़ेक़त में राये शुमारी करने के लिए पुलवामा पर अपने ही फ़ौजिओं को मौत के घाट उतारने का मामला हो या पाकिस्तान पर बालाकोट का फरेबी हमला. अब तो हर उस बात के सबूत आलमी बरादरी मोदी इंतेज़ामिया से मांग रही है जिसको कभी १९७१ के बाद हर फोरम में सिर्फ कह दिया तो सही और दुरुस्त मान लिया जाता था.
भारत की आलमी फोरम में अनदेखी की जाने लगी है या तो मदू ही नहीं किया जाता या फिर बेइज़्ज़त किया जाता है. अब मोदी इंतेज़ामिया भले ही बात को तोड़ मरोड़ के पेश करे की भारत ने कश्मीर पर आलमी बरादरी के फलां फोरम को मुस्तरद कर दिया या न्यू यॉर्क में अक़वामे मुताहिदा के इजलास को मोदी अपनी मसरूफियत का हवाला दे कर शरीक ना हो. लेकिन दानिशमन्द सब कुछ समझ जातें हैं की तुमको मदू ही नहीं किया गया है तुम किया मुस्तरद करोगे. और क्या मोदी इतना मसरूफ हो सकता है की अक़वामे मुत्तहिदा का इजलास वो भी अमेरिका में हो और मोदी ना जाए.




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